नोएडा–ग्रेटर नोएडा में अब छूएंगी इमारतें नई ऊंचाइयां, यूनिफाइड बिल्डिंग रेगुलेशन से हटेगा हाइट कैप!

नोएडा: उत्तर प्रदेश की औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में लंबे समय से अलग-अलग बिल्डिंग बायलॉज के कारण निर्माण स्वीकृतियों में जटिलता और भ्रम बना रहता था। अब Invest UP द्वारा जारी ड्राफ्ट Unified Building Regulations-2026 इस स्थिति को बदलने की तैयारी में है। प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए यूनिफाइड बिल्डिंग रेगुलेशन-2026 लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इनवेस्ट यूपी विभाग द्वारा इसका ड्राफ्ट 19 अप्रैल, 2026 को जारी कर दिया गया है और सुझाव अगले 15 दिन के अंदर मांगे गए है। इससे गौतम बुद्ध नगर के सभी विकास प्राधिकरण- नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे, यूपीसिडा, यूपीडा और अन्य औद्योगिक विकास प्राधिकरणों  में अब नए बनने वाले भवनों की ऊंचाई और अधिक की जा सकेगी। यानि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में गगनचुम्बी बिल्डिंग बनने का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन इसके कई फायदें तथा चुनौतियाँ भी होंगी ।

एकीकृत बिल्डिंग बायलॉज, खत्म होगी भ्रम की स्थिति

अब तक अलग-अलग औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में अलग-अलग बिल्डिंग बायलॉज थे, जिससे भवन निर्माणकर्ताओं और आवंटियों को उन्हीं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के नियमों के अनुसार काम करना होता था। इससे भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। इस ड्राफ्ट के लागू होने के बाद प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में एकीकृत बिल्डिंग बायलॉज लागू होंगे। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि निर्माण मंजूरी की प्रक्रिया फॉलो करना आसान, सरल और तेज हो सकेगी।

प्रीमियम परचेजबल एफएआर, गेम चेंजर

इस ड्राफ्ट में प्रीमियम परचेजबल एफएआर का भी विकल्प दिया गया है और इसे सड़क की चौड़ाई से जोड़ दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि निर्माणकर्ता या बिल्डर सड़क की चौड़ाई के आधार पर एक निश्चित शुल्क चुकाकर अतिरिक्त एफएआर खरीद सकेंगे और इसके जरिए भवन की ऊंचाई को और बढ़ा सकेंगे। यह व्यवस्था उन डेवलपर्स के लिए फायदेमंद होगी जिनके पास भूखंड सीमित है लेकिन सड़क की चौड़ाई ज्यादा है। एक्स्पर्ट्स की माने तो अधूरी परियोजनाओं के लिए यह वरदान साबित हो सकता है।

वर्ग वर्तमान  प्रस्तावित  सड़क की चौड़ाई (मीटर)

ग्रुप हॉऊसिंग  2.75-3.5  7-10.5  24-45 तथा उससे ज्यादा की स्थिति में।
व्यावसायिक  1.2-4.0  3-10  24-45 तथा उससे ज्यादा की स्थिति में।
शैक्षणिक  0.8-2.75   3 व ज्यादा  सड़क की चौड़ाई के आधार पर।
औद्योगिक 06.-2.0  3- 6  12-24
ई-चार्जिंग तथा 126 भिन्न परिभाषाओं पर स्पष्टता
इलेक्ट्रिक वाहनों को भविष्य का ट्रांसपोर्ट साधन बनाने हेतु नई नियमावली में ई-चार्जिंग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जोर दिया गया है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग की सुविधा मिलेगी जिससे वाहन खरीदने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा। एक्स्पर्ट्स का मानना है कि ऊंचे टॉवर बनने से अधिक यूनिटस बनेंगे जिसके अनुपात में इंफ्रा भी बढ़ाना होगा। इसके लिए भवन निर्माण से जुड़ी 126 परिभाषाओं को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया गया है।
पार्किंग सुविधा
इसमें भी बदलाव किए गए है। ग्रुप हॉऊसिंग के लिए पार्किंग 1 से 1.5 प्रति यूनिट रखी गई है। व्यावसायिक के लिए 1 पार्किंग स्लॉट पहले 30-100 वर्ग मीटर के निर्माण से बढ़ाकर 50-500 वर्ग मीटर कर दिया गया है। जबकि औद्योगिक में 1 पार्किंग प्रति 300 वर्ग मीटर पर निर्धारित की गई है।

सेट बैक स्थान

इसमें भी छूट देते हुए प्लॉट के सामने 9 मीटर और बाकी 3 साइड 6 मीटर का स्थान खुला छोड़ा जा सकता है जिससे भूखंड का अधिकतम उपयोग किया जा सके। जबकि पहले ग्रुप हॉऊसिंग में 35-40% तथा औद्योगिक में 35-60% निर्माण करना होता था।
भवन की ऊंचाई
10 से 24 मीटर की सीमा को समाप्त कर दिया गया है केवल एयरपोर्ट और हेरिटेज निर्माण के आस-पास छोड़कर।
ग्रीन एरिया
पहले की 25-30% की तुलना में ग्रीन एरिया 5-10% रखने की अनुमति दी जा सकती है।

आपत्ति और सुझाव आमंत्रित

इनवेस्ट यूपी ने ड्राफ्ट पर आम जनता, बिल्डर्स, डेवलपर्स और संबंधित पक्षों से आपत्तियां व सुझाव 3 मई 2026 तक मांगे हैं। सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह नई नियमावली नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्स्प्रेसवे सहित अन्य औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति देगी।

रियल एस्टेट डेवलपर्स का क्या है कहना?

अश्वनी नागपाल, सीओओ, डिलीजेन्ट बिल्डर्स ने कहा कि मौजूदा ड्राफ्ट में लगभग डबल एफएआर तथा रोड की चौड़ाई जितनी होगी, प्लॉट्स को उतना ज्यादा एफएआर मिलने के प्रस्ताव है। यानि कि, ज्यादा चौड़ी सड़क पर ज्यादा एफएआर मिलने से शहर को वर्टिकल ग्रोथ मिलेगी, छोटे प्लॉटस पर ज्यादा ऊँचे टावर बनाये जा सकेंगे, जिससे ज्यादा घरों का निर्माण किया जा सकेगा, जिससे लागत कम की जा सकेगी और लाभ घर खरीदारों को भी मिलेगा।
शैलेन्द्र शर्मा, चेयरमैन, रेनॉक्स ग्रुप के अनुसार, एक जैसे बिल्डिंग नियमों के लागू होने से पारदर्शिता आएगी, विकासकर्ताओं का भ्रम दूर होगा व विवाद की स्थिति नहीं रह जाएगी, निर्माण और विकास करना आसान हो जाएगा। प्रीमियम एफएआर (Premium FAR) 24-45 मीटर रोड पर मौजूदा 3.5 से 7.0 तक और सड़क की चौड़ाई के अनुपात में बढ़ाने जैसे विकल्पों से बिल्डर अब सीमित प्लाट साइज़ पर भी अधिक ऊँचे टावर बना सकेंगे जिससे अधिक लोगों को घर मिल सकेगा।
दिनेश जैन, सीएमडी एक्ज़ोटिका हाउसिंग ने कहा कि यह नीति नोएडा के अचल संपत्ति परिदृश्य को मूल रूप से बदल देगी। प्रीमियम डेवलपर्स को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा, क्योंकि उनके पास बेहतर गुणवत्ता निर्माण और डिज़ाइन दक्षता के साथ अधिक फ्लोर एरिया अनुपात (एफएआर) का उपयोग करने की क्षमता होती है। हालांकि, यह परियोजनाओं के बीच अंतर को और स्पष्ट करेगा, सिर्फ अच्छी तरह से योजनाबद्ध, उच्च श्रेणी के विकास, जिनके पास मजबूत आधारभूत ढांचा और सुविधाएं हैं, वही अतिरिक्त एफएआर का सही लाभ उठा पाएंगे।
हिमांशु गर्ग, निदेशक, आरजी ग्रुप ने कहा कि ड्राफ्ट बिल्डिंग बायलॉज़ में किए गए बदलाव राज्य के शहरी विकास को नई दिशा देंगे। हाइट लिमिट हटने से हाई-राइज प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सीमित जमीन में ज्यादा आवास उपलब्ध कराए जा सकेंगे। इसके अलावा, छोटे प्लॉट्स पर भी विकास की अनुमति और कम औपचारिकताओं के कारण रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश और निर्माण गतिविधियां तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
अतुल विक्रम सिंह, फाउन्डर, विजन बिजनेस पार्क के अनुसार,  FAR को सड़क की चौड़ाई से जोड़ने और हाइट कैप हटाने से अब डेवलपर्स को बेहतर प्लानिंग और ज्यादा एफिशिएंट लैंड यूज का अवसर मिलेगा। इससे शहरी क्षेत्रों में वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा, जो बढ़ती आबादी के दबाव को संभालने में मददगार होगा। साथ ही, सेटबैक नियमों में ढील और अप्रूवल प्रक्रिया को आसान बनाने से प्रोजेक्ट्स की लागत और समय दोनों में कमी आएगी, जिससे खरीदारों को भी सीधा फायदा मिलेगा।
निराला वर्ल्ड के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश गर्ग के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार के ड्राफ्ट एकीकृत भवन नियम नियोजित, अवसंरचना-आधारित शहरीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। 3 के आसपास बेस FAR (12-24 मीटर चौड़ी सड़कों पर 6 तक और इससे चौड़ी कॉरिडोर पर इससे भी अधिक) के साथ, तथा 45 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर लगभग असीमित FAR, ये सुधार ऊर्ध्वाधर विकास को प्रोत्साहित करेंगे और नोएडा, ग्रेटर नोएडा, YEIDA तथा अन्य औद्योगिक-विकास प्राधिकरणों में डेवलपर्स के लिए एक एकल, पारदर्शी ढांचा तैयार करेंगे। इससे न केवल प्रोजेक्टों की व्यवहार्यता सुधरेगी, बल्कि शहर उच्च घनत्व वाले, मिश्रित उपयोग वाले और अधिक टिकाऊ विकास की ओर बढ़ेंगे।”

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