अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसके चलते पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी तेजी से बढ़ा है, जिसका सीधा असर स्टील, सीमेंट, पेंट और एल्युमीनियम जैसी निर्माण सामग्रियों की कीमतों पर पड़ा है। कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में हो रही इस लगातार वृद्धि ने रियल एस्टेट डेवलपर्स के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। लागत बढ़ने के कारण आने वाले समय में डेवलपर्स को मजबूरन घरों की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी। ऐसे में, यदि आप अपना घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब और देरी न करें। बढ़ती निर्माण लागत के कारण प्रॉपर्टी के दाम कभी भी बढ़ सकते हैं।
श्रमिकों की कमी से भी संकट
भीषण गर्मी और कूकिंग गैस की समस्या के कारण कंस्ट्रक्शन साइट्स पर मजदूरों की कमी हो गई है, जिससे निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। काम धीमा होने से निवेश और रोजगार पर भी खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, बाजार में घरों की मांग लगातार बनी हुई है, लेकिन सप्लाई चेन की चुनौतियों और बढ़ती लागत ने डेवलपर्स का काम मुश्किल कर दिया है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो डेवलपर्स के लिए मौजूदा बजट में प्रोजेक्ट पूरा करना संभव नहीं होगा और जल्द ही प्रॉपर्टी की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
घरों की नई सप्लाई पर होगा असर
निर्माण सामग्री (स्टील, सीमेंट, पेंट) की लगातार बढ़ती कीमतों और मजदूरों की भारी कमी ने रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़ी अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस अस्थिर माहौल में, ज्यादातर डेवलपर्स नया जोखिम लेने से बच रहे हैं। उनका पूरा फोकस अब नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने के बजाय, पहले से चल रहे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने पर है। इससे नए प्रोजेक्ट की लॉन्चिंग कम हो सकती है। यह बाजा में सप्लाई कम करने का काम करेगा, जिससे कीमत बढ़ेगी।