नई दिल्ली: ऑल-इंडिया हाउसिंग प्राइस इंडेक्स 2024 के अनुसार, भारत के महानगरों में संपत्तियों की औसत कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसका प्रमुख कारण देश में अमीर लोगों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि है। इंडेक्स से पता चलता है कि ऐसे समय में जब भारत में उच्च आय वाले व्यक्तियों (HNIs) और अति उच्च आय वाले व्यक्तियों (UHNIs) की संख्या में 12% की प्रभावशाली चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) देखने को मिल रही है, तब किफायती आवास सेगमेंट की तुलना में बड़े आकार वाली प्रीमियम संपत्तियों की मांग में बहुत वृद्धि हुई है, यहां तक कि इस सेगमेंट ने बिक्री के मामले में किफायती आवास के सेगमेंट को भी पीछे छोड़ दिया है। वहीं, प्रॉपर्टी की कीमत में बेतहाशा बढ़ोतरी से आम लोग अपने घर के सपने पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ऑनलाइन रियल एस्टेट सलाहकार प्लेटफ़ॉर्म Housing.com और इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस (ISB) की संयुक्त पहल, हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (HPI) समय के साथ नई आवासीय संपत्तियों की बिक्री की कीमतों में होने वाले बदलावों को ट्रैक करती है। HPI घर खरीदने वालों, निवेशकों, डेवलपर्स और नीति निर्माताओं के लिए एक प्रमुख बेंचमार्क के रूप में कार्य करता है, जो बाजार के ट्रेंड्स और कीमतों में होने वाले बदलावों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है। यह भारत के डायनेमिक रियल एस्टेट लैंडस्केप में सजग निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण टूल बना हुआ है।
अधिकांश शहरों में कीमतों में वृद्धि हुई
दिसंबर 2024 में, पूरे भारत में HPI का स्तर 129 अंक दर्ज किया गया, जो जनवरी से 4 अंकों की वृद्धि दर्शाता है। कंपनी ने इंडेक्स डेटा से लिए गए मुख्य निष्कर्षों पर ज़ोर देते हुए अपनी रिपोर्ट में बताया कि यह वार्षिक वृद्धि मजबूत मांग और सकारात्मक उपभोक्ता भावनाओं के कारण हुई है। हालांकि, बीते साल की तुलना में इस वृद्धि की गति थोड़ी धीमी रही है—दिसंबर 2023 में HPI का स्तर 132 अंक था, जो भारतीय रियल एस्टेट के लिए एक ऐतिहासिक साल रहा था। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) और अहमदाबाद जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर, विश्लेषण में शामिल अधिकांश शहरों में संपत्ति की कीमतों में वृद्धि देखी गई, जिससे कुछ शहरों में आवासीय किफायत स्तर पार हो गया। यह ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार आवासीय किफायत में सुधार लाने हेतु नई रणनीतियां बना रही है।
195 के स्तर पर, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) ने दिसंबर में इंडेक्स में सर्वोच्च स्थान हासिल किया था, जो पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र में मांग की असाधारण उछाल के कारण हुआ। ज़मीन और निर्माण की लागत के भी बहुत ज़्यादा बढ़ने के बावजूद, अन्य बाज़ारों की प्रमुख कंपनियां यहां अपने पहले प्रोजेक्ट लॉन्च कर रही हैं, ताकि इस क्षेत्र में बढ़ते संपन्न वर्ग से आ रही मांग का लाभ उठाया जा सके। हरियाणा और यूपी की सरकारों के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने और बढ़ते इक्विटी इनफ्लो के कारण यहां कीमतों में वृद्धि जारी रहने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, द्वारका एक्सप्रेसवे, सोहना और नोएडा एक्सटेंशन जैसे प्रमुख माइक्रो-मार्केट निवेश के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
लगातार बढ़ती व्यावसायिक संभावनाओं के कारण देश के दो प्रमुख आईटी हब, बेंगलुरु और हैदराबाद, इंडेक्स में क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। Housing.com और PropTiger.com के ग्रुप सीईओ, श्री ध्रुव अग्रवाल ने कहा, “मजबूत होती कीमतें दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की वृद्धि और समृद्धि की कहानी बयां करती हैं। हालांकि, ये भारत के मध्य वर्ग पर बढ़ते बोझ का भी संकेत देती हैं। रियल एस्टेट की संतुलित वृद्धि को बनाए रखने के लिए, आवासीय किफायत अनिवार्य है। हालांकि, सकारात्मक कदम पहले से ही उठाए जा रहे हैं, जैसे कि केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित बेहतर कर छूट (टैक्स ब्रेक) और ब्याज दरों को कम करना, लेकिन भू-राजनीतिक मुद्दे इन संपत्तियों के निर्माण में लगने वाली लागत पर अतिरिक्त दबाव डालकर इस संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।”