पटना:- केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित “राइट पर्सन ऑफ अमेंडमेंट बिल” को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।
इसी करी में पटना की प्रिया किन्नर ने कहा की जहां सरकार इसे नागरिकों के अधिकारों को और मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर ट्रांसजेंडर समुदाय इस बिल के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है और इसे अपने अधिकारों के लिए खतरा बता रहा है। प्रिया किन्नर का कहना है कि बिल में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो उनकी पहचान, अधिकारों और सामाजिक सम्मान को प्रभावित कर सकते हैं।देश के कई हिस्सों में ट्रांसजेंडर संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस बिल को बिना पर्याप्त चर्चा और समुदाय की सहमति के लाया जा रहा है। उनका कहना है कि उनकी पहचान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को पहले व्यापक संवाद करना चाहिए था।प्रिया के साथी किन्नर ने कहा की “हम अपनी पहचान और अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। सरकार को इस बिल में संशोधन करना होगा और हमारी आवाज को सुनना होगा।” कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने भी ट्रांसजेंडर समुदाय के समर्थन में आवाज उठाई है और बिल के कुछ प्रावधानों की समीक्षा की मांग की है।वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि सरकार को इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सभी पक्षों को साथ लेकर चलना चाहिए। विपक्ष ने संसद में इस बिल पर विस्तृत चर्चा और जरूरी संशोधन की मांग की है।सरकार की ओर से अभी तक इस विरोध पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित ही सामने आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सरकार इस बिल को लेकर सभी पक्षों की राय लेने पर विचार कर सकती है।“राइट पर्सन ऑफ अमेंडमेंट बिल” अब सिर्फ एक कानूनी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक और मानवीय अधिकारों से जुड़ा बड़ा विषय बन चुका है। ट्रांसजेंडर समुदाय के विरोध ने इस बहस को और गहरा कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध को किस तरह संभालती है और क्या इस बिल में कोई बदलाव किए जाते हैं या नहीं।अगर सरकार इस बिल को वापस नहीं लेती है तो प्रिया किन्नर कहा कि हमारे समुदाय के लोग धरना प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट तक भी हम लोग जाएंगे।
