वैश्विक चुनौतियों के बीच दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदारों के लिए राहत की खबर; समय पर मिलेंगे फ्लैट

ईरान संकट, मिडिल-ईस्ट तनाव, वैश्विक सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं और कामगारों की कमी के बीच देश के रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर एनरॉक (Anarock) से जारी ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार 2026 में देश के टॉप 7 शहरों में कुल 5,40,400 यूनिट्स की डिलीवरी तय है। यानी घर खरीदारों को तय समय पर फ्लैट की चाबी सौंपी जाएगी। हालांकि, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में यूनिटस की संख्या ज्यादा होने के कारण प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन दिल्ली-एनसीआर की स्थिति इन शहरों की तुलना में कहीं ज्यादा संतुलित नजर आती है, जहां सिर्फ 39,000 यूनिट्स डिलिवर होने है जो कुल सप्लाई का लगभग 7 प्रतिशत ही है।

डेवलपर्स के लिए प्रोजेक्ट को मैनेज करना आसान

विशेषज्ञों के अनुसार, निर्माण का सीमित दबाव होने से डेवलपर्स के लिए प्रोजेक्ट्स को बेहतर तरीके से मैनेज करना आसान होता है, जिससे समय पर निर्माण पूरा करने की संभावना बढ़ जाती है। रेरा की मजबूत रेगुलेटरी, बेहतर प्रोजेक्ट प्लानिंग और सीमित प्रोजेक्ट लोड के कारण प्रोजेक्ट्स का निर्माण और डिलीवरी समय पर होने की उम्मीद बरकरार है। शांति समझौते के बाद सप्लाइ चेन की स्थिति भी जल्द सामान्य होगी जिससे निर्माण के जरूरी कच्चा माल और घर जा चुके कामगार जल्दी वापस आएंगे जिससे निर्माण की लागत और गति दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

प्रोजेक्ट का काम तय समय पर पूरे होंगे

दिनेश गुप्ता, अध्यक्ष, क्रेडाई (CREDAI) वेस्टर्न यूपी के अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रमोटर्स ने अंडर-कंस्ट्रक्शन और नए लॉन्च प्रोजेक्ट्स के बीच अच्छा तालमेल बिठाया है। नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने से पहले मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना और उन्हें तय समय पर पूरा करना एक समझदारी भरा कदम है। डिमांड और सप्लाई के बीच सही तालमेल से ही रियल एस्टेट सेक्टर में अच्छी ग्रोथ सुनिश्चित होती है।
गीतांजलि खन्ना, एमडी, रीयरको प्रा.लि. ने कहा कि निर्माण के अंतिम चरण में पहुँच चुके प्रोजेक्ट्स काफी हद तक पीवीसी, यूपीवीसी और सिरेमिक प्रोडक्ट्स पर निर्भर करते हैं, जिनमें से कई मिडिल ईस्ट की सप्लाई चेन से जुड़े हैं। इसलिए हमने ज़रूरी इन्वेंट्री को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया है और लोकल सप्लाई चेन नेटवर्क को मज़बूत करके लागत को संभाल रहे हैं। अंतरिम शांति समझौते के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन में स्थिरता आने और अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है।

सप्लाई चेन प्रभावित होने से वर्कर का पलायन हुआ

शैलेन्द्र शर्मा, चेयरमैन, रेनॉक्स ग्रुप ने बताया कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे तनाव ने सप्लाई चेन को बाधित किया जिससे कंस्ट्रक्शन वर्कर के पलायन हुआ है और प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन शेड्यूल पर असर पड़ा है। अच्छी बात यह है कि एक परियोजना में निर्माण पूर्ण हो चुका है जबकि दूसरी परियोजना में सीमित यूनिटस का निर्माण होना है जिससे अनावश्यक निर्माण का दबाव नहीं है।
अश्वनी नागपाल, सीओओ, डिलीजेंट बिल्डर्स ने कहा कि पुराने अनुभवों के बाद हमने अपने ऑपरेशंस में की बदलाव किए है। लोकल सप्लाई पर ज्यादा फोकस किया गया है और तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है जिससे निर्बाध रूप से कब्जा दिया जा सके तथा निर्माण गति प्रभावित न हो। हिमांशु गर्ग, निदेशक, आरजी ग्रुप ने कहा कि पिछले एक दशक के उतार चढ़ाव के बाद एनसीआर का मार्केट आज पहले से ज्यादा परिपक्व हो गया है। फेज 1 में 1900 यूनिटस की ओसी प्राप्त करने के बाद हमारी प्राथमिकता पजेशन देने और फेज 2 के टावर्स के निर्माण पर है जो नवीनतम विधियों से बनाई जा रही है।

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