पटना। सोशल मीडिया और तकनीक के दौर में नई पीढ़ी को लोकतंत्र की बारीकियों से परिचित कराने के लिए पटना के बाल्डविन अकादमी में PRS-स्टूडेंट पार्लियामेंट 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सांसदों की भूमिका निभाते हुए सदन की कार्यवाही का संचालन किया और विभिन्न मुद्दों पर सवाल-जवाब और चर्चा की। इसका मकसद बच्चों को केवल किताबों के जरिए संसद और संविधान की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें संसदीय प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव कराना था। छात्र संसद में सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से लेकर नीति निर्माण और लोकतांत्रिक संवाद तक कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी का मुद्दा उठा। छात्र संसद में आठवीं कक्षा की छात्रा प्रत्यूषी कुमारी ने सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स से जुड़े सवाल को सदन के सामने रखा। उन्होंने सोशल मीडिया पर अधूरी या भ्रामक जानकारी के प्रसार को गंभीर मुद्दा बताते हुए अपनी बात रखी। प्रत्यूषी ने कहा कि इस गतिविधि के दौरान उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि किसी मुद्दे को सदन में प्रभावी तरीके से किस तरह प्रस्तुत किया जाता है। उनका कहना था कि केवल जोर से बोलना किसी बात को प्रभावी नहीं बनाता, बल्कि उसके समर्थन में तथ्य और पूरी जानकारी रखना जरूरी है। संसद में सवाल उठाने वाले जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है कि वह विषय को विस्तार से सदन के सामने रखे।
बच्चों ने सीखा कि लोकतंत्र में असहमति भी जरूरी है। बाल्डविन अकादमी के प्रिंसिपल राजीव रंजन सिन्हा ने कहा कि छात्र संसद विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक व्यवहार सीखने का अवसर दे रही है। लोकतंत्र का मतलब केवल अपनी बात रखने का अधिकार नहीं, बल्कि दूसरे पक्ष को सुनना, असहमति का सम्मान करना और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखना भी है। उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र में अलग-अलग विचार रखने वाले लोग संवाद के जरिए आगे बढ़ते हैं। बच्चों को इसी सोच के साथ सदन की कार्यवाही में शामिल किया गया, ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका समझ सकें।राजनीति को लेकर सोच बदलने में मददगार आयोजन। बिहार विधानसभा के सदस्य देवेश कांत सिंह ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के जरिए लगातार नई जानकारी हासिल कर रही है। ऐसे में उसे संविधान, संसद और राजनीति की वास्तविक भूमिका समझाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज में राजनीति और राजनेताओं को लेकर कई बार नकारात्मक धारणा बन जाती है। छात्र संसद जैसे कार्यक्रम बच्चों को लोकतांत्रिक संस्थाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली समझने का अवसर देते हैं और राजनीति को लेकर उनकी सोच को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।
सड़क और सदन की बहस में अंतर समझाया। विधायक मंजरिक मृणाल ने कहा कि सड़क पर किसी मुद्दे पर अपनी बात रखना और संसद में किसी नीति पर चर्चा करना बिल्कुल अलग प्रक्रिया है। सदन में नीति निर्माण के दौरान नियम, प्रक्रिया और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे कई पहलुओं पर विचार किया जाता है। विधायक सुभानंद मुकेश ने कहा कि बच्चों को अभी से संसदीय प्रक्रिया की जानकारी मिलने से भविष्य के नीति निर्माताओं को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संवाद बेहद जरूरी है और बच्चों को मतभेद के बावजूद बातचीत जारी रखने की आदत विकसित करनी चाहिए।
प्रेम कुमार बोले- आज के बच्चे ही कल के नीति निर्माता। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के बच्चे ही देश के भविष्य के नीति निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि छात्र संसद के जरिए विद्यार्थियों ने यह समझा कि किसी नीति को तैयार करते समय किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है। सदन में उठाया गया सवाल केवल व्यक्तिगत विषय नहीं होता, बल्कि उसका संबंध पूरे समाज से हो सकता है। उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष की राजनीतिक भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन सदन के भीतर सभी का अंतिम उद्देश्य राज्य और देशहित में काम करना होना चाहिए।