
देश में लोकसभा चुनाव चौथे चरण की ओर प्रस्थान कर रहा है। वहीं बिहार की राजनीति में 90 के दशक जैसे बाहुबलियों की वापसी की बातें हो रही हैं। 90 के दशक में माफिया, हिस्ट्रीशीटर बिहार की राजनीति में बहुत सक्रिय थे, जो बाद में बिहार की पहचान के साथ चिपक ही गया। उसी दौर में राजनीति के अपराधीकरण और अपराध के राजनीतिकरण का चरम था और बिहार की राजनीति और बाहुबल को पर्याय माना जाने लगा। एक बार फिर बिहार के चुनाव में बाहुबलियों का दबदबा देखने को मिल रहा है। सभी राजनीतिक दल बाहुबलियों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की जुगत में हैं।
बाहुबलियों का दौर लौटा
पप्पू यादव
राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। वे कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। मगर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से बात नहीं बनी। राजद ने बीमा भारती को अपना प्रत्याशी बनाया। इसके बाद पप्पू यादव ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था।
हिना शहाब
बाहुबली शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब सिवान लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनावी मुकाबले में हैं। शहाबुद्दीन के निधन के बाद हिना के सामने विरासत बचाने की चुनौती है। सिवान की चर्चा पहले शहाबुद्दीन की वजह से होती थी और अब हिना शहाब के चुनाव में उतरने से है। एनडीए से विजयलक्ष्मी देवी प्रत्याशी हैं। राजद से अवध बिहारी चौधरी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। सिवान में छठे चरण में मतदान होगा।
पूर्व मंत्री ददन पहलवान
बक्सर सीट से पूर्व मंत्री ददन पहलवान भी निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। 2000 में ददन पहलवान ने डुमरांव से निर्दलीय विधानसभा का चुनाव जीता था।
अशोक महतो
अशोक महतो की गिनती बिहार के बाहुबालियों में होती है। विधायक पर बम से हमला, मनीपुर नरसंहार और नवादा जेल ब्रेक कांड समेत कई मामलों में अशोक भागलपुर जेल में बंद थे। नवंबर 2023 में 17 साल बाद जेल से रिहाई हुई। नौ जुलाई 2006 को झारखंड के देवघर से अशोक महतो को गिरफ्तार किया था। नवादा जिले का बढ़ौना अशोक महतो का गांव है। जेल से बाहर आने के बाद इसी साल अशोक ने पटना के बख्तियारपुर स्थित करौटा जगदंबा मंदिर में दिल्ली में रहने वाली 45 वर्षीय अनीता कुमारी से शादी की थी। अब अनीता आरजेडी की टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
आनंद मोहन की पत्नी लवली
शिवहर से एक ओर बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद हैं, जो जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। दूसरी तरफ़ आरजेडी की उम्मीदवार रितु जायसवाल हैं। आनंद मोहन और उनकी पत्नी लवली आनंद का राजनीतिक सफ़र काफ़ी दिलचस्प रहा है। ये दोनों समय-समय पर जनता दल, समता पार्टी, बीजेपी, कांग्रेस, आरजेडी, समाजवादी पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के साथ जुड़ चुके हैं।
बाहुबली नेता और RJD प्रत्याशी मुन्ना शुक्ला
बिहार की राजनीति में वर्चस्व, बाहुबल जैसे शब्द जेहन में सबसे पहले आते हैं। ये ऐसे शब्द हैं जो समय-समय पर हर पार्टी और उसके नेता के साथ जुड़ते रहे हैं। इसी लंबी फेहरिस्त में विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला का नाम सामने आता है, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्हें राजनीतिक दल डर के मारे टिकट देती रही हैं। कहा जाता है कि मुन्ना शुक्ला बाहुबल और नेतागिरी का पूर्ण कॉकटेल हैं। हालांकि मुन्ना शुक्ला को बाहुबली नहीं कहते बल्कि वह अपने आपको आन-बान और शान के ‘जनबली’ कहते हैं। असल में मुन्ना शुक्ला की कहानी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के लालगंज से शुरू होती है। कहा जाता है, राज्य और देश में जितनी मुजफ्फरपुर की लिची फेमस नहीं है, उससे कई ज्यादा मुन्ना शुक्ला का नाम फेमस है।