जानिए कोरोना संकट का रियल एस्टेट सेक्टर पर असर, क्या घर खरीदना सस्ता होगा?

कोरोना काल के बाद की दुनिया की कल्पना अभी से होने लगी है। हालांकि, यह किसी को नहीं पता कि यह संकट भारत सहित दुनिया में कब खत्म होगा? खैर, इस संकट का भारतीय रियल एस्टेट बाजार कितना गंभीर असर होगा इसका आकलन करते हैं। मेरा मानना है कि इस महामारी के बाद सबसे प्रभावित सेक्टरों में शीर्ष पर रियल एस्टेट होगा। मैं ऐसा क्यों मानता हूं इस पोस्ट के जरिये आप सभी से साझा कर रहा हूं। पोस्ट थोड़ा लंबा है सब्र रखना होगा…

प्रॉपर्टी बाजार में संकट क्यों बढ़ेगा

1. लोग बड़ा वित्तीय फैसला टालेंगे: घर, दुकान या गाड़ी की खरीददारी आम इंसान के जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय फैसला होता हैं। कोरोना काल के बाद जॉब मार्केट से लेकर कारोबारी दिक्कते बढ़ेंगी। ऐसे में लोग घर की खरीदारी करेंगे यह सोचना भी गलत होगा। ऑटो कंपनियां इस बात को मान चुकी है कि 2020 में सुधार मुश्किल है लेकिन डेवलपर्स इस हकीकत को नहीं मानेंगे क्योंकि उन्हें बले पीआर मानने नहीं देंगे।

2. कॉमर्शियल बाजार भी सहारा नहीं देगा: बीते कई सालों से सुस्ती की चपेट में चल रहा रियल एस्टेट को अभी तक कॉमर्शियल सेगमेंट से सहारा मिल रहा था। देश में ऑफिस स्पेस से लेकर मॉल औैर दुकान की मांग थी जो कोरोना के बाद ठप होने वाली है। कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम कल्चर रास आने लगा है। यह ट्रेंड आने वाले समय में और जोर पकड़ेगा। इससे ऑफिस सहित रिटेल स्पेस की मांग घटेगी। कई ऑफिसे खाली भी होंगे।

3. प्रोजेक्ट पूरा करने को मजदूर नहीं मिलेंगे: कोरोना खत्म होने के बाद भी रियल एस्टेट साइट पर काम करने के लिए मजदूर मिलना मुश्किल होगा। जिस हाल में प्रवासी मजदूर अभी घर लौट रहे हैं उनको फिर से इस महानगर में काम करने के लिए लाना बड़ी चुनौती होने वाली है। ऐसे में प्रोजेक्ट का पजेशन देने में देरी होती चली जाएगी। यह घर खरीदारों में विश्वास बहाली को और कमजोर करेगा।

4. फंड जुटाना मुश्किल होगा: अगले छह से एक साल तक रियल एस्टेट डेवलपर्स को फंड जुटाना और प्रोजेक्ट का काम पूरा और मुश्किल होगा। ऐसा घर की बिक्री बिल्कुल ठप होने से होगी। यह छोटे और कमजोर डेवलपर्स की वित्तीय स्थिति को और कमजोर करने का काम करेगा। इससे कई डेवलपर्स दिवालिया होंगे या होने के कागार पर पहुचेंगे।

छोटे शहरों के मुकाबले महानगरों में स्थिति गंभीर होगी

कोरोना काल के बाद छोटे शहरों के मुकाबले महानगरों के रियल एस्टेट बाजार पर अधिक असर देखने को मिलेगा। कोरोना का असर से महानगरों में रह रहे लोगों की मानसिकता बदली है। वह पहले से ज्यादा अपने को असुरक्षित महसूस करेंगे जिससे वे घर खरीदने का फैसला टाल देंगे। वहीं, छोटे शहरों में इसका असर कम होगा क्योंकि वहां पर इस तरह का डर कम होगा।

डेवलपर्स के पास तीन रास्ते बचेंगे

1. बदलना होगा काम करने का तरीका: कोरोना काल के बाद वही डेवलपर्स बाजार में टीकेंगे जो अपने काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव लाएंगे। कोराना खत्म होने के बाद पुराने ढर्रे जैसे साइट विजिट, ब्रोकर के जरिये मोलतोल आदि पर स्वत: विराम लग जाएगा। ऐसे में वही डेवलपर्स प्रॉपर्टी बेच पाएंगे जो अपने प्रोजेक्ट और प्रॉपर्टी की जानकारी पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन पेश करेंगे।
2. रेडी टू मूव ही सहारा होगा: पहले से अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के खरीदार नहीं थे। कोरोना के बाद यह संकट औैर गहराएगा। इससे बचने के लिए डेवलपर्स को तैयार घर बनाकार बाजार में आने होंगे। साथ ही सस्ते घरों का विकल्प देना होगा क्योंकि इस संकट ने लोगों को बचत के मायने बता दिए हैं।

3. कीमत कम से भी राहत मिलेगी : अगर डेवलपर्स कीमत कम करते हैं तो इसका भी पॉजिटिव असर बाजार पर जाएगा। हालांकि, मेरा मनना है कि इसके बावजूद फायदा उन्हीं डेवलपर्स को ही होगा जिनकी शाख अच्छी होगी। कम कीमत में भी अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के खरीददार नहीं मिलेंगे।

धन्यवाद…

#Coronaimpactonrealtysector #Analysis #Whatdevelopersdo #Howpropertymarketchnage #Myopnion

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *