प्रवासी मजदूरों के खाली जेब पर अब भी खामोशी
राहत पैकेज -2
राहत पैकेज की दूसरी किस्त में प्रवासी मजदूरों को आज कई रियायतें या राहत दी गई है। वित्त मंत्री ने प्रवासी मजदूरों के लिए वन नेशन वन राशन कार्ड, कम किराया पर शहरों में घर, दो महीने तक मुफ्त राशन, देशभर में एक सामान न्यूनतम वेतन, ईएसआईसी की सुविधा आदि देने की घोषणा की है। मेरा मानना है कि ये सारी घोषणाएं दूरगामी परिणाम देंगे लेने फौरी राहत देने के लिए यह काफी नहीं है। सराकर को प्रवासी मजदूरों के खाते में कुछ न कुछ नकदी डालने की व्यवस्था करनी चाहिए थी। जिस तरह लाखों की संख्या में मजदूर विभिन्न शहरों से निकलर अपने-अपने घर जा रहे हैं तो उनको कैश की अभी सबसे अधिक जरूरत है। वित्त मंत्री को अगली घोषणा में इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
हां, रेहड़ी-पटरी वालों के लिए 5000 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा एक स्वागत योग्य कदम जरूर है। इससे देशभर में करीब 50 लाख रेहड़ी-पटरी वाले को फायदा मिलेगा। वह कारोन संकट से बर्बाद अपने कारोबार को शुरू करने के लिए 10 हजार रुपये का कर्ज आसानी से बैंक से ले सकेंगे। इसके लिए उनको प्राइवेट लेंडर से मब्याज पर कर्ज नहीं लेना होगा।
अब लौटते हैं कृषि और किसान पर तो आज की घोषणाएं बिल्कुल काफी नहीं है। सरकार ने नाबार्ड के जरिये 30,000 करोड़ का अतिरिक्त फंड और क्रेडिट कार्ड से 2.5 करोड़ किसान और जोड़ने की घोषणा की है। मेरा मानना है कि यह काफी नहीं है। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं कि एक रिपोर्ट के मुताबिक, 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान फल और शब्जियों उगाने वाले किसानों को लॉकडाउन के दौरान हुआ है। 50 फीसदी सब्जियां लॉकडाउन से परिवहन प्रभावित होने से मंडी नहीं पहुंच पाई। वहीं, 200 करोड़ रुपये का नुकसान प्रति दिन 10 राज्यों के दूध उत्पादक किसानों को उठाना पड़ा है। पोल्ट्री, मुधुमक्खी पालक किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
ऐसे में कृषि विशेषज्ञों का मनाना है कि जब अर्थव्यवस्था के दूसरे सेक्टर की विकास दर शून्य पर पहुंच गई तब भी कृषि और किसान ने इस देश को सहारा देने का काम किया है। आज भी देश की 55 फीसदी आबादी खेती पर आश्रित है। ऐसे में सरकार को कम से कम 4 से 5 लाख करोड़ रुपये का पैकेज देना चाहिए। साथ ही कोरोना से हुए नुकसान की भरपाई के लिए गेहूं, धान की एमएसपी पर 100 से 200 रुपये का बोनस देना चाहिए। गांव के किसाने की शब्जी शहरों तक पहुंचाने के लिए सप्लाई चेन पर 1000 करोड़ का पैकेज देना चाहिए। ऐसे में संभव है कि सरकार एक अगल से पैकेज की घोषणा करे। अब तो यह वक्त ही तय करेगा कि वह कब होता है।
आज फिर एक बार रियल एस्टेट सेक्टर को घर खरीदारों के माध्यम से लॉलीपॉप देने की कोशिश की गई। हाउसिंग लोन लेने पर सब्सिडी की योजना 31 मार्च 2021 तक बढ़ाई गई। हालांकि, इससे सुस्त पड़े रियल एस्टेट में तेजी लौटेगी यह कहना मुश्किल है। मेरा मनना है कि जब तक लोगों को जॉब के प्रति भरोसा नहीं बढ़ता तब तक वह घर की खरीदारी नहीं करेंगे। इसलिए यह प्रयास काफी नहीं है। वहीं, छोटे कारोबारियों को ब्याज सब्सिडी के तहत राहत देने की कोशिश की गई।
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