नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर वेदांता ग्रुप ने अपने परिचालनों में जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और प्रकृति-सकारात्मक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वित्त वर्ष 2021 से अब तक समूह ने लगभग 40 लाख पेड़ लगाए हैं और वर्ष 2030 तक 70 लाख पेड़ लगाने के अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। केवल वित्त वर्ष 2026 में ही परिचालन क्षेत्रों में करीब 10 लाख पेड़ लगाए गए, जिससे खनन क्षेत्रों, औद्योगिक भूमि और स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र के पुनर्स्थापन एवं पुनर्जीवन को समर्थन मिला।
विश्व आर्थिक मंच की पारिस्थितिक पुनर्स्थापन से जुड़ी वैश्विक पहल 1 ट्रिलियन ट्रीज़ (1t.org) के अनुरूप, वेदांता समूह की वृक्षारोपण पहलों में स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के अनुकूल देशी और पारंपरिक प्रजातियों को प्राथमिकता दी जा रही है। इनमें नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन, करंज, बांस, जामुन और लेमनग्रास जैसी प्रजातियां शामिल हैं। समूह अपने विभिन्न व्यवसायों के माध्यम से वृक्षारोपण अभियान चला रहा है, वेस्टयार्ड को हरित पट्टियों में बदल रहा है, खनन के बाद की भूमि का पुनर्वास कर रहा है और मियावाकी पद्धति के तहत सघन वृक्षारोपण कर रहा है। यह तकनीक स्थानीय वन पारिस्थितिकी तंत्र को दोबारा विकसित करने और जैव विविधता की बहाली को तेज़ करने में मदद करती है।
वेदांता समूह ने अपने सभी 52 परिचालन परिसंपत्तियों में 100% जैव विविधता स्क्रीनिंग भी पूरी कर ली है। इसके माध्यम से जैव विविधता के आधारभूत मानक तय किए गए हैं और परिचालनों में जैव विविधता की शुद्ध हानि न होने के लक्ष्य के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया गया है।
हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड सहित समूह की विभिन्न इकाइयों में कई जैव विविधता पहलें चल रही हैं। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने 1 लाख से अधिक पौधे लगाए और TERI के सहयोग से माइकोराइजा तकनीक का उपयोग करते हुए चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर की 16 हेक्टेयर बंजर भूमि को हरे-भरे ग्रीनबेल्ट में बदलने का कार्य किया। कंपनी ने देबारी, दरीबा, चंदेरिया और कायड़ में मियावाकी वन भी विकसित किए हैं। संरक्षण के प्रति अपने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को और मजबूत करते हुए, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड वैश्विक संरक्षण ढांचों और जैव विविधता की शुद्ध हानि न होने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप साइट-विशिष्ट जैव विविधता प्रबंधन योजनाएं तैयार करने के लिए प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) के साथ सहयोग कर रही है।
बाल्को ने पारिस्थितिक पुनर्स्थापन को बढ़ावा देने के लिए टेलिंग डैम और टाउनशिप क्षेत्रों में देशी प्रजातियों का वृक्षारोपण किया है, जबकि वेदांता एल्युमिनियम की लांजीगढ़ इकाई गैर-सक्रिय रेड मड स्टोरेज क्षेत्रों में पौधारोपण के माध्यम से औद्योगिक भूमि का पुनर्स्थापन कर रही है। भारत की अग्रणी फेरोक्रोम उत्पादक कंपनी वेदांत फैक्टर ने खनन क्षेत्रों में मिट्टी के पुनर्जीवन को समर्थन देने के लिए सामुदायिक नदी तटों पर लेमनग्रास लगाकर फाइटोरिमेडिएशन पहलें लागू की हैं। वहीं गोवा में वेदांता आयरन एंड स्टील ने सांक्वेलिम खदानों में 200 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र का पुनर्जीवन किया है। इसके तहत स्थानीय और औषधीय पौधों की प्रजातियों को शामिल करते हुए पुरस्कार विजेता एग्रोफॉरेस्ट्री पहलें चलाई गई हैं।
ओडिशा के झारसुगुड़ा में वेदांता एल्युमिनियम द्वारा विकसित बायोडायवर्सिटी पार्क में 30 से अधिक तितली प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि लांजीगढ़ स्थित एवियन एरीना पार्क पक्षियों के लिए सुरक्षित घोंसले और बर्ड बाथ जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। वेदांता ऑयल एंड गैस ने आंध्र प्रदेश के रव्वा क्षेत्र में 86 एकड़ में कृत्रिम मैंग्रोव विकसित किए हैं, जो 150 से अधिक पक्षी प्रजातियों, स्मूद-कोटेड ऊदबिलाव और संकटग्रस्त फिशिंग कैट के लिए आवास का काम कर रहे हैं। राजस्थान में भी वेदांता ऑयल एंड गैस स्पाइनी-टेल्ड लिज़र्ड के संरक्षण के लिए आवास पहचान और जागरूकता से जुड़ी पहलों को समर्थन दे रही है।
पारिस्थितिक पुनर्स्थापन से आगे बढ़ते हुए, वेदांता ग्रुप अपने प्रमुख पशु कल्याण अभियान ‘TACO’ (पशु देखभाल संगठन) के माध्यम से पशु कल्याण और वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूत कर रहा है। हरियाणा के फरीदाबाद में TACO 24×7 पशु चिकित्सालय, आश्रय गृह और एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर (ABC) संचालित करता है, जहां परित्यक्त और आवारा पशुओं के लिए उन्नत पशु चिकित्सा सेवाएं, डायग्नोस्टिक्स, मोबाइल इमरजेंसी सेवाएं और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
TACO की वन्यजीव संरक्षण पहल ‘मिशन वनरक्षा’ के तहत वेदांता ग्रुप भारत के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में संरक्षण प्रयासों को समर्थन दे रहा है। इसके लिए कंपनी ने असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के साथ रणनीतिक साझेदारियां की हैं। यह पहल शिकार-रोधी ढांचे, निगरानी प्रणालियों, फ्रंटलाइन कर्मियों की आवाजाही और आवास संरक्षण उपायों को मजबूत कर रही है। इसके तहत निगरानी वाहनों, एंटी-पोचिंग कैंपों और वन कर्मियों के लिए आवासीय इकाइयों की व्यवस्था भी शामिल है।
वेदांता ग्रुप ने जैव विविधता जागरूकता और संरक्षण से जुड़ी कहानियों को बढ़ावा देने के लिए ‘तेंदुआ वंश – राणाओं का उदय’ जैसे प्रोजेक्ट्स का भी समर्थन किया है, जो भारत की वन्यजीव विरासत और संरक्षण तंत्र को प्रदर्शित करते हैं। इसके अलावा कंपनी ‘जंगली राजस्थान’ डॉक्यूमेंट्री परियोजना को भी सहयोग दे रही है, जो राजस्थान के विविध वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र पर केंद्रित है।
पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, जैव विविधता प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण में निवेश के माध्यम से वेदांता ग्रुप प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार मजबूत कर रहा है, साथ ही सतत और जिम्मेदार विकास को भी आगे बढ़ा रहा है।
