नई दिल्ली। बिहार ने आज एक बड़ा कदम उठाते हुए “बिहार नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025” की शुरुआत की। इस नई नीति का मकसद है राज्य में साफ और टिकाऊ (हरित) ऊर्जा को बढ़ावा देना, बड़े निवेश लाना और भारत के नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य में अहम योगदान देना। यह नीति साफ ऊर्जा को अपनाने के साथ-साथ रोजगार बढ़ाने, तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने और राज्य को निवेश के लिए पसंदीदा स्थान बनाने की दिशा में बनाई गई है।
नीति का उद्देश्य क्या है?
- बिहार में सौर, पवन, बायोमास जैसे नवीकरणीय स्रोतों से बिजली बनाने को बढ़ावा देना
- बिजली उत्पादन और भंडारण में नई तकनीक अपनाना
- शोध और विकास (R&D) के लिए खास बजट तय करना
- हरित ऊर्जा से रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना
- जनजागरूकता फैलाना कि साफ ऊर्जा क्यों जरूरी है
सरकार का क्या कहना है?
ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा, “यह देश की सबसे प्रगतिशील नीतियों में से एक है। इससे बिहार स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी राज्य बनेगा और निवेशकों के लिए एक बड़ा मौका लेकर आएगा।”
निवेशकों के लिए क्या सुविधाएं?
- नीति में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई बड़े फायदे दिए गए हैं:
- एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली (Single Window Clearance)
- SGST, स्टांप ड्यूटी और भूमि शुल्क की 100% छूट
- 15 साल तक बिजली शुल्क में छूट
- 25 साल के लिए ओपन एक्सेस की सुविधा
- ट्रांसमिशन और व्हीलिंग चार्ज में पूरी छूट
- प्रोजेक्ट के लिए सरकारी ज़मीन प्राथमिकता पर मिलेगी
- ‘मस्ट रन’ दर्जा – यानी इन प्लांट्स को हमेशा चलाने की प्राथमिकता मिलेगी
किसे फायदा होगा?
- प्रोजेक्ट डेवलपर्स को स्थायी बाजार मिलेगा
- स्थानीय लोगों को रोजगार और स्किल ट्रेनिंग के मौके
- राज्य सरकार को निवेश और टेक्नोलॉजी में बढ़त
- पर्यावरण को प्रदूषण रहित ऊर्जा
क्यों खास है यह नीति?
- आने वाले समय में बिहार को 23 गीगावाट हरित ऊर्जा की जरूरत होगी
- नीति में साफ तौर पर कहा गया है कि कम से कम 5% बजट R&D पर खर्च होगा
- निवेशकों को मिलेगा कार्बन क्रेडिट का भी लाभ







