लॉक डाउन में अस्थावां के 150 गांव के दूध व्यवसाय के ऊपर इसका असर पड़ा

नालंदा से राकेश कुमार की रिपोर्ट

दुनिया में कोरोना वायरस का कोहराम जारी है, भारत में भी इस महामारी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस बीच बिहार के नालन्दा जिले में इस खतरनाक वायरस का संक्रमण ज्यादा नहीं फैले इसके लिए प्रशासन की ओर से हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इस कोरोना वायरस के कोहराम के कारण लगाए गए लॉकडाउन का असर जहां हर व्यवसाइयों के ऊपर दिखने लगा है वही दूध व्यवसायी भी इससे अछूता नही है। तभी तो अस्थावां के 150 गांव के दूध व्यवसायियों के ऊपर भी इसका असर दिखने लगा है। गौरतलब है कि अस्थावां प्रखंड के वेनार मोड़ स्थित दुग्ध शीतकरण केंद्र को एक महीने पुर्व से बंद कर दिया गया है। जिसके बाद अस्थावां प्रखंड के पिपरापुर, मजीदपुर, सरवहदी, टिंकूलीपर,बहादीबीघा बडेपुर,औंन्दा, कईलापर समेत डेढ़ सौ गांव के दूध के व्यवसायियों पर इसका बुरा असर देखने को मिल रहा है। दूध व्यवसाइयो ने अपना दुखड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुग्ध शीतकरण केंद्र में कर्मियों की आपसी विवाद में पिछले एक महीने से सैकड़ो दूध व्यवसाइयों के दूध को नही लिया जा रहा है। इन कर्मियों के द्वारा सभी दूध व्यवसायियों के साथ मनमानी रवैया अपनाया जाता है। जिसके कारण इन दूध व्यवसाइयों के ऊपर अब भुखमरी की संकट पैदा हो गई है। वैसे भी वर्तमान में कोरोना का संकट में हम लोगों का दूध बेचना भी दुर्लभ हो गया है और मनमानी रवैया के कारण हम लोगों का दूध का उचित दाम भी नहीं मिल रहा है। हम लोगों को रोजाना कई किलोमीटर मोटरसाइकिल से डेढ़ सौ गांव के समिति के लोग अपना अपना दूध लेकर अस्थावां शीतकरण दुग्ध केंद्र में आते हैं और दो-तीन घंटा बैठने के बावजूद हम लोग का दूध इन कर्मियों के द्वारा नहीं लिया जाता है। जिसके कारण हम सभी समितियों में शामिल दूध व्यवसायियों के उपाय घोर संकट पैदा हो गया है। अब ऐसा लगता है कि हम लोगों को दूध का व्यवसाय छोड़कर कोई दूसरा काम करना पड़ेगा। इन दूध व्यवसायियों के द्वारा लगातार कर्मियों से बंद पड़े दुग्ध शीतकरण को खोलने की बात सुनकर कोई जवाब भी नहीं दिया जाता है और टालमटोल किया जाता है। वही अधिकारी रामदयाल सिंह से इस मामले में फोन पर बताया की हमारे यहां पूर्व में जो समिति से दूध लिया जा रहा है उसी से सिर्फ दूध ले रहे है क्योंकि कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन के बाद कर्मचारी भी फस गए। इतना ही नही इस केंद्र में तकनीकी खराबी भी है जिसके कारण समिति से लिया गया दूध बरबीघा शीतकरण भेजा जा रहा है उम्मीद है कि कुछ दिनों बाद इसका हम हो जाएगा।

बाइट—मुनीर यादव दूध व्यपारी।

बाइट–अनुपम कुमार दूध व्यपारी

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