बिहार पब्लिक स्कूल एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन :-ने सरकार से मांग किया है कि 18 मई लॉकडाउन के तीसरे चरण की समाप्ति के बाद 35% उपस्थिति के साथ निजी विद्यालय कार्यालयों को खोलने की अनुमति दी जाए। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डी. के. सिंह ने कहा कि निजी विद्यालयों मे बच्चों के पाठ्यक्रम प्रतिपूर्ति के लिए कई प्रकार के कार्य गतिविधियों को कार्यालय स्तर पर संपादित करना पड़ता है। कई प्रकार के योजनाओं को तैयार कर शिक्षकों की जवाबदेही तक कि जाती है। अभी लगातार अभिभावकों से यह शिकायतें आ रही है
ऑनलाइन क्लास मे बच्चों की अभिरुचि कम :-खासकर गरीब वर्ग के बच्चे संसाधन अभाव के कारण ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा से वंचित रह जा रहे हैं। इस स्थिति में निजी विद्यालयों के लिए बच्चों के पाठयक्रम को पूर्ण करना बहुत बड़ी चुनौती हो गई है।इसके लिए विद्यालयों को युद्धस्तर की तैयारी करने की जरूरत है।
अतः सरकार को बच्चों के पाठयक्रम :- निजी विद्यालयों की विवशता को समझते हुए, निजी विद्यालय कार्यालयों को खोलने की अनुमती देनी चाहिए। जहां विद्यालय संचालक अपने कर्मचारियों के साथ योजना तैयार करेंगे कि कैसे विद्यालय खुलने के बाद बच्चों के पाठ्यक्रम को पूर्ण किया जाए। जहां बच्चे लंबे अवधि से पढ़ाई से दूर हैं, शिक्षकों के लिए भी यह बहुत बड़ी चुनौती होगी कि पिछे के पढ़ाए गए तथ्यों पर प्रकाश डालते हुए नए पाठ्यक्रम को पूर्ण किया जाए। संगठन के उपाध्यक्ष डॉ. एस. एम. सोहेल ने कहा निजी विद्यालयों की जिम्मेवारीयाँ अनेक प्रकार की होती है। बच्चों की पढ़ाई संचालित करने से पहले कई प्रकार की तैयारियां करनी होती है, योजनाएं बनाने होते हैं,पाठयक्रम को सुसज्जित करने होते हैं, पाठ्य सामग्रियों को तैयार करना होता है, बच्चों को पढ़ाई सहज लगे इसके लिए विशेष तैयारी करनी होती है। इन सबकी पूर्ति के लिए विद्यालय कार्यालय का खुलना आवश्यक है।
संगठन के सह – सचिव प्रेम रंजन ने कहा कि अभिभावकों का लगातार शिकायत आ रहा कि उनके बच्चों का मन पढ़ाई मे नहीं लग रहा है, बच्चे पढ़े हुए चीजों को भी भूलते जा रहे हैं। यह स्वभाविक भी है बच्चों का मन पढ़ाई मे लगता रहे इसके लिए निजी विद्यालयों मे कई प्रकार की व्यवस्थायें की जाती है। अतः विद्यालय कार्यालय खुलने के बाद इसके लिए भी विशेष योजनाएं बनाई जाएंगी की जिससे बच्चों का मन पढ़ाई मे लगता रहे।
