ड्रोन से बाल-बाल बचे तेजस्वी यादव, वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ रैली को संबोधित कर रहे थे संबोधित - Post2Pillar

ड्रोन से बाल-बाल बचे तेजस्वी यादव, वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ रैली को संबोधित कर रहे थे संबोधित

Tejashwi Yadav

तेजस्वी यादव आज पटन में वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ रैली को संबोधित करते समय ड्रोन से बाल-बाल बच गए। दरअसल, जब वो पटना के गांधी मैदान में रैली को संबोधित करते हुए भाषण दे रहे थे, इसी बीच एक ड्रोन उड़ता हुआ उनके पास आया और टकरा गया। हालांकि तेजस्वी यादव ने तुरंत झुककर खुद को बचाया। इसका वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस दौरान तेजस्वी यादव का भाषण भी बीच में रुक गया। हालांकि ड्रोन के गिरने के बाद उन्होंने अपना भाषण फिर से शुरू किया।

राष्ट्रीय वैश्य महासभा में भी पहुंचे तेजस्वी

आज पटना के बापू सभागार में राष्ट्रीय वैश्य महासभा द्वारा आयोजित “वैश्य प्रतिनिधि सम्मेलन” में भी तेजस्वी यादव ने शिरकत की। इस अवसर पर तेजस्वी यादव जी ने वैश्य समाज के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाते हुए वैश्य आयोग के गठन का वादा किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए राष्ट्रीय वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर महासेठ जी, प्रदेश अध्यक्ष पी. के. चौधरी जी, कार्यक्रम आयोजक मा० एमएलसी बिनोद जायसवाल जी एवं पूर्व एमएलसी रामचंद्र पूर्वे उपस्थि​त रहे।

‘वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ’ रैली में थे

दरअसल, ये घटना रविवार को उस समय हुई जब पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में ‘वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ’ रैली को संबोधित कर रहे थे। इस भाषण के दौरान ही एक ड्रोन मंच से टकरा गया। हालांकि तेजस्वी यादव ने फुर्ती दिखाते हुए झुक कर खुद को बचा लिया। वहीं इस मामले को लेकर पटना की एसपी (मध्य) दीक्षा ने बताया, ‘‘हम घटना की जांच कर रहे हैं। यह एक प्रतिबंधित क्षेत्र था और ऐसी कोई वस्तु वहां नहीं आनी चाहिए थी। जब रैली हो रही थी, तब पुलिस टीम भीड़ को संभालने में व्यस्त थी। लेकिन मामले की निश्चित रूप से गहन जांच की जाएगी।’’

तेजस्वी यादव ने एक्स पर किया पोस्ट

रैली के बाद तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा, “आजादी की लड़ाई की अमर गाथा उठा कर देख लीजिए। ढाका से लाहौर, रांची से कराची, उतर से दक्षिण हमारे देश की सरजमीन का हर एक इंच और इतिहास का हर एक पन्ना चीख-चीख कर इस बात की गवाही देता है कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सभी ने मिलकर एक साथ कुर्बानियां दीं हैं। भगत सिंह और अशफाकउल्ला खान, दोनों का लहू एक बनकर ही हमारे तिरंगे पर रंगा है।” उन्होंने आगे लिखा, “इंसानियत दिल से बनती है और ये दिल हमें जोड़ता है, जो दिल जोड़ नहीं सकता वो देश क्या चलाएगा?”

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