ज्योतिषाचार्य राजन उपाध्याय के अनुसार सनातन धर्म में साल के कुछ दिनों को ‘स्वयंसिद्ध मुहूर्त’ माना गया है, और उनमें सबसे शीर्ष स्थान पर है अक्षय तृतीया। इस वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व अपने आप में इतना शुद्ध और सकारात्मक है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंडित या ज्योतिषी से मुहूर्त पूछने की आवश्यकता नहीं होती।
क्यों है यह ‘नेगेटिविटी’ से मुक्त दिन:- अक्षय का अर्थ है— ‘जिसका कभी क्षय (विनाश) न हो’। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्मांड की ऊर्जा अपने उच्चतम स्तर पर होती है। इस दिन शुरू किया गया कोई भी कार्य, चाहे वह व्यापार हो, विवाह हो या गृह प्रवेश, उसका प्रभाव स्थायी होता है।इस तिथि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ग्रहों का दोष या किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव शून्य हो जाता है। यही कारण है कि इसे “सर्वसिद्धि मुहूर्त” भी कहा जाता है।
अक्षय तृतीया के गौरवशाली प्रसंग:- यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि इतिहास की कई महान घटनाओं का साक्षी है:
सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ: माना जाता है कि युगों की शुरुआत इसी दिन से हुई थी।गंगा अवतरण: मां गंगा का स्वर्ग से धरती पर आगमन इसी पावन तिथि को हुआ।भगवान परशुराम का जन्मोत्सव: विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्म इसी दिन हुआ था।अन्नपूर्णा अवतार: मां पार्वती ने इसी दिन अन्नपूर्णा का रूप धारण किया था, जिससे धरती पर अन्न का भंडार अक्षय हो गया।
इस दिन क्या करना सबसे उत्तम है:-ज्योतिषियों का मानना है कि अक्षय तृतीया पर सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी उच्च राशि में या अत्यंत अनुकूल स्थिति में होते हैं। इस दिन ‘अक्षय फल’ की प्राप्ति होती है, इसलिए यदि आप लंबे समय से किसी शुभ कार्य को टाल रहे हैं, तो बिना झिझक इस दिन की ऊर्जा का लाभ उठा सकते हैं।याद रखें: इस दिन केवल भौतिक वस्तुओं की खरीदारी ही नहीं, बल्कि मन में अच्छे विचार और दूसरों के प्रति सेवा भाव रखना भी आपको ‘अक्षय’ पुण्य का भागी बनाता है।
दान-पुण्य:- इस दिन किया गया दान अनंत काल तक पुण्य देता है।नया निवेश सोना, चांदी या जमीन खरीदना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।यज्ञ-पूजन घर की शांति और शुद्धि के लिए किए गए अनुष्ठान का प्रभाव कभी खत्म नहीं होता।नया संकल्प किसी बुरी आदत को छोड़ने या नई स्किल सीखने के लिए यह सबसे शुभ दिन है।
