पटना, 17 अक्टूबर। बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार कर रही है। इसके तहत ई-बसों के साथ निजी दोपहिया, तिपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए भी आधुनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग को आसान बनाना और राज्य में ईवी के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है।
परिवहन विभाग के अनुसार, पूर्णिया जिले में ई-बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और गया जिले में निर्माण कार्य जारी है। इस तरह पांच जिलों में ई-बस चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।
प्रत्येक बस डिपो में 50 बसों की क्षमता के लिए आठ-आठ चार्जिंग प्वाइंट लगाए जा रहे हैं। इनकी मदद से एक बस को करीब एक से डेढ़ घंटे में चार्ज किया जा सकेगा। इसके अलावा, पटना के फुलवारीशरीफ, राजगीर और मुजफ्फरपुर के बस डिपो में चार्जिंग स्टेशन पहले से ही चालू हैं।
पटना के 10 सरकारी परिसरों में बनेंगे फास्ट चार्जिंग स्टेशन
निजी इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग सुविधा बढ़ाने के लिए राजधानी पटना के 10 प्रमुख सरकारी परिसरों में फास्ट डीसी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। परिवहन विभाग और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत इन स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है।
इन प्रस्तावित स्थानों में मुख्य सचिवालय, बिहार विधानसभा, समाहरणालय, विश्वेश्वरैया भवन, विकास भवन, सिंचाई भवन, मल्टी मॉडल हब कंकड़बाग, बेउर मोड़ और हार्डिंग रोड शामिल हैं।
विभाग के मुताबिक, इन स्टेशनों पर इलेक्ट्रिक कार को करीब 45 से 60 मिनट में चार्ज किया जा सकेगा। यहां दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी। सरकारी परिसरों में स्थापित होने के बावजूद इन चार्जिंग स्टेशनों का इस्तेमाल आम नागरिक भी कर सकेंगे।
चार्जिंग स्टेशन लगाने पर 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी
बिहार ईवी नीति 2026 के तहत सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके अंतर्गत मशीनरी और उपकरणों की लागत का 25 प्रतिशत, अधिकतम 10 लाख रुपये तक का अनुदान मिल सकता है।
इस योजना के तहत सरकारी भवनों, व्यावसायिक परिसरों, होटलों, अस्पतालों, शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स और आवासीय अपार्टमेंट में चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकते हैं। पांच से अधिक परिवारों वाली हाउसिंग सोसाइटी, पेट्रोल पंप, हाईवे पर स्थित ढाबों और रेस्तरां, बस स्टैंड तथा पार्किंग स्थलों पर भी ये स्टेशन लगाए जा सकते हैं।
चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार और अनुदान की व्यवस्था से राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत होने की उम्मीद है। इससे निजी वाहन चालकों के साथ सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को भी सुविधा मिल सकती है।