भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की है। आज आरबीआई ने रेपो रेट में 0.50% की बड़ी कटौती का ऐलान किया। केंद्रीय बैंक के इस फैसले से होम, कार समेत सभी लोन सस्ते हो जाएंगे। पिछली दो कटौतियों के बाद भी ब्याज दर में कमी आई है, जिससे ईएमआई घटी है। अब इस कटौती के बाद ईएमआई में बड़ी राहत मिलेगी। रियल एस्टेट सेक्टर के एक्सपर्ट का कहना है कि इससे रियल एस्टेट सेक्टर, भारतीय इकोनॉमी और होम बायर्स समेत इस सेक्टर से जुड़े करीब 200 सेक्टर को फायदा मिलेगा। आइए जानते हैं कि क्या कहना है आरबीआई के इस फैसल पर रियल एस्टेट सेक्टर का।
तेज होगी अर्थव्यवस्था की रफ्तार
अंतरिक्ष इंडिया के सीएमडी राकेश यादव ने आरबीआई द्वारा रेपो रेट में लगातार तीसरी बार और जून की पॉलिसी में 0.50% की बड़ी कटौती का स्वागत करते हुए कहा कि इस कदम से भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज करने में मदद मिलेगी। रेपो रेट में इस बड़ी कटौती के बाद बैंक लोन सस्ता करेंगे। इससे होम लोन, कार लोन समेत सभी तरह के लोन सस्ते होंगे। लोन सस्ता होने से इंडियन इकोनॉमी में मांग बढ़ेगी, जो जीडीपी की रफ्तार बढ़ाने में मदद करेगी।
रियल एस्टेट के लिए यह एक बेहतर कदम
नारेडको के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी हरि बाबू ने कहा कि आरबीआई द्वारा लगातार तीसरी बार रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती करने का निर्णय स्पष्ट रूप से चुनौतीपूर्ण वैश्विक वातावरण में विकास को समर्थन देने के उसके इरादे को दर्शाता है। कम ब्याज दरों का मतलब है ऋण तक आसान पहुंच, बेहतर तरलता और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देना, जो अर्थव्यवस्था को अपनी गति बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
रियल एस्टेट के लिए यह एक बेहतर कदम है । RBI द्वारा दरों में हुई कटौती को बैंक अपने ग्राहकों को ट्रांसफर करेंगे इससे होम लोन की दरों में गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे कई लोगों, खासकर पहली बार घर खरीदने वालों और मध्यम आय वर्ग के लिए घर खरीदना अधिक किफायती हो जाएगा। डेवलपर की ओर से, सस्ता ऋण परियोजना वित्तपोषण पर दबाव कम करेगा और स्थिर निर्माण गतिविधि को बनाए रखने में मदद करेगा। इससे न केवल आवास आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रियल एस्टेट से जुड़े कई संबद्ध क्षेत्रों को भी समर्थन मिलेगा।
हम इस कदम का पूरा समर्थन करते हैं । दर में कटौती से बाजार में सकारात्मक भावना आएगी और सभी क्षेत्रों में मांग को बनाये रखने और बढ़ाने में मदद मिलेगी। आने वाले महीनों में, हम उम्मीद करते हैं कि इसका सार्थक और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा न केवल रियल एस्टेट पर, बल्कि व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी।”
अनंतराम वी वरयूर, सह-संस्थापक, मानसुम होम्स सीनियर लिविंग ने कहा, “यह महत्वपूर्ण कटौती निस्संदेह अपने प्रियजनों की वरिष्ठ जीवन आवश्यकताओं के लिए योजना बनाने वाले कई परिवारों को राहत देगी। कम EMI के साथ, परिवार अब वरिष्ठ जीवन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं जो समुदाय, चिकित्सा पहुँच और बुढ़ापे में सम्मान प्रदान करते हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस दर में कटौती के लाभ ऋण प्रकारों में भिन्न होंगे, बाहरी बेंचमार्क ऋण दर (EBLR) से जुड़े उधारकर्ताओं पर सबसे तत्काल प्रभाव देखने को मिलेगा। जबकि यह एक स्वागत योग्य कदम है, हमें बढ़ती दैनिक आवश्यक लागतों से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को भी स्वीकार करना चाहिए, जो निश्चित आय वाले वरिष्ठों को प्रभावित करना जारी रखती हैं।
फिर भी, यह कदम वरिष्ठ जीवन क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक प्रवृत्ति का संकेत देता है और उम्मीद है कि यह भारत की बुजुर्ग आबादी के लिए गुणवत्तापूर्ण जीवन को और अधिक सुलभ बनाएगा।“
पिरामिड इंफ्राटेक के अश्विनी कुमार का कहना है RBI द्वारा रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती करना एक सही समय पर लिया गया और विकास को बढ़ावा देने वाला फैसला है, जो रियल एस्टेट बाजार में खरीदारों के भरोसे को मजबूत करेगा। कम ब्याज दरों से घर खरीदना आसान होगा, खासकर उन लोगों के लिए जो पहली बार घर ले रहे हैं, और डेवलपर्स पर भी आर्थिक बोझ कम होगा। यह नीति बदलाव हाउसिंग की मांग को बढ़ाएगा और सेक्टर की रिकवरी और लंबे समय की ग्रोथ को मजबूती देगा।
एस्कॉन इन्फ्रा रियलटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज शर्मा ने कहा RBI का रेपो रेट 6 फीसदी से घटाकर 5.5 फीसदी करना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा और अहम कदम है। 50 बेसिस प्वाइंट की यह कटौती बाजार में नई ऊर्जा लाएगी। इससे होमबायर्स की EMI कम होगी और डेवलपर्स के लिए लोन लेना सस्ता होगा, जिससे वे ज्यादा प्रोजेक्ट शुरू कर पाएंगे और देश की हाउसिंग डिमांड को पूरा कर पाएंगे। यह फैसला न सिर्फ घरों की मांग बढ़ाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
बेटर चॉइस रियल्टर्स के डायरेक्टर,नयन रहेजा का कहना है कि RBI द्वारा रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती करके इसे 5.5% करना बहुत सराहनीय फैसला है। विश्व की आर्थिक स्थिति को देखते हुए, यह लगातार तीसरी कटौती है जो रियल एस्टेट मार्केट को बढ़ावा देती रहेगी। जब भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर दिख रही है, तो यह कदम लोगों को कर्ज लेने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे ज्यादा लोग प्रॉपर्टी में निवेश करेंगे और हाउसिंग सेक्टर की मांग बढ़ेगी।
एआरआईपीएल (ARIPL) के फाउंडर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेंद्र कौशिक का कहना है, “आरबीआई द्वारा रेपो रेट को 5.5% पर लाने का निर्णय सही समय पर लिया गया है। यह घोषणा रियल एस्टेट क्षेत्र के साथ मजबूती से जुड़ी हुई है, क्योंकि होम लोन रेट में कमी खरीदारों को आकर्षित करेगी। जबकि डेवलपर्स नए विकास में परियोजनाओं को बढ़ाने के लिए इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। इसलिए, यह घोषणा इस क्षेत्र में एक नया जोश भर देगी।“
वीवीआईपी ग्रुप के वीपी सेल्स और मार्केटिंग उमेश राठौर ने कहा, हम RBI के इस फैसले का स्वागत करते हैं कि उन्होंने रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। इससे देश में घरों की मांग बढ़ेगी और बिक्री में सुधार होगा। मौजूदा आर्थिक हालात में यह कदम घर खरीदने वालों और डेवलपर्स दोनों के लिए राहत लेकर आएगा, क्योंकि अब लोन लेना सस्ता होगा और बाजार में पैसा भी आसानी से मिलेगा.
हरिंदर सिंह होरा, संस्थापक एवं अध्यक्ष , रीच ग्रुप ने कहा, “आरबीआई द्वारा रेपो दर में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर इसे 6% पर लाना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक समयानुकूल और प्रभावशाली निर्णय है। कम ब्याज दरों से खुदरा ऋणों की मांग में वृद्धि की संभावना है, जिससे व्यवसायों को विस्तार करने और अंतिम उपयोगकर्ताओं को खरीद के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। हमें उम्मीद है कि इससे लीजिंग गतिविधियों और नई परियोजनाओं के लॉन्च में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जो निवेशकों और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत विश्वास का संकेत है।”
रेपो रेट और सीआरआर में कटौती: वैश्विक दबावों के बीच किफायती आवास को राहत की उम्मीद
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की आर्थिक नब्ज को थामते हुए रेपो रेट में 0.50 प्रतिशत की कटौती की है, जिससे यह अब 5.5 प्रतिशत हो गया है। इसके साथ ही बैंक ने कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) में भी कटौती की घोषणा की है। ये दोनों फैसले ऐसे समय में आए हैं जब रियल एस्टेट सेक्टर, खासकर किफायती और मिड-इनकम हाउसिंग, महामारी और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता से उबरने की कोशिश कर रहा है।
रेपो रेट में यह कटौती इस साल की लगातार तीसरी कटौती है। इसका सीधा असर आम जनता की ईएमआई पर पड़ेगा, जिससे होम लोन की लागत घटेगी और घर खरीदना अधिक सुगम होगा। इस फैसले को रियल एस्टेट इंडस्ट्री में बड़े सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
क्रेडाई पश्चिमी यूपी के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता का मानना है कि “CRR में कटौती से बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ेगी। इससे निर्माण कार्यों के लिए अधिक फंड मिलने की संभावना है और प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे किए जा सकेंगे। यह पूरी इंडस्ट्री के लिए राहत की बात है।”
पंकज कुमार जैन डायरेक्टर केडब्लू ग्रुप के अनुसार, “रिपोरेट पर 50 बीपीएस की कटौती इस क्षेत्र के लिए अच्छी है। आरबीआई ने घरेलू निजी खपत को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसा किया है। ईएमआई कम हो जाएगी और नए घर खरीदारों के लिए बेहतर दर पर होम लोन उपलब्ध होगा। यह खरीदारों के लिए एक बड़ी राहत होगी क्योंकि संपत्ति की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कमी करने से घर खरीदारों को राहत मिल सकती है।”
महामारी के बाद के वर्षों में किफायती आवास बाजार ने सबसे ज्यादा दबाव झेला है। देश के प्रमुख शहरों में इस सेगमेंट की बिक्री और नई लॉन्चिंग में बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि, बिना बिके मकानों के स्टॉक में हाल ही में करीब 19% की गिरावट इस बात का संकेत है कि रियल डिमांड अब भी बनी हुई है, और यह बदलाव नीतिगत हस्तक्षेपों का असर दिखा सकता है।
सुरेश गर्ग, सीएमडी, निराला वर्ल्ड का मानना है कि रेपो रेट के घटने से बैंक द्वारा भी ब्याज दरों में कमी की जाती है। इससे लोन चुकाने वालों के मासिक ईएमआई में कमी के साथ-साथ नया लोन लेने वालों की एलिजबिलिटी भी बढ़ जाती है और वे अपने मौजूद आय पर ज्यादा अमाउन्ट का लोन ले सकेंगे। इससे वे अपने लिए नए और बड़े घर की योजना बना सकेंगे जिससे घरों की मांग बढ़ेगी।
रेनॉक्स ग्रुप के चेयरमैन शैलेन्द्र शर्मा के अनुसार, “RBI का यह कदम निश्चित तौर पर हाउसिंग सेक्टर को नई ऊर्जा देगा, खासकर उन परिवारों को जो सीमित बजट में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं। कम ब्याज दरों से उनकी मासिक किस्तों में राहत मिलेगी और खरीदने की क्षमता बढ़ेगी।
इस फैसले का एक और बड़ा असर यह हो सकता है कि बैंक अब अधिक लचीलापन दिखाते हुए होम लोन की ब्याज दरों में कटौती करें। इससे मध्यवर्गीय परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
डिलिजेन्ट बिल्डर्स के सीओओ अश्वनी नागपाल के अनुसार, “कम ब्याज दरों से केवल खरीददारों को ही नहीं, बल्कि डेवलपर्स को भी लाभ होगा क्योंकि उनकी फाइनेंसिंग लागत घटेगी। इससे घर खरीदारों की एफोर्डबिलिटी बढ़ेगी और नई लॉन्चिंग को भी गति मिल सकती है।”
आरजी ग्रुप के निदेशक हिमांशु गर्ग ने आरबीआई के इस कदम को स्वागत योग्य बताया है। लगातार 3 बार की समीक्षा में अभी तक 100 बैसिस पॉइंट की कटौती से स्पष्ट है कि नियामक अपनी नीति पर कायम है और अब बैंकों को अपने ब्याज दरों में कटौती करने की बारी है।
नियोलिव के संस्थापक एवं सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा, “ आरबीआई द्वारा रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती करके इसे 5.5% करने का निर्णय रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक स्वागत योग्य कदम है। कम ब्याज दरों से लोगों की घर खरीदने की क्षमता बढ़ती है, जिससे घर का सपना पूरा करना आसान होता है। इस दर में कटौती से खरीदारों का विश्वास बढ़ने और आवास की मांग में वृद्धि होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, यह नए जमाने के फंड और डेवलपमेंट कंपनियों को आगे निवेश करने, सैक्टर को मजबूत करने और व्यापक आर्थिक विकास में सहयोग देने का सकारात्मक संकेत देता है।“
रॉयल ग्रीन रियल्टी के प्रबंध निदेशक यशांक वासन ने कहा, “गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में आरबीआई एमपीसी की बैठक में रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती की घोषणा की गई है, जिससे यह 5.5% हो गई है। फरवरी 2023 के बाद यह पहला बदलाव है। इस कटौती से घर खरीदने वालों के लिए यह एक सकारात्मक खबर है क्योंकि इससे होम लोन पर ब्याज दरें कम होंगी और वहनीयता बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, कम ईएमआई से उधारकर्ताओं के लिए अपने मौजूदा होम लोन को रिफाइनेंस करना आसान हो जाएगा।“
बीपीटीपी के सीएफओ माणिक मलिक ने कहा, “रेपो दर को 50 आधार अंकों की कटौती के साथ 5.5% करना देश की अर्थव्यवस्था के लिए, खासतौर पर रियल एस्टेट सेक्टर के लिए, एक सकारात्मक कदम है। इस बदलाव से कर्ज लेना सस्ता होगा, जिससे डेवलपर्स और घर खरीदार दोनों को फायदा होगा। डेवलपर्स को कम ब्याज दरों से वित्तीय राहत मिलेगी, जिससे प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना आसान होगा और निर्माण लागत भी नियंत्रण में रहेगी। वहीं, घर खरीदने वालों के लिए होम लोन की ईएमआई कम होने से घर खरीदना पहले से अधिक सुलभ होगा। इस फैसले से ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा और आवासीय व कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग में तेजी आने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह समय पर लिया गया कदम रियल एस्टेट क्षेत्र की गति को बनाए रखेगा, निवेशकों को आकर्षित करेगा और प्रॉपर्टी बाजार में स्थिरता लाने में मदद करेगा। यह निर्णय सरकार के आर्थिक सुधारों और राजकोषीय अनुशासन के प्रयासों के साथ भी मेल खाता है, जिससे उद्योग और उपभोक्ता दोनों के लिए सकारात्मक संकेत मिलता है।
सुश्री मंजू याग्निक, नाहर समूह की उपाध्यक्ष और NAREDCO- महाराष्ट्र की वरिष्ठ उपाध्यक्ष, RBI द्वारा रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती करने का निर्णय एक मजबूत और समय पर लिया गया हस्तक्षेप है, खासकर आवासीय क्षेत्र में मांग में कमी के शुरुआती संकेतों के बीच। यह व्यापक आर्थिक स्थिरता और विकास की खोज में केंद्रीय बैंक के विश्वास को भी दर्शाता है। रेपो दर को घटाकर 5.5% करने से पूरे ऋण पारिस्थितिकी तंत्र पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा, जिससे होम लोन की ब्याज दरें 7.75% से काफी नीचे आ जाएँगी – मौजूदा और संभावित घर खरीदारों दोनों के लिए यह एक बहुत ही उत्साहजनक विकास है।
यह दर कटौती विशेष रूप से पहली बार खरीद के लिए सामर्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार लाने के लिए तैयार है, इससे मध्यम आय और प्रीमियम आवास खंडों में रुचि को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। डेवलपर्स के लिए, उपलब्ध सस्ता ऋण तरलता बाधाओं को कम करेगा, परियोजना कार्यान्वयन में तेजी लाएगा और डिलीवरी की समयसीमा में सुधार करेगा। इससे, बदले में, बिना बिकी हुई इन्वेंट्री को खपाने के लिए आवश्यक नकदी प्रवाह उपलब्ध होगा, साथ ही नए खरीदारों की रुचि भी पैदा होगी, जो समग्र रूप से रियल एस्टेट मूल्य श्रृंखला के लिए अच्छा है, और इस प्रकार 200 से अधिक संबद्ध उद्योगों के साथ इसके संबंधों के कारण इस क्षेत्र के विकास और व्यापक आर्थिक पुनरुद्धार को सक्षम बनाया जा सकेगा।
विकास गर्ग,जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर, गंगा रियल्टी ने कहा कि रेपो रेट को घटाकर 5.5% करना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है। ब्याज दरों में संभावित कमी से होम लोन अधिक किफायती होंगे, जिससे खासकर मिड-इनकम और फर्स्ट-टाइम होमबायर्स के बीच मांग में बढ़ोतरी की उम्मीद है। इस कदम से आवासीय बाजार को स्थिरता मिलेगी और डिमांड में गति आएगी। साथ ही, डेवलपर्स के लिए पूंजी की लागत में कमी से परियोजनाओं के कार्यान्वयन और फंडिंग में सहूलियत होगी। मौद्रिक नीति रुख को ‘न्यूट्रल’ करना यह दर्शाता है कि आरबीआई विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाने की दिशा में अग्रसर है। कुल मिलाकर, यह निर्णय सेक्टर की रिकवरी को सपोर्ट करेगा और बाजार में विश्वास को मज़बूती देगा।
सारांश त्रेहान, प्रबंध निदेशक, त्रेहान ग्रुप के अनुसार, रेपो दर में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर इसे 5.5% पर लाने का भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का निर्णय एक स्वागतयोग्य कदम है और भारत की आर्थिक गति के समर्थन का एक मजबूत संकेत है। रियल एस्टेट सेक्टर के लिए यह एक समयानुकूल प्रोत्साहन है, जो आवासीय क्षमता और खरीदारों की भावना में महत्वपूर्ण सुधार लाएगा। कम ब्याज दरों का सीधा असर मासिक किश्तों (EMI) में कमी के रूप में होता है, जिससे संभावित घर खरीदार अधिक आत्मविश्वास के साथ खरीदारी का निर्णय ले सकेंगे। यह विकास विशेष रूप से पहले बार घर खरीदने वालों के लिए लाभकारी है और किफायती तथा मिड-सेगमेंट आवास की मांग को बढ़ावा देगा। डेवलपर्स के दृष्टिकोण से देखें तो आसान क्रेडिट उपलब्धता परियोजनाओं के क्रियान्वयन को सुचारू बनाने और तरलता बढ़ाने में मदद करेगी। हमारा मानना है कि यह दर कटौती, सरकार के बुनियादी ढांचे और शहरी विकास पर निरंतर ध्यान देने के साथ मिलकर, रियल्टी सेक्टर को पुनर्जीवित करेगी और भारत की विकास गाथा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
