सकोरोना वायरस के मद्देनजर लॉक डाउन के वजह से राज्य में हुए राजस्व क्षति एवं आर्थिक संकट में जूझ रहे आम आवाम के बचाव हेतु बिहार के मुखिया द्वारा स्वयं समेत सभी मंत्री विधायक व विधान पार्षदों के वेतन में महज 15 फ़ीसदी की कटौती हास्यास्पद एवं नाखून कटा शहीदों में नाम करनी जैसी है ।
उक्त बातें बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष मंडल सदस्य सह नवनियुक्त माध्यमिक उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष संजीत कुमार शर्मा ने कही ।
उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार व कैबिनेट के निर्णय के आलोक में कोरोनावायरस से निपटने के लिए भारत के सभी सांसदों के 2 वर्ष का फंड निलंबित करने समेत पूर्व सांसदों व वर्तमान सांसदों के वेतन, पेंशन, भत्ता आदि में 30% कटौती करने की बात आई जो भारत सरकार के सराहनीय कदम है जिसे पक्ष विपक्ष सभी स्वागत कर रहे है परंतु बिहार के सत्तासीन नीतीश सरकार द्वारा स्वयं समेत सभी माननीयों के वेतन में महज 15% वेतन कटौती खानापूर्ति मात्र है क्योंकि कोरोनावायरस जैसे महामारी से निपटने के लिए लाखों रुपए कमाने वाले माननीय द्वारा न्यूनतम 50% वेतन राज्य हित में कटानी चाहिए 15 फीसदी महज दिखावा है आमजन सत्ता व विपक्ष दोनों के राजनीति को बखूबी समझ रहे हैं।
उन्होंने बिहार के मुखिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हम नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालय अध्यक्षों का शिक्षा कमेटी व नीति आयोग के आलोक में वेतन भुगतान नहीं की जा रही बल्कि वर्षों से केन्द्र की ओर से दी जा राशि का हकमारी कर हमसबो के वेतन की कटौती कर वोट बैंक के खातिर विभिन्न विद्यालयी योजनाओ के नाम राशि बंदरबांट करते हुए स्वयं की पीठ थपथपाई जाती रही है ।
उन्होंने कहा कि सूबे बिहार के चार लाख प्रारंभिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक तक के हड़ताली नियोजित शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष अपने वाजिब मांगों को लेकर को विगत 17 फरवरी से हड़ताल पर हैं लेकिन सरकार शिक्षा शिक्षक एवं शिक्षार्थी हितों को दरकिनार कर मनमानी करने पर उतारू हैं और वार्ता करके समस्या समाधान भी करने की पहल नहीं कर रही जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि जहां एक ओर राज्य सरकार हड़ताली नियोजित शिक्षको एवं पुस्तकालयाध्यक्षो को विगत 3 माह के वेतन उपलब्ध नहीं करा घोर अन्याय कर रही है वहीं दूसरी तरफ कोरोनावायरस जागरूकता अभियान को सफल बनाने हेतु अपनी जान जोखिम में डालकर हड़ताली नियोजित शिक्षक गांव गली टोले मोहल्ले कस्वे नगरों आदि में द्वार द्वार घूम कर आम आवाम के बचाव एवं सरकार के दायित्व का निर्वहन किया और अपने पूर्व की कमाई से बैनर, पोस्टर, पम्पलेट आदि का प्रयोग कर साबुन सेनिटाइजर मास्क आदि आमजन के बीच एहतियात निर्देशों के साथ आवश्यक वस्तुएं वितरित किए परंतु आज वो खुद तंगी एवं फटेहाली के साथ भुखमरी के कगार पर है उधारी देने वाले दुकानदार इस कठिन दौर में उधारी देना बंद कर दिया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा हठधर्मी रवैया अपनाकर माननीय प्रधानमंत्री एवं श्रम विभाग के निर्देशों का भी अनुपालन नहीं किया जा रहा है नतीजतन हड़ताल अवधि में आर्थिक तंगी व वेतन भुगतान नहीं होने एवं असंवैधानिक कार्रवाई से तनाव में आएं एक दर्जन से अधिक शिक्षकों की मृत्यु हो चुकी है इस पर सरकार की संवेदनशीलता तनिक भी प्रकट नहीं होना चिंताजनक ् दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि राज्य सरकार शीघ्र संकट के इस घड़ी में वार्ता कर हड़ताल तुड़वाने समेत लंबित तीन माह का वेतन भुगतान करें अन्यथा मरता क्या नहीं करता के तर्ज पर सूबे बिहार के समस्त हड़ताली शिक्षक लॉ एंड ऑर्डर को सूचित कर सोशल डिस्टेंस अपनाते हुए तथा आंदोलन को और तेज करते हुए सड़क पर उतरने को बाध्य एवं विवश हो जाएंगे जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी स्वयं राज्य सरकार की होगी।