अगर आपके घर में एसी काफी पुराना हो गया है तो आपके लिए अच्छी खबर है। भारत सरकार एक धांसू स्कीम पर काम कर रही है। इसको जल्द लॉन्च करने की तैयारी है। इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार, 10 साल पुराने एसी के बदले में कम कीमत में आम लोगों को 5-स्टार रेंटिंग वाली एसी देगी। इससे जहां एक ओर बिजली की बड़ी बचत होगी, वहीं प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में बिजली मंत्री मनोहर लाल ने AC बनाने वाली बड़ी कंपनियों से मुलाकात की और इस योजना पर चर्चा की। मंत्रालय ने इस बारे में नियम तय करने के लिए एक कमेटी भी बनाई है।
कैसे काम करेगी यह स्कीम?
रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राहक अपने पुराने AC को कंपनियों या सरकार द्वारा तय किए गए ई-वेस्ट पार्टनर के पास जमा करा सकेंगे। इसके बदले उन्हें बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) के जरिए नया AC खरीदने पर छूट मिलेगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ये कम कीमतें थोक खरीद और बोली लगाकर तय की जाएंगी, जैसा कि उजाला स्कीम में हुआ था। उजाला स्कीम के तहत पिछले दस सालों में डिस्कॉम के जरिए करीब 369 मिलियन LED बल्ब बांटे गए थे। एक और योजना यह है कि AC बनाने वाली कंपनियां पुराने AC के बदले ज्यादा पैसे दें। सरकार बदले में उन्हें डिस्कॉम से एनर्जी क्रेडिट (जो बिजली बिल में एडजस्ट होगा) देकर उनकी भरपाई करने की योजना बना रही है। अगर ऐसा होता है तो ग्राहक AC तो दुकानों से सामान्य कीमत पर खरीद सकेंगे, लेकिन पुराने AC बदलने पर उन्हें अलग से आर्थिक लाभ मिलेगा।
10 साल से पुराने एसी को बाजार से हटाना मकसद
इस समय भारत में करीब 5 करोड़ एयर कंडीशनर ऐसे हैं जो 10 साल या उससे ज्यादा पुराने हो चुके हैं। आमतौर पर लोग इन पुराने AC को घर के दूसरे कमरे में शिफ्ट कर देते हैं या फिर लोकल दुकानों को बेच देते हैं, जहां से ये दोबारा इस्तेमाल में आ जाते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करना पर्यावरण और बिजली खपत—दोनों के लिए नुकसानदायक है। सबसे बेहतर विकल्प यही है कि इन पुराने AC को कबाड़ में देकर ग्राहक नए और अधिक ऊर्जा बचाने वाले 5-स्टार रेटिंग वाले AC अपनाएं। ये न सिर्फ बिजली की खपत कम करते हैं, बल्कि लंबे समय में खर्च भी घटाते हैं और पर्यावरण पर असर भी कम डालते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) अब एसी के लिए ऊर्जा रेटिंग नियमों में बदलाव की अवधि को हर दो साल करने की योजना पर काम कर रहा है। अभी तक यह बदलाव हर 3-4 साल में किया जाता रहा है। गौरतलब है कि पिछली बार यह बदलाव जुलाई 2022 में किया गया था, जबकि अगली बार इसके 2026 और 2028 में लागू होने की संभावना है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि बाजार में केवल ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण-अनुकूल एसी ही उपलब्ध रहें।
