नालंदा-सरकार ने शीघ्र पहल नहीं किया तो प्रारंभिक विद्यालयों का भी नहीं होगा मूल्यांकन

नालंदा से सिपुल सिंह की रिपोर्ट (9507113732)-  एक तरफ जहाँ सरकार ने हड़ताली शिक्षकों पर अपना दमनात्मक रुख कड़ा कर रखा है,वहीं हड़ताली शिक्षक भी अपने स्टैंड पर दृढ़ता के साथ हड़ताल पर कायम है। बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति नालंदा इकाई के प्रारंभिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक तक के हड़ताली नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों का 26वें दिन शुक्रवार को भी धरना प्रदर्शन सभी बीआरसी पर जारी रहा। शिक्षकों के हड़ताल से स्कूलों में पठन-पाठन का काम बिल्कुल ठप पड़ा हुआ है, वही मैट्रिक के कांपी का मूल्यांकन भी धीमी गति से हो रहा है। इस दौरान समन्वय समिति के संयोजक राणा रणजीत कुमार एवं अध्यक्ष मंडल सदस्य संजीत कुमार शर्मा रौशन कुमार मदन कुमार प्रकाश चंद भारती, कुमार अमिताभ, प्रियरंजन ने कहा कि प्रदेश इकाई के आह्वान पर 13 मार्च से 20 मार्च तक सरकार की दमनकारी नीति, अड़ियल रवैया एवं सरकार के शिक्षा एवं शिक्षक विरोधी नीतियों तथा नियोजनबाद प्रक्रिया के विरुद्ध छात्रों, अभिभावक, बुद्धिजीवियों,समाजसेवियों एवं पंंचायत प्रतिनिधियों के बीच हड़ताली शिक्षक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान शिक्षकों ने नुक्कड़ नाटक,कविता,पेंटिंग, गीत-संगीत ,वृक्षारोपण आदि के माध्यम से अपनी मांंगो एवं सरकार के दमनकारी नीतियों व कुशासन के साथ-साथ सभी विभागों में नियोजन पर बहाली कर छात्रों के भविष्य को सरकार के द्वारा बर्वाद करने की नीति को जनता के बीच रखें और लोगों से हस्तक्षर करायें। हस्तक्षर अभियान के पहले दिन शिक्षकों नेअपनी मांगों के समर्थन में और नियोजनवाद के खिलाफ में 5000 लोगों का हस्तक्षर कराकर शिक्षा बचाओ-बिहार बचाओ अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों से अपील किए।नेताओं ने कहा कि सरकार जबतक नियोजनवाद को समाप्त कर हमारी मांंगो को मान नहीं लेती है,तबतक हड़ताल जारी रहेगा। नेताओं ने सभी प्रखंंडो के सभी घटक संघों के नेतृकर्ताओं के नाम पत्र जारी कर कहा कि हड़ताल अवधि में सभी शैक्षणिक गैर शैक्षणिक अपितु शिक्षण प्रशिक्षण, वर्ग प्रथम से +2 तक के मूल्यांकन, चुनाव, जनगणना मतगणना बीएलओ कार्यों का बहिष्कार करते हुए किसी भी प्रकार के सरकारी पत्र प्राप्त करने व निर्गत नहीं करना है सभी अपने-अपने प्रखंड क्षेत्रों मे जागरूकता अभियान कार्यक्रम को सफलीभूत करना सुनिश्चित करेंगे।*नेताओं ने कहा कि सरकार, सरकारी तंत्र व सत्ता पक्ष के माननीय हम नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों को कोरोना वायरस समझकर कोई मिलने से कतराते हैं तो कोई अपनी यात्रा ही स्थगित कर देते हैं।
नेताओं ने कहा कि जिस प्रकार राज्य सरकार ने कोरोना को लेकर सूबे बिहार के सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों को 31 मार्च तक बंद रखने की घोषणा किया है इसी कड़ी में कोरोना का भय परीक्षको में भी सता रहा है क्योंकि अंतरजिला बहाली होने के कारण मूल्यांकन हेतु पटना, भोजपुर, वैशाली, आदि आसपास के जिलों से आते हैं ऐसे में कोरोना का खतरा और बढ़ जाने की संभावना है इसलिए इंटर मैट्रिक का मूल्यांकन भी 31 मार्च तक स्थगित किया जाना चाहिए।

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