पटना, 2 अक्टूबर। गंडक नदी में अचानक आई फ्लैश फ्लड के बाद अब जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई है। इससे तटबंधों पर पानी का दबाव कुछ कम हुआ है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। सारण के रेवाघाट में गंडक का जलस्तर उच्चतम स्तर से 71 सेंटीमीटर और वैशाली के लालगंज में 32 सेंटीमीटर नीचे आया है। इसके बावजूद नदी का जलस्तर दोनों स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
रेवाघाट में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 0.56 मीटर और लालगंज में करीब 2 मीटर ऊपर है। स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने तटबंधों की निगरानी और बढ़ा दी है। संवेदनशील इलाकों में रात के समय विशेष पेट्रोलिंग की जा रही है, ताकि किसी भी तरह के रिसाव, सीपेज, पाइपिंग या कटाव का समय रहते पता लगाया जा सके।
रात में भी तटबंधों की निगरानी
जल संसाधन विभाग ने अधिकारियों और संबंधित कर्मियों को रात में पेट्रोलिंग के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। टीमों को तटबंधों पर होने वाले रिसाव, सीपेज, पाइपिंग, कटाव या किसी अन्य क्षति की तत्काल पहचान करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत फ्लड फाइटिंग शुरू करने को कहा गया है।
विभागीय स्तर पर तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर बचाव कार्य के लिए आवश्यक फ्लड फाइटिंग मटेरियल और मैनपावर की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है।
रेवाघाट में बचाव सामग्री और मैनपावर का निरीक्षण
सारण जिले के रेवाघाट में फ्लड फाइटिंग मटेरियल और मैनपावर की उपलब्धता का निरीक्षण किया गया। इस दौरान तटबंधों की मौजूदा स्थिति, सीपेज और पाइपिंग से बचाव के उपायों के साथ-साथ रात में पेट्रोलिंग और कट-एंड प्रोटेक्शन कार्यों की समीक्षा की गई।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखें और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी मिलते ही आवश्यक बचाव कार्य शुरू करें।
दोनों तटबंधों पर पानी का दबाव हुआ कम
जल संसाधन विभाग के अनुसार, गंडक के दोनों तटबंधों पर पानी के दबाव में कुछ कमी आई है। क्रिटिकल सीपेज और पाइपिंग की स्थिति भी पहले की तुलना में कम हुई है। हालांकि, स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक तटबंधों की निगरानी जारी रखने का फैसला किया गया है।
तटबंधों के ब्रीच स्थलों पर पर्याप्त फ्लड फाइटिंग मटेरियल का स्टॉक किया जा रहा है। इसके साथ ही कट-एंड को सुरक्षित करने और टैगिंग का काम भी जारी है।
पानापुर और मकेर में फैला बाढ़ का पानी
इधर, सारण जिले के पानापुर और मकेर प्रखंड में क्षतिग्रस्त तटबंधों से निकला पानी आसपास के बड़े इलाके में फैल रहा है। विभाग के अनुसार, यह पानी पानापुर, करचौलिया, अमनौर, जगदीशपुर, मकेर और परसा होते हुए आगे बढ़ रहा है और दरियापुर प्रखंड के हरदिया चौर में एकत्रित होगा।
विभाग के मुताबिक, हरदिया चौर से अतिरिक्त पानी मुगल कैनाल के रास्ते गंगा नदी तथा नेउरा और काकरा नाला के माध्यम से गंडक नदी में प्रवाहित होगा।
22,617 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त जलप्लावन का अनुमान
वर्तमान आकलन के अनुसार संभावित अतिरिक्त जलप्लावन क्षेत्र करीब 22,617 हेक्टेयर है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने तटबंधों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निगरानी और बचाव कार्य में लगे कर्मचारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।
रात में लगातार पेट्रोलिंग के जरिए संवेदनशील स्थलों पर संभावित रिसाव, कटाव और तटबंधों की अन्य क्षति की समय रहते पहचान करने और तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने की कोशिश की जा रही है।