नीतीश बाबू मुझे ‘मुन्ना भाई’ बनाने वालों से प्लीज रोकिये

नीतीश बाबू अगर आपने फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस देखी हो तो संजय दत्त उर्फ मुन्ना का किरदार याद होगा। फिल्म में मुन्ना असल में डॉक्टर होता नहीं लेकिन अस्पताल के रोगी उसके अच्छे व्यवहार से डॉक्टर से ऊपर मानने लगते हैं। एक वक्त आता है जब फिल्म का एक पात्र जहीर (जिमी शिरगिल) कैंसर के आखिरी स्टेज में होता है और डॉक्टर बाताते हैं कि उसके पास काफी कम वक्त है तो वह मुन्ना ऊर्फ संजय दत्त बोलता है कि ‘मुन्ना तू मुझे बचा ले, तुम इंसान नहीं फरिस्ता है’ लेकिन जब वो जहीर को नहीं बचा पता है कि तो उसे अपने ऊपर काफी ग्लानी होती है। आज सबुह से मुझे भी कुछ वैसा ही हो रहा है। आपको सलाह देने के लिए एक पोस्ट क्या लिख दिया गरीबों और बेसहारों को लगने लगा है कि मैं उनका खेबनहार बन सकता हूं।

सुबह से सैकंड़ों कॉल और मैसेज मेरे पास आ चुके हैं कि मैं इस शहर में फंसा हूं प्लीज मुझे निकालने के लिए आप लिखिए और मेरी बात नीतीश कुमार तक पहुंचाइए। कई छात्रों ने भी फोन किया कि हमारे लिए भी कुछ कीजिए भैया। अब मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि मैं क्या करूं औैर कैसे उन बेसहारों की सहायता करूं। इस संकट की घड़ी में मेरा हाल सांप-छछूंदर जैसा हो रखा है। इस संकट से अभी आप ही मेरा और लाखों गरीबों का मददकर बन सकते हैं क्योंकि सत्ता में आप हैं।

मुझे कई लोग यह भी बोल रहे हैं कि आप पिछले 15 साल में बदलाव नहीं ला पाए तो अब क्या ला पाएंगे लेकिन मैं मौजूदा वक्त में यह मानने को तैयार नहीं है। मैं अभी के वक्त में आपकी आलोचना कतई नहीं करना चाहता क्योंकि एक मात्र रास्ता आप ही हैं। जब रत्नाकर डाकू का हृदय परिवर्तन होकर वाल्मीकि बन सकता है तो आप तो इंसान है। आपने सत्ता बचाने के लिए अभी तक जो किया है वह गलत हो सकता है लेकिन अभी उसे दोहराने का वक्त नहीं है। अभी आपको बिहारी अवाम के साथ खड़े रहने का है। मैं यह मानता हूं की आप ऐसा कर एक नई इवारत लिख सकते हैं।

मैं यह भी मानता हूं कि सत्ता में अपना दंभ होता है और होना लाजमी है लेकिन प्लीज यह वक्त आपको साहस दिखाने और बड़ा करने का है। आप पर सब की नजरें टिकी हैं। अगर योगी आदित्यनाथ अपने मजदूरों और छात्रों को बुला सकते हैं तो आप भी यह कर सकते हैं। आप जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करें लेकिन जो अपने घर से बाहर फंसे हैं उनका ढाढस बढ़ाने के लिए ही कुछ बोलें। इससे उनका मनोबल बढ़ेगा और वे अगला कुछ दिन काट लेंगे तब तक आप उनको वापस लाने का बंदोबस्त करें। ऐसा करने से आप लाखों गरीबों और बेसहारों को उम्मीद की नई किरण दे सकते हैं।

अगर आप तक मेरी बात किसी माध्यम से पहुंच रही है तो प्लीज इसको अनसुनान करें। सत्ता आना या जाना लगा रहता है लेकिन इंसानियत एक बार जाने के बाद फिर से लौटकर नहीं आती है। इसलिए अब देर मत कीजिए बिहार के पालनहार जल्द बेसहारों को घर वापसी की घोषणा करें।

आपका सुभचिंतक,
आलोक

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