बिहार पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन ने कोरोना के वजह से विद्यालयों के लगातार बंद होने के परिणाम, बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए केंद्र सरकार एवं बिहार के मुख्यमंत्री को सलाह देते हुए कहा है कि कोरोना महामारी की स्थिति का उचित आंकलन करते हुए 18 मई के बाद सप्ताहिक विकल्प कम से कम 15 दिनों तक विद्यालय संचालन की अनुमती पर विचार किया जाए। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डी. के. सिंह ने सलाह देते हुए कहा कि हफ्ते मे 3 दिन प्राथमिक कक्षाओं (Play to Vth) का संचालन एवं शेष 3 दिन ऊँच प्राथमिक कक्षाओं (VI to X+2) का संचालन किया जा सकता है। इससे छात्रों की उपस्थिति संख्या कम होगी फलस्वरुप सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का अनुपालन भी सम्भव हो पाएगा।
लंबी अवधि तक विद्यालयों के लगातार बंद होने के कारण बच्चों के मनोबल पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। बच्चों के मस्तिष्क मे ऐसी सोच घर कर गई है कि अब वो अध्ययन एवं परीक्षा से वंचित रह जाएंगे, उनका पढ़ाई सम्भव नहीं हो पाएगा।
इसके परिणाम स्वरूप बच्चों मे पढ़ाई की भावना समाप्त होते जा रही है। अभिभावकों के अनुसार ऑनलाइन पढ़ाई के बावजूद बच्चों की दिलचस्पी पढ़ाई मे फीकी पड़ गई है। वक़्त रहते इसके समाधान पर विचार करना अनिवार्य हो गया है।
संगठन के उपाध्यक्ष डॉ. एस . एम . सोहेल ने कहा कि गरीब वर्ग के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा से वंचित रह जा रहे हैं। सभी वर्ग के बच्चों के अंदर पढ़ाई के प्रति रुचि को समाप्त होने से रोकने के लिए विद्यालयों मे कक्षाओं का संचालन आवश्यक है इसके लिए सरकार को विचार करना चाहिए।
संगठन के सह-सचिव प्रेम रंजन ने कहा कि बच्चों के मस्तिष्क मे पढ़ाई के प्रति रुचि जागृत करने मे शिक्षकों एवं अभिभावकों को लंबे समय तक मेहनत करना पड़ता है। बच्चों के सोच मे सकारात्मकता बनाए रखने के लिए समय-समय पर मार्ग-दर्शन की आवश्यकता होती है। इतने मेहनत से बनाए बच्चों के मनोबल को बरकरार रखने के लिए ज्यादा दिनों तक उन्हें अध्ययन से दूर रखना उचित नहीं होगा।
धन्यवाद।
Dr. D. K. Singh
Chairman
Bihar Public School & Children Welfare Association
