नालंदा-
बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष मंडल सदस्य संजीत कुमार शर्मा ने नालंदा समेत सूबे बिहार के तमाम हड़ताली शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों से अपील करते हुए कहा कि जनहित के मद्देनजर कोरोनावायरस जैसे महामारी से बचाव एवं राहत आदि एहतियातन के लिए सोशल डिस्टेंस एवं लाक डाउन को हर हाल में अनुपालन सुनिश्चित कराने हेतु सभी अपने-अपने घरों में रहकर हीं मोबाइल,फोन व सोशल मीडिया के माध्यम से अपने आसपास के आमजनों ,कुटुम्ब जनों , अभिभावकों, एवं छात्र -छात्राओं आदि को जागरूक करने की कवायद जारी रखें साथ ही अपने वाजिब मांगों को पूर्ति तक हड़ताल में बने रहे।। उन्होंने अपील के क्रम में कहा कि सूबे बिहार के चार लाख हड़ताली शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों का सीधा सम्पर्क व जुड़ाव समाज के मूल स्तंभ शिक्षा कार्य में रत होने के कारण न्यूनतम चार करोड़ लोगों से होना लाजिमी हैं इसलिए उनको कोरोनावायरस जैसे संक्रमण के खतरा और शिक्षकों को दोहन शोषण करने वाले हठधर्मी सरकार से चिरपरिचित कराने की कवायद को और तेज करना भी बेहद जरूरी है क्योंकि आमजनों की जागरूकता ही वायरस व सरकार दोनों के चैन को तोडेंगे और दोनों परास्त होंगे साथ ही एकतरफ जहां वायरस *गो फार्मूला* के राह को अख्तियार कर नस्तानबूद होगा वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार *पूर्ण वेतनमान दो* फार्मूला आत्मसात कर लागू करने को विवश होंगी
उन्होंने कहा कि शाश्वत सत्य है कि जिस राज्य में एक भी व्यक्ति दुःखी, पीड़ित व भुखमरी के हालात में हो ऐसे में वैसे राज्य के राजा को राजा कहलाने का कोई अधिकार नहीं रह जाता है वहीं बिहार के वर्तमान नीतीश सरकार ने चार लाख शिक्षक एवं उनके बीस लाख परिजनों को मरने के लिए छोड़ दिया है क्योंकि सरकार उनके लंबित वेतन व वाजिब मांगों को पूरा नहीं कर रहीं हैं जो घोर पाप व अन्याय है । हड़ताली शिक्षक सरकार से हड़ताल तुड़वाने के लिए अनुनय विनय करते हुए 46 वे दिन भी कोरोनावायरस जागरूकता व लाक डाउन को अनुपालन करते हुए हड़ताल पर डटे हैं वहीं राज्य सरकार अबतक अपनी हठधर्मिता पर अड़ी हुई है जो अशोभनीय है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार समय पूर्व पहल नहीं की तो शिक्षकों की आह से सत्तासीन नीतीश सरकार का जाना तय है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील करते हुए कहा कि बिहार के नियोजित शिक्षकों को न बीपीएल है न जनधन के खाते न राशन कार्ड न उज्जवला योजना और न कार्यरत अवधि का वेतन उपर से ये विपदा भय और साहस के साथ जीना पड़ रहा है। अन्य विभाग में अगले 3 माह का वेतन एडवांस देना और शिक्षकों को पिछले दो माह वेतन नहीं मिला है ऐसे में भुखमरी की नौबत आ गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शीघ्र हड़ताली शिक्षकों की मांगों को पूरा करें और अप्रैल तक वेतन शीघ्र जारी करें तो सूबे बिहार के प्रत्येक शिक्षक कोरोनावायरस जैसी अंतरराष्ट्रीय आपदा विपदा आदि से निपटने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में एक दिन का वेतन के वजाय एक से दो माह का वेतन जमा करने के साथ साथ सभी क्षतिपूर्ति के लिए सरकार के साथ तन्मयतापूर्वक क़दम से क़दम मिलाकर चलने को तैयार हैं।