प्रॉपर्टी की दुनिया में बदशाहत कायम कर रहे ये टॉप 10 शहर, घरों की मांग सबसे ज्यादा

नई दिल्ली: कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) ने इजिप्‍ट में 21वें नैटकॉन (NATCON) के दौरान अपने नॉलेज पार्टनर कुशमैन एंड वेकफील्ड के साथ “इंडिया’ज़ नेक्स्ट 10 इमर्जिंग मार्केट्स: इंजन्स फॉर फ्यूचर ग्रोथ ऑफ कमर्शियल रियल एस्टेट” रिपोर्ट को जारी किया।

यह रिपोर्ट रियल एस्टेट की अगली विकास यात्रा के बारे में संपूर्णता से बात करते हुए रियल एस्टेट डेवलपमेंट, संगठित रिटेल पहुंच और परिपक्‍व रिहायशी बाजार में मजबूत लेनदेन के आधार पर भारत के 17 शहरों की पहचान करती है। इन शहरों में से भुवनेश्वर, कोयंबटूर, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, नागपुर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, विशाखापत्तनम को 10 उभरते शहरों के रूप में पहचाना गया है, जिनमें निकट भविष्य में विकास की सबसे अधिक संभावना है।

दिल्ली एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता और अहमदाबाद प्रमुख 8 रियल एस्टेट बाजार बने हुए हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि ये 10 टियर- II शहर जल्द ही भारत की विकास की कहानी को और अधिक गति देने वाले साबित होंगे। शहरों का चयन जनसंख्या, बुनियादी ढांचा, प्रतिभा पूल, आय, रहने में आसानी और किफायती आवास उपलब्धता से जुड़े संकेतकों के आधार पर किया गया है।

स्‍टडी में यह पता चलता है कि कैसे बढ़ता शहरीकरण टियर-I शहरों में मौजूदा बुनियादी ढांचे पर दबाव डाल रहा है क्योंकि वे गुणवत्ता वाले स्थानों की बढ़ती मांग को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। देश में शहरीकरण की रफ्तार तेज हो रही है। 2013 में शहरीकरण दर 32% थी जो 2023 में बढ़कर 36% हो गई है और यह उन बाजारों की ओर ध्यान केंद्रित कर रहा है जिनमें रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए अगला आशाजनक ठिकाना बनने की क्षमता है।

बढ़ती आय और खपत ने टियर II शहरों को खुदरा निवेश के आकर्षण का केंद्र बना दिया है। बड़े ग्रेड-ए मॉल और प्रमुख हाईस्ट्रीट के विकसित होने के साथ ही भारत के टियर-II शहर प्रमुख उपभोग केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में इसकी रफ्तार और बढ़ने की उम्मीद है। इनमें से कई शहरों में आवासीय क्षेत्र में भी जबरदस्त वृद्धि देखी गई है, जो किफायती मानकों पर अच्छा प्रदर्शन करते हैं।

यह रिपोर्ट उभरते शहरों की पहचान करने के लिए जनसंख्या, आर्थिक शक्ति और व्यावसायिक अचल संपत्ति से शहरों के संभावित आकर्षण जैसे मानकों को आधार बनाती है। इसके अलावा, टर्शियरी शिक्षा एनरॉलमेंट, जनसंख्या आकार और जीवनयापन में आसानी जैसे मापदंडों को दूसरों की तुलना में सबसे अधिक महत्व दिया गया है क्योंकि ये बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट्स को अपने ऑफिस को नई जगह स्थानांतरित करने के लिए प्रेरित करते हैं। समग्र तौर पर यह रिपोर्ट बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के उन मानकों पर ध्यान केंद्रित करती है जो आज व्यावसायिक गतिविधि को गति देने वाले अहम कारक हैं।

स्‍टडी में मेट्रो विकास सूचकांक डेटा पर भी विचार किया गया है, जो परिचालन मेट्रो मार्गों (किमी में) के साथ-साथ निर्माणाधीन और प्रस्तावित मेट्रो मार्गों को मिलाकर बना है। अन्य संकेतकों में जनसंख्या वृद्धि (नवीनतम जनगणना दशकीय अवधि के लिए), घर की कीमतें (गुणवत्ता ग्रेड-ए परियोजनाओं में सामर्थ्य को मापने के लिए) और प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (उपभोग क्षमता या विवेकाधीन खर्च को मापने के लिए) शामिल हैं, जो सभी चयनित टियर II शहरों में किसी रियल एस्टेट मार्केट डेवलपमेंट की संभावनाओं की संपूर्णता के बारे में जानकारी देते हैं।

इस रिपोर्ट को जारी करते हुए क्रेडाई के प्रेसिडेंट बोमन आर ईरानी ने कहा, “भारत ने आर्थिक विकास की अपनी उल्‍लेखनीय यात्रा को जारी रखा है और यहां काफी उच्‍च दर से शहरीकरण देखने को मिल रहा है, ऐसे में हमारा अनुमान है कि नए शहर कॉमर्शियल रियल एस्‍टेट बाजार की भावी वृद्धि को बढ़ावा देंगे। हमारा मानना है कि यह रिपोर्ट न केवल शीर्ष 8 रियल एस्टेट बाजारों से परे वैकल्पिक स्थानों की खोज करने वाले कॉरपोरेट ऑक्‍यूपायर्स के लिए बेहतरीन साबित होगी, बल्कि डेवलपर्स को उनके अपने संबंधित क्षेत्रों में मौजूद अवसरों के बारे में भी जानकारी प्रदान करेगी।”

रिपोर्ट के बारे में बात करते हुए, एपीएसी टेनेंट रिप्रेजेंटेशन के प्रमुख और भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अंशुल जैन ने कहा, “यह रिपोर्ट देश की विकास को गति देने वाले प्रमुख चालकों में से एक के रूप में रियल एस्टेट उद्योग के बारे में गहरी जानकारी प्रदान करती है। हमारी अर्थव्यवस्था के सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के तौर पर आगे बढ़ने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026-27 तक 5.0 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर हैं। लेकिन अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि हमें अपनी आर्थिक वृद्धि की गति को और तेज करने और अधिक महानगर बनाने की आवश्यकता है। यह भारत के टियर-2 शहर हैं जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इस रिपोर्ट के साथ, हमारा लक्ष्य शीर्ष 10 उभरते शहरों की क्षमता के बारे में बताना है।”

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