नालंदा से शंकर दयाल शर्मा की रिपोर्ट-
बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति नालंदा इकाई के अध्यक्ष मंडल सदस्य संजीत कुमार शर्मा ने कहा कि सरकार नियोजित शिक्षकों को विभिन्न स्तरों में बांट कर डिवाइड एंड रूल के तहत शोषण उत्पीडन आदि करते आ रही है और वर्तमान में बहुतेरे हड़ताली शिक्षकों को वेतन भुगतान व कारवाई वापसी आदि लोभ लालच देकर हड़ताल से वापसी कराने की जहां एक तरफ षड्यंत्र कर रही है वहीं दूसरी ओर उनके सेवा टूट का विधिवत रास्ता भी निकाल रही है इस कवायद में कतिपय जिले के मुठ्ठी भर लोग गुमराह भी हो रहे हैं वावजूद बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति नालंदा इकाई के दस हजार हड़ताली शिक्षक भूखे मरना कबूल कर लेंगे परन्तु वाजिब मांगों की पूर्ति हुए बगैर हड़ताल से वापस कदापि नहीं होंगे ।
उन्होंने कहा कि सूबे बिहार के चार लाख प्रारंभिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक तक के नियोजित शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष अपने वाजिब मांगों को लेकर विगत 17 फरवरी से हड़ताल पर डटे हैं परन्तु सरकार ने बिहार के शिक्षा शिक्षक व शिक्षार्थी हितों को दरकिनार कर शिक्षकों की समस्यायों पर पहल करने के बजाय उल्टे नियमों को ताक पर रखकर शिक्षकों पर एफआईआर, निलंबन, बर्खास्तगी आदि कार्रवाई करके शिक्षकों को प्रताड़ित करने का काम किया है जिसके कारण हड़ताल अवधि में 45 इसको ने अपनी जान गवा दी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में सूबे बिहार में जितना मानवीय क्षति कोरोना जैसे महामारी से नहीं हो सकी उससे ज्यादा कहीं बिहार सरकार के हठधर्मिता व शिक्षक विरोधी नीति के कारण 45 शिक्षकों जांन गंवाने से हुई है दिवंगत शिक्षकों के परिजनों की हालत बदतर है उनके नौनिहाल भूख प्यास से तड़प रहे हैं पर सरकार ने अपनी संवेदनशीलता भी प्रकट नहीं किया। दिवंगत नियोजित शिक्षक को नियमानुसार मिलने वाले चार लाख अनुग्रह राशि भुगतान किए जाने को भी राजनीतिक रूप दिया जा है जो कि उनके परिजनों के लिए वाजिब है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हड़ताल अवधि में दिवंगत हुए शिक्षकों के आश्रितों को एकमुश्त बीस लाख रुपए समेत नौकरी देकर दिवंगत के परिवार को दुःख दर्द बांटने का काम करें।