*बिहार शरीफ* -सरकार और सरकारी तंत्र अपना काम करें, हम हड़ताली अपना काम ईमानदारी पूर्वक करते रहे परिणाम की चिंता छोड़ व परिणाम के हर्ष और विषाद से कोसों दूर रहकर वाजिब हक के लोकतांत्रिक आंदोलन व वैध हड़ताल में एकजुटता व मजबूती के साथ बने रहे। वार्ता नहीं बल्कि नियोजित शिक्षकों के अपेक्षित लाभ की घोषणा चाहिए। मित्रों यह सच है कि हड़ताली शिक्षक भयभीत नहीं वरण सरकार थरथरा रही है, अबकी बार आर पार की लड़ाई है ,हड़ताली शिक्षकों को बर्खास्त करने वाले शीघ्र घोषणा नहीं करते हैं तो आक्रोशित शिक्षक आगामी चुनाव में सरकार को बर्खास्त करने का काम करेंगे । साथियों बताते चलें कि मैट्रिक और इंटर दोनों की वार्षिक परीक्षाएं समाप्त हुईं अब सरकार उन उत्तर पुस्तिकाओं के जांच की तिथि घोषित कर उस दिशा में जी जान से जुट गई है।कहीं-कहीं प्राइवेट कोचिंग संस्थान के शिक्षकों को आमंत्रित किया जा रहा है।कारण है प्राथमिक विद्यालय से उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तक के सभी शिक्षकों का एक साथ हड़ताल पर चले जाना। ऐसी स्थिति में सरकार के पास दूसरा विकल्प ही क्या है, वह तो अपने हठधर्मिता पर अड़ी है कि हम हड़ताली शिक्षकों को भले निलंबित या बर्खास्त कर देंगे लेकिन उनको उनका संवैधानिक हक ‘समान काम का समान वेतन’ नहीं देंगे इधर शिक्षकगण भी अपना उचित हक हासिल करने के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने का मूड बना चुके हैं,बनाएं भी क्यों न जब कदम-कदम पर उनका शोषण हो रहा है जिस मूल्यांकन के लिए नित्य प्रति नये-नये फरमान जारी किए जाते हैं वहीं सरकार को ये भी मालूम होना चाहिए कि वर्ष–2019 में मूल्यांकन करनेवाले कई परीक्षक बंधुओं को अभी तक मूल्यांकन- राशि नहीं मिल पाई है जिसमें में मैं स्वयं संजीत शर्मा संघ के माध्यम से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को अनुरोध पत्र दिए परंतु सब के सब अरण्य रोदन ही सिद्ध हुए जिस एफ आई आर का राग अलापने का काम सरकार व पदाधिकारी वर्ग कर रहे हैं क्या शिक्षक संघ अब ऐसे पदाधिकारियों शोषण दमनकारी आदि नीतियों के खिलाफ एफआईआर नहीं कर सकता??? क्योंकि अनुनय विनय से मेरा भी हालत वद से बदतर है तो आम नियोजित शिक्षक जो हैंड टू माउथ है उनका क्या होता होगा यह समझने वाली बात है।हालांकि कुछ को मिली भी है । मूल्यांकन-केंद्र के निदेशक से पूछने पर वे भी अनभिज्ञता जाहिर करते हैं,यह हाल है मूल्यांकन- केंद्र नालंदा जिले की
- यह हाल केवल एकही जिले की नहीं अपितु सूबे बिहार की मूल्यांकन- केंद्रो की है ।
जहां परीक्षक अभी पूर्व के बकाया मूल्यांकन-राशि की बाट जोह रहे हैं जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में आहूत बैठक में जिले के शिक्षकों का मेरे तरफ से दर्जनों मामले पर ध्यान आकृष्ट कराया गया पर टालमटोल कर आश्वासनों के ठंडे बस्ते में सभी डाल दिया जाता है। समन्वय समिति व नवनियुक्त माध्यमिक उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ द्वारा वाजिब मांगों के समर्थन में जिला मुख्यालय पर धरना, आमरण-अनशन , शिष्टमंडल के जरिए अनुनय विनय से सरकार व सरकारी तंत्र का ध्यान आकृष्ट कराया गया लेकिन सरकार व उसके तंत्र को इतनी फुर्सत नहीं है कि वह शिक्षकों के समस्या की ओर भी अपना ध्यान केंद्रित कर सके उसे तो केवल बंधुआ मजदूर के तौर पर शिक्षकों से काम कराते रहना है और वो भी दबाव के साथ। इसलिए साथियों करो या मरो एवं अभी नहीं कभी नहीं के तर्ज पर अपने पूर्ण वेतनमान व अन्य सुविधाएं ही नहीं अपितु हम-सब हड़ताली शिक्षकों व शिक्षिकाओं एवं पुस्तकालयाध्यक्षों की लड़ाई बिहार की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने समेत भविष्य में आने वाले पीढ़ी जिसे नियोजित व ठेके ,अनुबंध पर बहाल करने के खिलाफ है इसलिए इस पुनीत कार्य में आम आवाम बुद्धिजीवियों कानून विद न्यायविद, मिडिया कर्मियों, छात्र-छात्राओं व उनके संगठन, अभिभावकों ,राजनीतिक दलों सभी को इस मुहिम में शामिल होकर शिक्षकों की इस वाजिब व,जायज लड़ाई में आगे आकर सहयोग प्रदान करनी चाहिए ताकि बिहार की शिक्षा व्यवस्था की स्तम्भ मजबूत और शक्तिशाली हो सके ।