बिहार के आम-आवाम और करोड़ों छात्रों को जानलेवा वायरस कोरोना से बचाने के लिए जिले के दस हजार हड़ताली शिक्षक गांवों के वार्ड-स्तर ,टोला एवं शहर के मोहल्ला व गली स्तर पर चलाएंगे जागरूकता अभियान, करेंगें नुक्कड़ सभा का मंचन साथ ही नियोजनावाद के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान भी जारी रखेंगे।
उक्त आशय की जानकारी समन्वय समिति नालंदा इकाई के जिला संयोजक राणा रणजीत कुमार ने दी । वहीं समन्वय समिति के अध्यक्ष मंडल सदस्य संजीत कुमार शर्मा ,रौशन कुमार, मदन कुमार प्रकाश चंद भारती, कुमार अमिताभ, प्रियरंजन ने संयुक्त रूप से कहा कि संकट की इस घड़ी में ना केवल नालंदा के हड़ताली शिक्षक समाज के हर व्यक्ति का हर कदम पर जान की बाजी लगाकर साथ देंगें बल्कि बिहार के लाखों हड़ताली शिक्षक इस कार्य में सबसे आगे रहेंगे।
नेताओं ने कहा कि विभिन्न गतिविधियों अपितु हस्ताक्षर, नुक्कड़ नाटक आदि के साथ आज शनिवार को 27 वे दिन हड़ताल पर डटे हुए हैं।और यह हम हड़ताली शिक्षकों की सभी माँग पूरी होने तक जारी रहेगा। नेताओं ने कहा कि मौसम के बेरुखी के बावजूद 1200 आम जनों, जनप्रतिनिधियों आदि से संपर्क कर हस्ताक्षर का कार्य कराया गया इस प्रकार कुल अब तक दूसरे दिन 6200 लोगों का हस्ताक्षर नियोजनाबाद के खिलाफ कराया गया।
।उधर दूसरी ओर समन्वय समिति नालंदा इकाई की ओर से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष को पत्र संचार के माध्यम से भेजकर मैट्रिक इंटर का मूल्यांकन कोरोना वायरस के मद्देनजर स्थगित करने की मांग की तथा इसकी प्रतिलिपि जिला पदाधिकारी नालंदा एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी नालंदा को शिक्षक हितों के मद्देनजर अनुशंसा करने की आवश्यक कार्यार्थ व सूचनार्थ समर्पित की गई।
अध्यक्ष मंडल सदस्य संजीत कुमार शर्मा ने कहा कि वैसे सूबे बिहार के प्रारंभिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक तक के शिक्षक शिक्षिकाओं एवं पुस्तकालयाध्यक्षों ने हड़ताल कर रखा है ,लाजमी है हड़ताल की वजह सारे विद्यालय स्वत विगत 17 फरवरी बंद है और पठन-पाठन एम डी एम आदि कार्य पूर्णतः 27 वे दिन भी सरकार के अड़ियल रवैए के कारण ठप है वावजूद सरकार द्वारा जब सब कुछ बंद व स्थगित किया जा रहा है तो क्या मूल्यांकन केंद्रों पर सैकड़ों की संख्या में सुबह से लेकर शाम तक काम कर रहे मूल्यांकन कर्मियों के साथ क्यों भेदभाव किया जा रहा है। आखिर सरकार की मंशा कहीं और तो नहीं है।