मांगों के समर्थन एवं अवैध रूप से हड़ताली शिक्षकों पर प्राथमिकी बर्खास्तगी
आदि अन्य कार्रवाई के खिलाफ राज्य प्रस्तावित एकदिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन नालंदा जिले के तमाम प्रखंड मुख्यालयों पर आज सपरिवार दिया गया। तथा मांग पत्र माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नाम सभी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारियों के माध्यम से समर्पित किया गया है। इसी कड़ी में हरनौत प्रखंड एवं चण्डी प्रखंड के हड़ताली के धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश समन्वय समिति के सलाहकार समिति के सदस्य डॉ गणेश शंकर पांडेय एवं डॉ विश्वनाथ प्रसाद ने संयुक्त रूप से कहा कि जो नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों को पूर्ण वेतनमान एवं समान लाभ देगा वही बिहार पर राज्य करेगा। उन्होंने कहा कि पूर्ण वेतनमान की घोषणा तक आंदोलन जारी रहेगा मूल्यांकन कार्य में भाग लेना नियोजित शिक्षकों के लिए आत्मघाती कदम होगा । नीतीश सरकार शिक्षकों के आंदोलन से घबराकर अनाप-शनाप फरमान जारी कर रही है ऐसे में शिक्षकों को दिग्भ्रमित नहीं होना है अपने मांग पर हड़ताल जारी रखते हुए अड़े रहना है।
चंडी प्रखंड की धरना को संबोधित करते हुए समन्वय समिति नालंदा इकाई के अध्यक्ष मंडल सदस्य रोशन कुमार, संजीत कुमार शर्मा आदि ने एक स्वर में कहा कि जिले के प्रारंभिक से लेकर उत्तर माध्यमिक तक के शिक्षकों को करो या मरो और अभी नहीं तो कभी नहीं कहता कि पर आर-पार की लड़ाई में अपने को बनाए रखें बहुत जल्द सरकार घुटने टेकने वाली है।
नेताओं ने कहा कि सूबे बिहार के
स्कूलों में पढ़ाई ठप, वार्षिक परीक्षा के इंतजार में
शिक्षकों के हड़ताल पर जाने का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। 17 फरवरी से स्कूल लगातार बंद हैं। पढ़ाई तो ठप हो ही चुकी है, लेकिन अब इसका असर स्कूल की वार्षिक परीक्षा पर भी होगा। शिक्षा विभाग के कैलेंडर की मानें तो चार मार्च से नौवीं की वार्षिक परीक्षा होनी है। लेकिन हठधर्मिता के कारण सरकार ही सूबे बिहार के शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों को आंदोलन रूपी हड़ताल में झोंकने का काम की है । हड़ताल के कारण वार्षिक परीक्षा भी अधर में लटक जायेगी है। आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों का मूल्यांकन आदि प्रभावित होगा परंतु सरकार की इस ओर तनिक भी ध्यान नहीं है। नेताओं ने कहा कहा कि इंटरमीडिएट के मूल्यांकन कार्य पूर्णतः स्वत ठप है। माध्यमिक उच्च माध्यमिक शिक्षक किसी भी सुरत में झुकने वाले नहीं हैं।