बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल से भारी संख्या में पहुंचे साधक।
गुरुदेव ने दिया धैर्य का महामंत्र, कहा— संकट में विचलित न हों।
भव्य आयोजन में साधकों को मिली गुरु दीक्षा और शक्तिपात की दिव्य चेतना।
सुबह से शाम तक अनवरत चला विशाल भंडारा।
पटना :- अध्यात्म और साधना के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व अध्याय जोड़ते हुए ‘त्रिशक्ति सुहाग सौभाग्य साधना शिविर’ बेहद भव्य और गरिमामय तरीके से संपन्न हो गया। इस आध्यात्मिक महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए न केवल देश के विभिन्न राज्यों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड से, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधक पहुंचे। पूरा परिसर गुरुभक्ति और जयकारों से गुंजायमान रहा।
संकट के समय धैर्य ही सबसे बड़ा संबल: पूज्य गुरुदेव
शिविर में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए परम पूज्य गुरुदेव कैलाश चंद्र श्रीमाली जी ने जीवन प्रबंधन और अध्यात्म का गहरा मर्म समझाया। उन्होंने साधकों को प्रेरित करते हुए कहा:
”जीवन में जब भी कोई बड़ी परेशानी या संकट आए, तो उस समय घबराने की बजाय धैर्य रखने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। विपरीत परिस्थितियों में खोया हुआ धैर्य व्यक्ति को कमजोर बनाता है, जबकि संयम और गुरु-कृपा से बड़े से बड़े संकट को भी पार किया जा सकता है।”
गुरु दीक्षा और शक्तिपात से जागृत हुई चेतना:-
शिविर का मुख्य आकर्षण गुरुदेव द्वारा दी गई दिव्य दीक्षाएं रहीं। पूज्य गुरुदेव ने शिविर में मौजूद सभी साधकों को गुरु दीक्षा और शक्तिपात की दीक्षा प्रदान की। शक्तिपात के दौरान साधकों ने एक असीम ऊर्जा और शांति का अनुभव किया। गुरुदेव ने सभी को सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया।
व्यवस्था रही चाक-चौबंद, सुबह से शाम तक चला भंडारा:-
इस विशाल शिविर को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थीं। शिविर में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए सुबह से लेकर देर शाम तक विशाल भंडारे (महाप्रसाद) की व्यवस्था की गई थी। सेवादारों के समर्पण और अनुशासित व्यवस्था के कारण दूर-दराज से आए साधकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई और सभी ने बेहद सहजता से साधना का आनंद लिया।
शिविर के समापन पर भावुक विदाई के साथ साधकों ने गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की और अपने भीतर एक नई सकारात्मक ऊर्जा लेकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया। यह शिविर क्षेत्र में लंबे समय तक अपनी दिव्यता के लिए याद किया जाएगा।
