1 फरवरी 2025 को मोदी सरकार देश का आम बजट पेश करेगी जिसका आम लोगों को बजट का बेसब्री से इंतजार रहता है। निर्मला सीतारमण के वित्तमंत्री रहते हुए ये उनका आठवां पूर्ण बजट होगा जिसमें आम जनता को अपने लिए कई योजनाएं बनने और उनमें जरूरी बदलाव करने का मौका होता है।
यही वो अवसर होता है जब हर व्यक्ति सरकार से टैक्स स्लैब से लेकर यह जानना चाहता है कि घर की आम जरूरतों के सामान में क्या सस्ता होगा और क्या महंगा? इन्हीं में से एक है अपना घर जिसका सीधा कनेक्शन आम बजट में की गई घोषणाओं से होता है। विशेष रूप से नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत दिल्ली एनसीआर में बढ़ती फ्लैट की मांग को देखते हुए घर खरीदार इस आम बजट से बहुत अपेक्षा रखते हैं।
देखना होगा कि निर्मला सीतारमण क्या घोषणाएं करती है लेकिन इस बीच रियल एस्टेट सेक्टर के दिग्गज सरकार से अपनी अपेक्षाएं बता रहे है जिससे घर को देश के हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध कराया जा सकें:
घर खरीदारों के लिए विशेष वर्ग का निर्धारण करना:
क्रेडाई पश्चिमी यूपी के सचिव दिनेश गुप्ता के अनुसार, “एफोर्डेबल हाउसिंग पीछे छूट गया है जहां 1, 2 और 2+1 बीएचके यूनिटस के खरीदार के हाँथ खाली है। ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर में इस वर्ग के लिए विशेष नीति निर्धारण की आवश्यकता है। अधिक से अधिक लोगों को आसान और सस्ता होम लोन दिलाने के लिए हॉऊसिंग लोन का विशेष वर्ग बनाना चाहिए जिसमें टैक्स इन्सेनिव बढ़ाने के साथ इनपुट टैक्स क्रेडिट भी वापस लाना चाहिए।”
टैक्स में छूट की सीमा व इनपुट टैक्स क्रेडिट:
निराला वर्ल्ड के सीएमडी सुरेश गर्ग के अनुसार, “रियल एस्टेट सेक्टर की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए प्रॉपर्टी खरीदने पर इन्सेनटिव बढ़ाने चाहिए जिसमें इनकम टैक्स की धारा 24 में मिलने वाली छूट की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख तक करना चाहिए। लोग घर खरीदने के प्रति पहले से ज्यादा जागरूक है ऐसे में एफोर्डेबल घर को पुनः परिभाषित करते हुए सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। सरकार को जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट देना चाहिए जिसका लाभ घर खरीदारों को ही मिलता है।”
एफोर्डेबल घरों के लिए नई सोच:
रेनॉक्स ग्रुप के सीईओ अवनीश मिश्रा के अनुसार, “डायरेक्ट टैक्स और होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए तथा सरकार को जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस लाना चाहिए जिसका लाभ, अंततः, घर खरीदारों को मिलेगा। आज की जरूरतों के अनुसार 1,500 वर्ग फुट के घर अब आम हो गए है, ऐसे में 1200 वर्ग फुट तक के घरों को एफोर्डेबल होम्स की श्रेणी में लाना चाहिए और विशेष छूट के तहत इनका बजट 40-60 लाख तक रखना चाहिए जिससे इस वर्ग के घर खरीदारों को भी विकल्प मिलें।
स्टक परियोजनाओं के लिए योजना:
आरजी ग्रुप के निदेशक हिमांशु गर्ग के अनुसार, “फर्स्ट टाइम होम बायर को मिलने वाला लाभ सेकंड टाइम होम बायर पर भी लागू होने से घर खरीदने की प्रक्रिया को बल मिलेगा। होम लोन के ब्याज पर मिलने वाला टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने का सही समय है। जीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट को वापस लाना चाहिए जिसका लाभ बिल्डर होम बायर्स को देते थे। स्वामिह फंड का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए जिसमें स्टक प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके”।
ईको फ़्रेंडली घरों के लिए प्रोत्साहन:
ईरोस ग्रुप के निदेशक अवनीश सूद के अनुसार, “ग्रीन और इको फ़्रेंडली घरों के लिए विशेष वर्ग और छूट का प्रविधान रहना चाहिए जिससे ऐसे घरों के निर्माण और प्रोमोटर को बढ़ावा मिले और घर खरीदने वालों को भी अधिक लाभ दिया जा सके। इनपुट टैक्स क्रेडिट से बिल्डर को जो राहत मिलेगी वो डायरेक्ट होम बायर को ट्रैन्स्फर करने के मॉडल पर काम कर सकते है जिससे पारदर्शिता बनी रहे। रियल एस्टेट को इंडस्ट्री स्टैटस मिलने से बड़े आवासीय परियोजना के लिए टैक्स फ्री बॉन्ड इशू करने के रास्ते बनेंगे”।
एफोर्डेबल घरों के लिए पीपीपी मॉडल व सब्सिडी:
के डब्लू ग्रुप के निदेशक पंकज कुमार जैन के अनुसार, “एफोर्डबल हाउज़िंग लिंकड सब्सिडी स्कीम जैसे योजना पर काम करना होगा जिससे 30-60 लाख वाले बजट घरों का निर्माण को प्रोत्साहन मिले और एक बहुत बड़े वर्ग के घर खरीदारों को घर लेने के विकल्प मिले सके। सरकार को पीपीपी मॉडल पर इसका रास्ता लाना चाहिए जिससे लागत नियंत्रित की जा सके, विशेष छूट दी जाए और सस्ता घर ढूँढने वालों को आपूर्ति की जा सके।”
