नई दिल्ली। रेलबे की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। अगर आपको बिहार जाना है तो भगवान मिल जाएंग लेकिन टिकट कन्फर्म नहीं मिलेगा। आज रेलवे टिकट की कालाबाजारी की पोलपट्टी माले सांसद सुदामा प्रसाद ने लोकसभा में खोल कर रख दिया। बजट सत्र में बुधवार को सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि ट्रेन में दलालों के जरिए आसानी से कंफर्म टिकट मिल जाता है। उन्होंने बताया कि कैसे दलालों के माध्यम से ट्रेन में बर्थ आसानी से मिल जाती है। सांसद ने रेलवे अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि यात्री जब टिकट नहीं पाते, तो दलालों से संपर्क करते हैं, जो अतिरिक्त शुल्क लेकर बर्थ की व्यवस्था कर देते हैं।
सुदामा प्रसाद ने कहा कि यह समस्या खासकर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान अधिक देखने को मिलती है, जब टिकटों की मांग बढ़ जाती है। उन्होंने रेलवे मंत्रालय से इस भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की। सांसद ने यह भी बताया कि दलालों के कारण आम यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार बर्थ नहीं मिल पाती। उन्होंने सदन में मांग की है कि रेलवे का अलग से बजट पेश किया जाना चाहिए।
पूंजीपतियों पर सुदामा प्रसाद का निशाना
माले सांसद सुदामा प्रसाद यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा जो रेलवे का अंधाधुंध निजीकरण किया जा रहा है, इसपर रोक लगाई जानी चाहिए। पूंजीपतियों की दिलचस्पी मुनाफे में है। रेल यात्रियों की सुरक्षा और उनकी सुविधाओं को बढ़ाने में नहीं है। निजीकरण बंद होने से लाखों नौकरियों का रास्ता खुलेगा। रेलवे में जनरल बोगियों को बढ़ाया जाए। साथ ही रेलवे बुकिंग प्रणाली में भ्रष्टाचार पर रोक लगे। रेलवे को आम जनता के लिए लाइफ लाइन बनाया जाए ना कि अमीरों के लिए।’
जनरल बोगियों को बढ़ाने की मांग
उन्होंने दावा किया जनरल बोगियों को लगातार कम किया जा रहा है। पहले जनरल बोगियां 12-12 की तादाद में होती थी, लेकिन अब उनको कम किया जा रहा है। पटना-मुजफ्फरपुर और कटिहार में ट्रेनों में यात्रियों को भेड़-बकरियों की तरह भरा जा रहा है। इस पर तुरंत रोक लगे और जनरल की बोगियों को बढ़ाया जाए।
