बिहार के 14 करोड़ आबादी के लिए बड़ी खबर है। अब जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ब्लॉक के चक्कर नहीं कटाने होंगे। न ही दलालों को पैसा देना होगा। अब ग्राम पंचायत में ही जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनकर मिलेंगे। आपको बता दें कि बिहार में हर साल 30 लाखों बच्चों का प्रमाणपत्र बनाया जाता है। प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सभी पंचायत सरकार भवन में ऐसी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस संबंध में अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की ओर से पहल शुरू हो गई है। तीन स्तरों पर व्यवस्था होगी। पंचायत सरकार भवन में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने को अलग से काउंटर के लिए विचार हो रहा है। यहां पंचायत सचिव के स्तर से प्रमाणपत्र जारी होंगे।
ग्रामीण आबादी को होगी बड़ी सहूलियत
अब तक ग्रामीणों को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी के पास जाना पड़ता था। वहां पर उनको अपना काम छोड़कर जाना होता था। वहां दलाल घूमते रहते थे। स्टाफ की कमी और एक ही काउंटर होने के कारण लंबी लाइनें लगती थीं। अब उनको इन समस्याओं से दोचार नहीं होना होगा।
ट्रायल शिविर लगने जा रहा
मिली जानकारी के अनुसार ट्रायल के तौर पर प्रदेश की सभी पंचायतों में ग्राम विकास शिविर लगने जा रहे हैं। इसमें जिन बच्चों को अभी तक जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना है इसे अभियान के तौर पर किया जा रहा है। बता दें कि पहले प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी के स्तर से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की व्यवस्था थी। अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय ने पाया है कि इससे आम लोगों को दिक्कतें हो रही हैं और प्रखंड कार्यालय जाने की मजबूरी होती है। ऐसे में कार्यालय में कार्यभार भी अधिक हो जा रहे हैं लोगों की भीड़ भी अधिक हो जा रही है, साथ ही आम जनता परेशान होती है। ऐसे में सरकार ने यह फैसला लिया कि अब यह काम पंचायत में ही हो पाएगा।
तीन स्तर पर यह व्यवस्था काम करेगी
बताया जा रहा है कि यह व्यवस्था तीन स्तरों पर होगी। जन्म के 30 दिन के अंदर बच्चों का पंचायत सचिव प्रमाण पत्र जारी करेंगे। वहीं, जन्म के 1 महीने से 1 साल के भीतर प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी की अनुशंसा पर और जन्म के एक साल के बाद बच्चों का प्रखंड विकास पदाधिकारी यानी बीडीओ की अनुशंसा पर प्रमाण पत्र जारी किये जाएंगे।
