विश्व बैंक के अनुसार पाकिस्तान की करीब 45 प्रतिशत आबादी गरीबी में जिंदगी जी रही है। वहीं, 16.5 प्रतिशत लोग अत्यधिक गरीबी में रहते हैं। यानी ये आबादी दो जून की रोटी के लिए मोहताज है लेकिन शेखी बघारने के लिए रक्षा बजट में 20% की बढ़ोतरी। यह सुनकर आपको अजीब लग सकता है लेकिन पाकिस्तान का यही फितरत ही रहा है। वह हमेशा से भारत से मुकाबले करने की चक्कर में अपनी भद्द पीटाता रहा है। अभी ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान का बैंड बजा दिया। लेकिन उसे सबक नहीं मिली है। पाई-पाई का मोहताज और कर्ज के भरोस चल रहा पाकिस्तान ने रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है।
9 अरब अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त खर्च करेगा
पाकिस्तान ने मंगलवार को अपने रक्षा बजट में 20 फीसदी की वृद्धि की और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2,550 बिलियन पाकिस्तानी रुपए (9 अरब अमेरिकी डॉलर) आवंटित किए। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने नेशनल असेंबली में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 17,573 बिलियन पाकिस्तानी रुपए का संघीय बजट पेश किया। उन्होंने नेशनल असेंबली में वित्त विधेयक के रूप में बजट दस्तावेज भी पेश किया। अपने भाषण में, मंत्री ने कहा कि सरकार ने देश की रक्षा के लिए 2,550 बिलियन पाकिस्तानी रुपए आवंटित करने का फैसला किया है। आप सोच सकते हैं कि जिस पाकिस्तान को पढ़ाई, इलाज और देश के नागरिकों को नौकरी मुहैया देने पर खर्च करना चाहिए, वो कर्ज लेकर रक्षा पर खर्च बढ़ा रहा है। अतंकियों को पोषित करने वाला पाकिस्तान से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है।
पाकिस्तान पर 10 साल में कर्ज 5 गुना बढ़ा
आपको बता दें कि पाकिस्तान पर कर्ज पिछले 10 साल में 5 गुना बढ़ा है। पाक पर कर्ज का बोझ बढ़कर 76,007 अरब पाकिस्तानी रुपया हो गया है। यह आंकड़ा भारतीय रुपये में 23.1 खरब रुपये या लगभग 269.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर है, जो बताता है कि ऋण का बोझ केवल चार वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है। पाकिस्तान पर 2020-21 में 39,860 अरब पाकिस्तानी रुपया कर्ज था। एक दशक पहले, देश का सार्वजनिक ऋण 17,380 अरब पाकिस्तानी रुपये था, जिसका अर्थ है कि दस वर्षों में ऋण लगभग पांच गुना बढ़ गया है।






