बंजर पड़े निजी विद्यालय, जर्जर पौधों की स्थिति, व्यर्थ होते जल-जीवन-हरियाली

 

 

 

बंजर पड़े निजी विद्यालय, जर्जर पौधों की स्थिति, व्यर्थ होते जल-जीवन-हरियाली के प्रयास*। 

पर्यावरण संरक्षण को लेकर बिहार सरकार द्वारा चलाए गए मुहिम जल-जीवन-हरियाली जिसकी विश्वस्तरीय सराहना हुई थी। सरकार के आह्वान पर निजी विद्यालयों ने इस मुहिम मे बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत *बिहार पब्लिक स्कूल एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन* के *राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डी. के. सिंह* के आह्वान पर संकल्प 1 लाख पौधारोपण के माध्यम से बिहार के विभिन्न निजी विद्यालयों मे 1 लाख पौधे लगाए गए थे। इसके अलावा भी बिहार के तमाम निजी विद्यालयों के प्रांगण में लाखों पौधे लगे हुए हैं। लगातार चल रहे लॉकडाउन के कारण पिछले 3 माह से उन पौधों का देख-रेख भी सम्भव नहीं हो रहा। *विद्यालय प्रांगण मे माली तक को जाने की अनुमती नही है, पौधों की स्थिति जर्जर हो चुकी है*। जहां कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए भीड़-भाड़ वाले जगहों को सैनीटायज करने की व्यवस्था की गई है। वहीँ निजी विद्यालयों के प्रांगण पर सरकार का ध्यान भी नहीं है। निजी विद्यालय प्रांगण एवं उसकी पूरी व्यवस्था पूर्ण रूप से बंजर पड़ी है। निजी विद्यालयों को कार्यालय खोलने की भी अनुमती नहीं है ताकि कर्मचारियों के सहयोग से विद्यालय प्रांगण का देख-रेख किया जाना सम्भव हो सके।
*बिहार पब्लिक स्कूल एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन* सरकार से माँग करती है कि नियमित समय के लिए निजी विद्यालय कार्यालयों को खोलने एवं 33% कर्मचारियों को कार्य करने की अनुमती दे सरकार। जिससे विद्यालय प्रांगण मे लगे लाखो पौधों की भी देख-रेख सम्भव हो सके। संगठन के *अध्यक्ष डॉ. डी. के. सिंह* ने सरकार से माँग करते हुए कहा कि निजी विद्यालय प्रांगण को भी सैनीटायज कराने की व्यवस्था करे सरकार, जिससे निजी विद्यालयों को भी संक्रमण से बचाया जा सके।
*उपाध्यक्ष डॉ. एस. एम. सोहेल* ने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा जन-जन की जिम्मेवारी है। इस तथ्य को गाँव-गाँव तक पहुंचाने का निजी विद्यालयों ने भरपूर प्रयास किया है। विद्यालयों मे बच्चों को पर्यावरण के प्रति उनके कर्तव्यों के निर्वहन का पाठ पढ़ाया गया है। जब भी सरकार को आवश्यकता हुई निजी विद्यालयों ने सहयोग किया है।
संगठन के *सह-सचिव प्रेम रंजन* ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली को सफल बनाने के लिए सरकार के साथ निजी विद्यालयों ने भी ऐंडी चोटी एक कर दिया था। जिसके कारण 1 माह तक निजी विद्यालयों का पाठयक्रम प्रभावित रहा था। जिसका परिणाम था कि सरकार के इस मुहिम को विश्वस्तरीय सराहना मिली थी। बिहार के ज़न-ज़न मे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता उत्पन्न हुई थी। इतने मेहनत और त्याग से हासिल किए गए उपलब्धी को धूमिल और व्यर्थ होते देखना बिहार का दुर्भाग्य हो सकता है। सरकार को निजी विद्यालयों के कार्यालयों को खोलने की अनुमती देनी चाहिए। जिससे बंजर पड़े विद्यालयों का देख-रेख सम्भव हो सके।

*Prem Ranjan*
Joint-Secretary
Bihar Public School & Children Welfare Association

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