नवनि
युक्त माध्यमिक उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ बिहार के नालंदा इकाई जिलाध्यक्ष संजीत कुमार शर्मा ने कहा कि बिहार सरकार व बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने पूर्व निर्धारित समय से इंटर का रिजल्ट जारी करके एक ऐतिहासिक किर्तिमान स्थापित करने का काम किया है जो सराहनीय है परंतु कोरोनावायरस जैसे वैश्विक महामारी व लाक डाउन के बीच इंटरमीडिएट का रिजल्ट घोषित किया जाना हसुआ के विवाह में खुरपा के गीत गाने जैसे प्रतीत होता है वेशक यह शीघ्रता में उठाया गया कदम है साथ ही अनुत्तीर्ण या कम अंक लाने वाले परीक्षार्थियों की मानसिक स्थिति पर कठोरा घात है । क्योंकि लाक डाउन के कारण वे अपने प्राप्त अंकों का छानबीन व तुलनात्मक मूल्यांकन सही मायने में नहीं कर सकेगे और ना ही उसे अंकों के गलत निर्धारण व पोस्टिंग में चाइलेंज के अभी तुरंत मौके मिले हैं ऐसे में मानसिक स्थिति में बदलाव या उनके द्वारा अन्य कदम उठाए जाने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।, उन्होंने कहा कि जब सामान्य हालात हो जाते तो इंटर का रिजल्ट जारी किया जाता तो राज्य सरकार व परीक्षा समिति की कौन-सी तौहिनी हो जाती ऐसे भी तुरंत कहां स्नातक में दाखिला हो रहा है ? जो पहाड़ टूट जाता।
उन्होंने कहा कि कम अंक लाने वाले या अनुत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थी कोरोनावायरस जैसे संक्रमण वाली बीमारी एवं इसके बचाव के खातिर घरों से नहीं निकलने की मनाही के कारण संभवत वे अभिभावकों का ताना-बाना या दोस्तों के बीच इमेज़ एवं उनके मन में गलत ढंग से उपजे तनावपूर्ण विचारों को अच्छे दोस्तों या शिक्षकों के मार्गदर्शन, व काउंसलिंग के उपरांत हौसला अफजाई में सामान्य हालात में मददगार सिद्ध होते लेकिन बिहार सरकार व परीक्षा समिति ने देश में सर्वप्रथम इंटरमीडिएट के रिजल्ट घोषित करने होड़ में ऐसे परीक्षार्थियों के मनोस्थिति का तनिक भी ध्यान नहीं रखा जो दूर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने एक तरफ जहां इंटरमीडिएट स्तरीय शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षकों एवं परीक्षा में सफल होने वाले परीक्षार्थियों को इंटर के परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन व रिजल्ट के मद्देनजर दोनों को समेकित रूप से बधाइयां व धन्यवाद दिया वहीं दोनों से दूसरी ओर कम अंक लाने वाले या अनुत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाते हुए हौसला अफजाई करने की भी अपील की।
उन्होंने कहा कि अपने वाजिब मांगों को लेकर जिले के दस हजार हड़ताली शिक्षक 38 वें दिन भी पूर्ण लाक डाउन के समर्थन व कोरोनावायरस बचाव एवं सतर्कता आदि के वास्ते सोसल मीडिया के जरिए आम आवाम को एहतियात बरतने व सजग रहने की अपील कर हड़ताल पर डटे हुए हैं। संक्रमण के ऐसे दौर में सरकार द्वारा इन हड़ताली शिक्षकों का विगत तीन माह का वेतन नहीं दिए जाने और शिक्षा शिक्षक व शिक्षार्थी हितों के मद्देनजर हड़ताल नहीं तोड़वाए जाने के कारण इनकी माली हालत गंभीर बनी हुई है ऐसे भुखमरी में हड़तालियों के हड़ताल पूर्व का मेहनताना रोकना अन्याय है। एक तरफ माननीय प्रधानमंत्री जी सभी से वेतन नहीं काटने का अपील कर रहे जबकि जाने अंजाने में बिहार के शिक्षकों ने प्रारंभिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक तक विद्यालयों में 17 एवं 25 फरवरी से पूर्ण तालाबंदी व हड़ताल करके सामाजिक दूरी बनाने एवं कोरोनावायरस जैसे संक्रमण महामारी से ऑटोमेटिकली एहतियातन व बचाव किया है। साथ ही हैण्ड टू माउथ होने के वावजूद भी कोरोनावायरस जागरूकता अभियान के तहत सूबे बिहार में लाखों रुपए के इससे संबंधित बतौर नुक्कड़ नाटक गीत संगीत, चित्र कला ,पोटर, बैनर, पंपलेट, साबुन सेनिटाइजर, मास्क आदि संसाधनों को वितरण कर गांव गली टोले मोहल्ले नगर कस्वे में व्यापक रूप से प्रचार प्रसार कर सरकारी दायित्वों का निर्वहन किया परंतु राज्य सरकार सभी अनसुनी व अनदेखी कर अपनी हठधर्मिता पर अड़ी हुई है।