अब रुक जाओ चंद मुट्ठी भर धर्म और राष्ट्रीयता के ठेकेदारों। तुम्हारी लगाई आग से हजारों परिवारों के चिराग बुझ गए हैं। दिलवालों की दिल्ली से दिल गायब हो गई है। आंसुओं के सैलाब से सूखी पड़ी यमुना लबालब हो गई है जिससे तम सबने ने अपनी प्यास बुझा ली है। लेकिन, मुझे पता है कि न तुम मानोगे और न शायद हम। तुम्हारा गला फिर सूखेगा और तुम अपनी प्यास बुझाने को फिर से जहर उगलोगे। हम जैसी भोली–भाली जनता तुम्हारे जाल में फिर से फंसेगी और तुम राजनीति की रोटी सेकने में कामयाब होगे।
आखिर कैसे रुकेगो तुम?
अगर आपने मेरी लिखी ऊपर की चंद लाइने पढ़ी है तो आखिर हम क्यों नहीं इन धर्म के ठेकेदारों को रोकने में कामयाब हो सकते हैं। मेरा धर्म के ठेकेदारों से मतलब सिर्फ मंदिर–मस्जिद के पुजारी या इमाम, मौलबी तक सीमित नहीं है। इसमें हिन्दू और मुस्लिम के उन तमाम छोटे से बड़े राजनीति पार्टी के नेता शामिल हैं जो अपनी राजनीति चमकाने को लेकर आपका–मेरा घर जालाने का काम कर रहे हैं। इस पाखंड की सूची में वो एंकर और मक्कार विशेषज्ञ भी शामिल हैं जो अपनी तरक्की और टीआरपी के लिए किसी हद तक गिरने को तैयार हैं। आखिर हमें मिल क्या रहा है। कोई इंडिया फर्स्ट के नाम पर आपके–हमारे घर में सबसे पहले आग लगा रहा है। तो कोई एंकर कुटील मुस्कान के साथ मुस्लिम हिमायती बनकर आग में धी डालने का काम कर रहा है।
दोस्तों अभी भी वक्त है संभलने जाओ
क्या आप बता सकते हैं कि पिछले तीन महीने से यानी सीएए (नागरिकता (संशोधन) 2019) को लेकर जिस तरह से हिन्दू और मस्लीम विरोधी माहौल पैदा किया गया उससे किसको नुकसान उठाना पड़ा है। क्या दिल्ली के दंगे में उनमें से कोई एंकर या राजनेता को एक खरोंच तक आई है। नहीं, क्योंकि वह सिर्फ और सिर्फ अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। फिर आप और हम क्यों ऐसा कर अपनी खूबसूरत जिंदगी बरबाद करने पर तुले हैं। अब भी वक्त है मेरे दोस्तों। दिल्ली की घटना पर निशब्द हूं। आगे किसी शहर में इसको न दुहराया जाए इसके लिए यह जरूरी है कि हम उनको घृणा को उनको लौटाएं।
न्यूज देखना बंद करो
और एक नेक सलाह की टीवी देखो लेकिन न्यूज़ चैनल मत देखो। देखना है तो तारक मेहता का उल्टा चश्मा देखो या भावी जी घर पे है। जो दिल मे आये वो देखो लेकिन फालतू का न्यूज़ नहीं। ये आपको मानसिक रूप से बीमार बना रहा है। कभी अकेले में बैठ कर सोचना की आपके और पूरे परिवार या समाज के अंदर हिन्दू को मुस्लिम और मुस्लिम को हिन्दू के लिए इतनी घृणा थी। जवाब होगा नहीं। फिर आज क्यों? क्योंकि आपको रोज न्यूज़, सोशल मीडिया और भाषणों के जरिये धर्म का हफीम पिलाया जा रहा है। इसमें हिन्दू और मुस्लिम नेता, एंकर औैर धर्म गुरू अहम रोल अदा कर रहे हैं।
मेरे मुस्लिम दोस्तों जरा सोचना कि क्या सीएए या एनआरसी से कोई किसी को इस देश से निकाल सकता है। कानून बन गया तो बदल सकता है। कानून के ऊपर भी सुप्रीम कोर्ट है। इसलिए आगे इन धर्म के ठेकेदारों के झांसे में ना इसलिए जरूरी है की मस्त रहे और परिवार को समय दें। बाकी आप सब कुछ समझदार है। दंगे में गरीब मरता है नेता और धर्मगुरु नहीं…
