राकेश यादव
सीएमडी, अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप
नई दिल्ली। आम बजट 2020-21 पेश होने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारणम 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। इस बार के आम बजट में देश की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए कई सुधारों की घोषणा हो सकती हैं। अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देने वाला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी आम बजट में कई बड़ी घोषणाएं होने की उम्मीद उम्मीदें हैं। मेरा मानना है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 7% और रोजगार में करीब 14% का योगदान देने वाले इस सेक्टर को पटरी पर लाने के लिए वित्त मंत्री को घर खरीदारों को आयकर में छूट की सीमा बढ़ाने का ऐलान के साथ डेवलपर्स को फंड प्रोत्साहन देना चाहिए।
होम लोन और व्यक्तिगत आय पर कर राहत मिले
मौजूदा समय में आयकर अधिनियम की धारा 24 के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये की आयकर छूट मिलती है। इससे अब बढ़ाने का वक्त आ गया है। इस फैसले से अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावे देने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही धारा 80 सी के तहत कटौती की सीमा 1.5 लाख रुपये में बढ़ोतरी करने की जरूरत है। 2014 से अभी तक इसमें बदलाव नहीं हुआ है। साथ ही कंपनी कर कटौती के बाद व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा बढ़ाने की जरूरत है। इन कदमों से आम आदमी के हाथ में अधिक पैसा आएगा। वह इसका इस्तेमाल अपने बड़े सपने जैसे घर या कार की खरीदारी में करेगा। इससे अर्थव्यवस्था को तेज करने में मदद मिलेगी।
निर्माणाधीन घरों के लिए जीएसटी में आईटीसी का लाभ
सरकार ने निर्माणाधीन घरों पर जीएसटी की दर 5% कर दिया गया था लेकिन आईटीसी का लाभ खत्म कर दिया गया था। इससे घर खरीदारों को जरूर लाभ मिला लेकिन लंबे समय से सुस्ती की चपेट में चल रहे रियल एस्टेट डेवलपर्स की स्थिति और डवाडोल हो गई है। डेवलपर्स कच्चे माल के निर्माण के लिए कर लाभ नहीं ले पा रहे हैं। प्रॉपर्टी की कीमतें कम करने और निर्माणाधीन घरों को फिर से आकर्षक बनाने के लिए आईटीसी लाभ फिर से प्रदान करने की जरूरत है।
फंसे प्रोजेक्ट के लिए फंड की आसान उपलब्धता हो
सरकार ने हाल ही में 25 हजार करोड़ रुपये का स्ट्रेस फंड देने की घोषणा की है। इस फंड को जल्द से जल्द अच्छे प्रोजेक्ट के लिए उपलब्ध कराने की जरूरत है। फंड की कमी से रियल एस्टेट सेक्टर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। आसान तरलता से डेवलपर्स के लिए पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और आपूर्ति बनी रहेगी। इससे होम बायर के सेंटीमेंट में सुधार और घरों की मांग बढ़ाएगा। यह इस सेक्टर को पटरी पर लाने और प्रॉपर्टी की कीमत नियंत्रित करने में मदद करेगा।
सस्ते घरों को और प्रोत्साहन मिलेे
सस्ते घरों को बढ़ावा देने के लिए और प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इस महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण खंड के लिए बुनियादी ढांचे की स्थिति का दर्जा देने के बावजूद, डेवलपर्स प्रमुख बैंकों और एनबीएफसी से कम ब्याज दरों पर धन प्राप्त करने में असमर्थ हैं। किफायती आवास परियोजनाओं के लिए लाभ बहुत कम है। इससे डेवलपर्स प्रोजेक्ट लाने में हिचक रहे हैं। अगर सरकार को 2022 तक सभी को घर देने का लक्ष्य पूरा करना है तो सस्ते घरों के लिए औैर प्रोत्साहन देने होंगे।
भूमि सुधारों को लागू करें
कंपनी कर में कटौती के बाद नए कारखाने स्थापित करने की चाह रखने वाली कंपनियों के लिए 15% कर की दर केवल तभी लागू की जा सकती है जब वे आसानी से जमीन अधिग्रहण करने में सक्षम होंगे। नए करखाने खुलने से उस क्षेत्र में आवासीय प्रोजेक्ट की मांग बढ़ेगी। वित्त मंत्री को भूमि सुधारों की लागू करने की घोषणा बजट में करनी चाहिए।
निवेशकों को मिले ज्यादा रियायत
भारत में रियल एस्टेट में सेक्टर में विदेशी निवेशकों को अधिक से अधिक आकर्षित करने की जरूरत है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करने की जरूरत है जहां निवेशकों को प्रोत्साहन मिले, जिससे अधिक से अधिक विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। इसके लिए नियम को सरल बनाने की जरूरत है। इसके लिए रियल एस्टेट को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का दर्जा देने की की जरूरत है। इससे पूरे सेक्टर की हालत को बदल सकती है, क्योंकि इससे कम दरों पर फंड्स प्राप्त करने में मदद मिलेगी और सेक्टर के प्रत्येक हिस्से को लाभ होगा। इससे इस सेक्टर में निवेश भी बढ़ेगा।
