पटना : लंबे समय से रोजगार पाने की लड़ाई लड़ रहे बिहार के हजारों सांख्यिकी स्वयंसेवकों को अब बिहार विधानसभा सदस्य, कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह का साथ मिला है। उन्होंने इस संदर्भ में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर रोजगार देने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि मैं, मान्यता प्राप्त सांख्यिकी स्वयंसेवकों की समस्या को अच्छी तरह समझता हूं। इनकी समस्या का तत्काल हल निकालना जरूरी है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सिंह ने अनुरोध किया कि इन लोगों की बढ़ती उम्र और पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण प्रशिक्षित बेरोजगारी को ध्यान में रखते हुए रोजगार की व्यवस्था नियमित रूप से की जाए।
वहीं, दूसरी ओर आवास समिति के सभापति व्यासदेव प्रसाद ने भी मुख्यमुत्री से इन लोगों को जल्द न्याय दिलाने की मांग की है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब इस समस्या का हल जल्द निकल सकता है। सकार के अंदर से इन लोगों के पक्ष में आवाज उठने से सांख्यिकी स्वयंसेवकों को भी बल मिला है। पोस्ट2पिलर के साथ बातचीत में कई सांख्यिकी स्वयंसेवकों ने कहा कि बहुत दिनों की लड़ाई के बाद अब सरकार में शामिल लोगों का साथ मिलना शुरू हुआ है। ऐसे में अब उम्मीद जगी है कि हमा लोगों को नौकरी जल्द से जल्द मिलेगी।
कई सालों से लड़ रहे हैं अपनी लड़ाई
सांख्यिकी स्वयंसेवकों एक अदद नौकरी पाने की लड़ाई पिछले कई सालों से लड़ रहे हैं। वो अपनी बात मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया से लेकर धरणा-प्रदर्शन का भी सहारा ले रहे हैं। कई दफा उन्होंने अभियान चलाकर बिहार के मुख्यमंत्री औैर उपमुख्यमंत्री को इस संदर्भ में पत्र और मुलाकात की है।
जिला स्तर पर प्रदर्शन करने का फैसला
रोजगार मुहैया कराने की मांग पर सांख्यिकी स्वयंसेवकों ने जिला स्तर पर कार्यक्रम और विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि आने वाले विधानसभा चुनाव तक वह अपना शांति पूर्ण विरोध प्रदर्शन हर जिले में करते रहेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री जब तक हमारी आवाज नहीं सुनते हैं यह जारी रहेगा। बताते चले कि पूरे बिहार राज्य से हजारों सांख्यिकी स्वयंसेवकों के समायोजन के लेकर एएसवी संघ विगत छह वर्षों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। कई बार तो आंदोलन करने के दौरान सांख्यिकी स्वयंसेवकों को पटना पुलिस के मार भी खानी पड़ी हैं लेकिन फिर भी ये लोग संघर्ष करते रहे हैं।
2012 और 2013 में परीक्षा लेकर बहाली हुई थी
गौरतलब है कि बिहार सरकार ने वर्ष 2012 और 2013 में मान्यता प्राप्त सांख्यिकी स्वयंसेवक की बहाली इंटरमीडिएट साइंस में योग्यता रखकर परीक्षा लेकर किया था। उसके बाद सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन मान्यता प्राप्त सांख्यिकी स्वयंसेवक द्वारा किया गया चाहे वह फसल काटनी ,फसल सर्वेक्षण अभियान, वर्षा पात हो या जनगणना संबंधित कार्य। इन सभी कार्य का सर्वेक्षण मान्यता प्राप्त सांख्यिकी स्वयंसेवक के द्वारा कराए गए थे। लेकिन जब इन सभी कर्मियों को स्थाई करने की बात आई तो सरकार ने इसके पैनल को जून 2016 में निरस्त कर दिया जिसके कारण सांख्यिकी स्वयंसेवक सड़क पर आ गए।
