रियल्टी को ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ का फायदा मिलेगा, घनी आबादी से निकलर फ्लैट का रुख करेंगे लोग

राकेश यादव सीएमडी, अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप

राकेश यादव
सीएमडी, अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप

कोरोना महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के कारण अन्य उद्योगों की तरह रियल एस्टेट क्षेत्र में स्थिति अच्छी नहीं है। मेरा मानना है कि यह स्थिति प्रॉपर्टी बाजार में आने वाले तीन महीने और देखने को मिल सकती है लेकिन उसके बाद स्थिति में तेजी से सुधार होगा। इसके पीछे ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ बड़ी वजह होगी। दरअसल, लोगों ने देख लिया है कि कोरोना महामारी का प्रकोप घनी आबादी वाले क्षेत्रों में काफी भयानक हुआ है। भीड़-भाड़ वाले इलाकों में संक्रमण तेजी से फैला जबिक अपार्टमेंट और खुले क्षेत्र में राहत रही है। इस कारण से आने वाले समय में लोग घनी आबादी से निकलर खुले जगह पर रहना पसंद करेंगे। इससे घरों की मांग बढ़ेगी।

घनी आबादी में रहते हैं 80 फीसदी लोग

देश के बड़े शहरों में करीब 80 फीसदी लोग घनी आबादी में रहते हैं। कोरोना संक्रमण मुंबई और दिल्ली में उन क्षेत्रों में ज्यादा हुआ है जहां आबादी घनी है। इसकी वजह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं होना है। इस आम लोगों की सोच में बड़ा बदलाव लाने का काम करेगा। लॉकडाउन खुलने और अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के बाद लोग घनी आबादी से निकलकर बाहर आशियाना बनाने की सोचेंगे। इससे फ्लैट और अपार्टमेंट कल्चर की मांग बढ़ेगी। दिल्ली से सटे नोएडा को इसका बड़ा फायदा मिलेगा क्योंकि यह पूरा क्षेत्र खुला और ग्रीन भी है। साथ ही यहां पर मजदूरों के पलायन का असर कम होगा। इससे प्राजेक्ट को पूरा होने में अड़चन कम आएगी।

सरकारी मदद से भी मिलेगा प्रोत्साहन

कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार ने होम लोन पर सब्सिडी की सीमा को एक साल तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही बैंक आसानी से होम लोन काफी कम ब्याज पर दे रहे हैं। बिल्डर भी अपनी तरफ से रियायत दे रहे हैं। ये सारे फैक्टर एक साथ मिलकर घर खरीदने वाले खरीदार को प्रोत्साहित करेंगे। इससे घर की बिक्री बढ़ेगी। मेरा मानना है कि आने वाले समय में ग्रीन बिल्डिंग की मांग बढ़ेगी। लोग खुले मकानों पर अधिक लोग जोर देंगे।

कीमत में कमी करना संभव नहीं होगा

अगर आप सोच रहे हैं कि लॉकडाउन के बाद प्रॉपर्टी की कीमत में कमी आएगी तो मेरा मानना है कि ऐसा नहीं होगा। इसके पीछे वजह है कि लॉकडाउन में हर जगह से मजदूर पलायन कर गए हैं। मजदूरों के अभाव में प्रोजेक्ट को पूरा करने की लागत बढ़ेगी। साथ ही सप्लाई प्रभावित होने से रियल एस्टेट में इस्तेमाल होने वाले मैटेरियल की लागत में काफी इजाफा हुआ है। यानी प्रोजेक्ट की लागत पहले से बढ़ गई है। ऐसे में बिल्डर चाह कर भी प्रॉपर्टी की कीमत कम नहीं कर पाएंगे। अगर आप इस इंतजार में घर खरीदने का फैसला टाल रहे हैं कि कीमत कम होगी तो यह नहीं होगा। आप अपनी बजट की प्रॉपर्टी ढूढ़कर निवेश कर लें। यह बेहतर होगा।

रियल एस्टेट पर निवेशकों का भरोसा कायम

हाल ही में आई एक सर्वे के मुताबिक, रियल एस्टेट में निवेश का विकल्प अभी भी लोगों के लिए पहली पसंद बना हुआ है। इस सर्वे के मुताबिक सस्ते घरों की डिमांड कायम है। 48 फीसदी निवेशकों के लिए रियल एस्टेट निवेश पहली पसंद है। 59 फीसदी एंड यूजर्स जबकि 41 फीसदी लोग रियल एस्टेट में निवेश करना चाहते हैं। 54 फीसदी अभी घर में निवेश या खरीदने का सही समय मानते हैं। ये भरोसेमंद डेवलपर्स के लिए प्रीमियम देने को भी तैयार हैं। यानी, निवेश के लिए भी रियल एस्टेट एक बेहतर विकल्प बनने वाला है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *