बि
हार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष मंडल सदस्य व सलाहकार समिति के सदस्य डॉ गणेश शंकर पांडेय ने कहा कि सूबे बिहार के प्रारंभिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक तक के हड़ताली नियमित नियोजित शिक्षक मानवता के मद्देनजर एक तरफ जहां सरकार के साथ कोरोना वायरस से वचाव हेतू जन जागरूक अभियान चलाकर सरकार को करारा जवाब दे रहे है वहीं अपने वाजिब मांगों व असंवैधानिक कार्रवाई के खिलाफ
राज्यभर के लाखों प्रारंभिक,माध्यमिक,उच्चतर माध्यमिक शिक्षक व पुस्तकालय अध्यक्ष 17 फरवरी 2020 से माँगों की पूर्ति को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर डटे हैं। जिससे सुबे की शिक्षा व्यवस्था पूर्णरूपेण ठप है।राज्य के 76 हजार विद्यालय में ताला लटका है। उन्होंने कहा कि हड़ताली शिक्षकों का 31वें दिन हड़ताल जारी है। लेकिन सरकार का राज्य के शिक्षा व शिक्षकों के प्रति गंभीर नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।जिससे सरकार के प्रति शिक्षकों का आक्रोश दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहा हैं। स्थिति एेसी है कि आन्दोलनकारी शिक्षक सरकार के किसी भी तुगलकी फरमान से डरने तथा डपोरशंखी वयान से भ्रमित होनेवाला नहीं हैं।बल्कि निरकुंश सरकार से डटकर मुकाबला करने को तैयार हैं।बर्खास्तगी, निलम्बन, FIR जैसी किसी भी कार्रवाई से हड़ताली शिक्षकों को कोई डर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमारी चट्टनी एकता ही हमसबों को सफलता दिलायेगी।माँगों की पूर्ति तक हड़ताल जारी रहेगा। शिक्षक हक के लिए आर- पार की लड़ाई लड़ने का मुड बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कोरोना वायरस के मद्देनजर सभी विद्यालय को 31 मार्च 2020 तक बंद करने का आदेश दिया है। इससे आन्दोलन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। राज्य भर में हड़ताली शिक्षक भी कोरोना वायरस से वचाव हेतू गाँव व टोला मोहल्ला जा जा कर जन जागरूक अभियान चला रहे है। साथ ही समुचित उपचार सामग्री भी वितरित कर रहे है जिसे आम आवाम स्वागत व सराहनीय कदम बता रहे हैं। उन्होंने ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वेतन बंद करने के बाद भी हड़ताली शिक्षकों को समाज हित में काम करने की इच्छा शक्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है। अब भी सरकार को हड़ताली शिक्षक की असलियत एवं अहमियत समझना चाहिए। बेहतर होता कि हड़ताली शिक्षकों से बातचीत कर उनके माँगों की पूर्ति कर हड़ताल समाप्त करवाते। साथ ही विद्यालय खुलवाकर शिक्षण कार्य बहाल करते। विद्यालय में बच्चों के नहीं होने के बाबजूद उन्हें मध्याह्न भोजन का राशि खाते में देने का निर्देश जारी करना सरेआम सरकार की शिक्षा के प्रति नजारईया व संकीर्ण सोच को व्यक्त करता है।जो बच्चों की शिक्षा से ज्यादा सिर्फ मध्याह्न भोजन देकर जनता को चुप रखना चाहती है। लेकिन शिक्षक बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथही सभी उचित लाभ मुहैया कराने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुबे के लाखों बच्चों की भविष्य चौपट करने पर तुली हुई हैं। परन्तु सरकार की मंशा को बिहार के हड़ताली शिक्षक कभी पूरा नहीं होने देंगे। जरूरत पड़ी तो सरकारी विद्यालय से अलग होकर हड़ताली शिक्षक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर सरकार को मुँहतोड़ जवाब देगें।