पटना। बिहार बिधानसभा की तैयारियां शुरू हो गई है। इस साल सितंबर महीने में चुनाव होने की उम्मीद लगाई जा रही है। सभी पार्टियां अपनी ओर से तैयारी कर रही हैं। इस बार प्रशांत किशोर के आने से समीकरण कुछ बदला हुआ है। हालांकि, सीएम नीतीश कुमार और पीएम नरेंद्र मोदी की जोड़ी अभी भी सब पर भारी लग रही है। इस बीच तेजस्वी यादव जातीय जनगणना का क्रेडिट लेकर अपना पलड़ा भारी करने में लगे हैं। आखिरी किसके सिर इस बार ताज सजेगा। आइए आंकड़ों से समझने की कोशिश करते हैं।
इस बार कई बदलाव दिखेंगे
बिहार की राजनीति हमेशा देशभर में खास चर्चा में रही है – जातीय समीकरण, गठबंधन की बिसात, और जनता की उम्मीदें इस बार बिहार चुनाव को काफी दिलचस्प बनाएगी। 2025 का चुनाव ना सिर्फ नेताओं का इम्तिहान होगा, बल्कि जनता की सोच का आइना भी होगा। इस बार के चुनाव में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। बिहार का चनावी धमासान कैसा होगा और राजनीति की विसात पर कौन किसको देगा मात? हम लेकर आए है सटीक और डेट से भरपूर विशलेषण। तो देर किस बात की… शुरू करते हैं बिहार में इस बार कौन बनेगा सिकंदर
बिहार विधानसभा चुनाव:
अक्टूबर 2005 चुनाव
कुल सीटें: 243
बहुमत के लिए आवश्यक सीटें: 122
परिणाम:
JD(U): 88 सीटें
BJP: 55 सीटें
RJD: 54 सीटें
LJP: 10 सीटें
INC: 9 सीटें
मुख्यमंत्री: नीतीश कुमार (JD(U))
टर्नआउट: 45.85%
2010 चुनाव
कुल सीटें: 243
बहुमत के लिए आवश्यक सीटें: 122
परिणाम:
JD(U): 115 सीटें
BJP: 91 सीटें
RJD: 22 सीटें
INC: 4 सीटें
LJP: 3 सीटें
मुख्यमंत्री: नीतीश कुमार (JD(U))
टर्नआउट: 52.73%
2015 चुनाव
कुल सीटें: 243
बहुमत के लिए आवश्यक सीटें: 122
महागठबंधन (MGB) परिणाम:
RJD: 80 सीटें
JD(U): 71 सीटें
INC: 27 सीटें
NDA परिणाम:
BJP: 53 सीटें
LJP: 2 सीटें
RLSP: 2 सीटें
HAM: 1 सीट
मुख्यमंत्री: नीतीश कुमार (JD(U))
टर्नआउट: 56.91%
2020 चुनाव
कुल सीटें: 243
बहुमत के लिए आवश्यक सीटें: 122
NDA परिणाम:
BJP: 74 सीटें
JD(U): 43 सीटें
VIP: 4 सीटें
HAM: 4 सीटें
महागठबंधन (MGB) परिणाम:
RJD: 75 सीटें
INC: 19 सीटें
CPI(ML): 12 सीटें
CPI: 2 सीटें
CPM: 2 सीटें
मुख्यमंत्री: नीतीश कुमार (JD(U))
टर्नआउट: 57.05%
प्रमुख दल और चेहरे
RJD – तेजस्वी यादव की रणनीति, रोजगार का मुद्दा
JD(U) – नीतीश कुमार की छवि और बदलाव की चुनौती
BJP – मोदी फैक्टर, संघ का नेटवर्क
अन्य – कांग्रेस, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास, Left पार्टियां, AIMIM, और नए क्षेत्रीय खिलाड़ी
मुख्य मुद्दे
बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन
महिला सुरक्षा और शराबबंदी
कृषि और किसानों की स्थिति
गठबंधन और संभावित समीकरण
मोदी के चेहरे पर भाजापा का दांव
भाजपा ने अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए जिलों और मंडलों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है।
एनडीए के घटक दलों के साथ संयुक्त बैठकों का आयोजन*
भाजपा ने अपने गठबंधन सहयोगियों—जदयू, लोजपा (रामविलास), हम (सेक्युलर), और राष्ट्रीय लोक मोर्चा—के साथ मिलकर सभी जिलों में संयुक्त बैठकों का आयोजन करने की योजना बनाई है।
प्रमुख नेताओं की जनसभाओं का आयोजन
भाजपा ने राज्य में बड़े पैमाने पर जनसभाओं का आयोजन करने की योजना बनाई है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा जैसे शीर्ष नेता शामिल होंगे।
महागठबंधन की रणनीति का मुकाबला
महागठबंधन की रणनीति का मुकाबला करने के लिए भाजपा ने 2015 के चुनावी अनुभवों से सीख लेते हुए अपनी रणनीति तैयार की है। पार्टी ने निर्णय लिया है कि जहां-जहां महागठबंधन रैली करेगा, वहां भाजपा भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी, ताकि विपक्ष के प्रचार का प्रभाव कम किया जासके।
विशेष क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रत
भाजपा ने सीमांचल, मिथिलांचल, और मगध जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की योजना बनाई है, जहां पार्टी की पकड़ अपेक्षाकृत कमजोर है।
मोदी के चेहरे पर दांव
बिहार भाजापा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को आगे कर चुनाव में उतरेगी। कई राज्यों में यह फॉर्मूला हीट रहा है और भाजपा को जीत मिली है।
महागठबंधन बनाम NDA
छोटी पार्टियों की भूमिका
वोट कटवा फैक्टर
बिहार चुनाव को लेकर तेजस्वी की रणनीति
सीमांचल और कोसी क्षेत्र पर विशेष ध्यान। तेजस्वी यादव ने सीमांचल के जिलों—कटिहार, अररिया, पूर्णिया और किशनगंज—में ‘कार्यकर्ता दर्शन सह संवाद यात्रा’ के माध्यम से मुस्लिम और महिला मतदाताओं को विशेष रूप से साधने की कोशिश की है।
महिलाओं के लिए ‘माई-बहन मान योजना’
तेजस्वी यादव ने ‘माई-बहन मान योजना’ की घोषणा की है, जिसके तहत महिलाओं के खातों में हर महीने ₹2,500 दिए जाएंगे।
युवाओं पर जोर
बिहार की 58% आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है। तेजस्वी यादव ने युवाओं को आकर्षित करने के लिए ‘युवा चौपाल’ जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया है, जिसमें रोजगार, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर चर्चा की जा रही है।
किसानों के लिए विशेष योजनाएं
तेजस्वी यादव ने किसानों के मुद्दों को प्राथमिकता में रखा है। उन्होंने किसानों से सीधे मिलकर उनकी समस्याओं को समझा और वादा किया कि उनकी सरकार बनने पर किसानों को उचित समर्थन और सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी।
‘बेहतर बिहार के लिए 5 शपथ’
तेजस्वी यादव ने पांच प्रमुख वादे किए है:
1. हर घर को 200 यूनिट मुफ्तबिजल।
2. महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये
3. सामाजिक सुरक्षा पेंशन ₹400 से बढ़ाकर 1500 रुपये करेंगे।
4. लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी देंगे।
5. पलायन की समस्या का समाधान और स्थानीय रोजगार के अवसर पउलब्ध कराएंगे।
6. गठबंधन और नेतृत्व की स्पषटता
RJD ने महागठबंधन के नेतृत्व की कमान तेजस्वी यादव को सौंपी है, जिससे उनकी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी स्पष्ट हुई है। इससे पार्टी के भीतर और सहयोगी दलों के बीच नेतृत्व को लेकर कंन्फ्यूजन नहीं है।
कांग्रेस क्या करेगी इस बा
कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेताओं—मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, और तेजस्वी यादव—ने दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें आगामी चुनावों के लिए सीट बंटवारे और रणनीति पर चर्चा हुई।
तेजस्वी यादव को महागठबंधन का चेहरा स्वीकार करना
महागठबंधन की हालिया बैठक में यह स्पष्ट हो गया है कि तेजस्वी यादव ही मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे।
3. संगठनात्मक पुनर्गठन और नेतृत्व परिवर्तन
कांग्रेस ने बिहार में अपनी संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने के लिए राजेश कुमार को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है, जो दलित समुदाय से आते हैं।
सामाजिक समीकरणों पर ध्यान
कांग्रेस ने दलित, मुस्लिम, और पिछड़े वर्गों के वोट बैंक को मजबूत करने के लिए रणनीति बनाई है।
आगामी रणनीतिक बैठकें और न्यूनतम साझा कार्यक्रम
महागठबंधन ने एक समन्वय समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता तेजस्वी यादव केगे।यह समिति संयुक्त रणनीति और न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार करेगी।
नीतीश कुमार बने रहेंंगे किंगमेकर
एनडीए ने स्पष्ट किया है कि 2025 का विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इस निर्णय के साथ, गठबंधन ने 220 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है। इससे साफ हो गया है कि 2025 में भी नीतीश कुमार किंगमेकर बने रहेंगे।
‘प्रगति यात्रा’ के माध्यम से जनसंपर्क
नीतीश कुमार ने 23 दिसंबर 2024 से 21 फरवरी 2025 तक ‘प्रगति यात्रा’ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों में जाकर विकास योजनाओं की समीक्षा की और नई परियोजनाओं की घोषणा की। इस यात्रा का उद्देश्य जनता के बीच सरकार की उपलब्धियों
को प्रस्तुत करना और आगामी चुनाव के लिए समर्थन जुटाना था।
सामाजिक समीकरणों पर ध्यान
नीतीश कुमार की रणनीति में दलित, महिला और पिछड़े वर्गों के मतदाताओं को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने गन्ना किसानों के लिए खरीद मूल्य में वृद्धि जैसी घोषणाएं की हैं, जिससे ग्रामीण मतदाताओं को आकर्षित किया जा सके।
आज तक
भाजपा के साथ संबंधों की मजबूती
हालांकि पहले भाजपा और जदयू के बीच नेतृत्व को लेकर असमंजस था, लेकिन अब भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार ही एनडीए के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। इससे गठबंधन में स्थिरता आई है और संयुक्त अभियान की योजना बनाई गई है।
रोजगार और विकास पर फोकस
जदयू ने 34 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा है, जिसे चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा, पार्टी नीतीश कुमार के दो दशक के शासन में हुए विकास कार्यों को भी जनता के सामने रखेगी।
छोटे दलों की भी होगी अहम भूमिका
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP(RV)]
नेतृत्व: चिराग पासवान
रणनीति: LJP(RV) एनडीए के साथ गठबंधन में रहते हुए अधिक सीटों की मांग कर रही है। पार्टी का उद्देश्य अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को मजबूत करना और गठबंधन में अपनी भूमिका को बढ़ाना है।
2. हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा)
नेतृत्व: जीतन राम मांझी
रणनीति: हम पार्टी एनडीए के साथ गठबंधन में रहते हुए दलित और महादलित समुदायों के समर्थन को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति बना रही है। पार्टी का उद्देश्य इन समुदायों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है।
3. जन सुराज पार्टी
नेतृत्व: प्रशांत किशोर
रणनीति: प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। पार्टी का फोकस विकास और सुशासन पर है, और यह पारंपरिक दलों से अलग एक विकल्प प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही है।
4. विकासशील इंसान पार्टी (VIP)
नेतृत्व: मुकेश सहनी
रणनीति: VIP पार्टी महागठबंधन में शामिल होकर निषाद और मल्लाह समुदायों के समर्थन को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति बना रही है। पार्टी का उद्देश्य इन समुदायों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है।
5. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) [CPI(ML)]
नेतृत्व: दीपंकर भट्टाचार्य
रणनीति: CPI(ML) महागठबंधन का हिस्सा है और सामाजिक न्याय, भूमि सुधार, और श्रमिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। पार्टी का उद्देश्य वामपंथी विचारधारा को मजबूत करना है।
क्षेत्रीय प्रभाव और गठबंधन समीकरण
इन छोटे दलों का क्षेत्रीय प्रभाव विभिन्न जिलों में देखा जा सकता है:
मुजफ्फरपुर और वैशाली: VIP और जन सुराज पार्टी जैसे दलों का प्रभाव इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है, जहां मल्लाह, निषाद, और अन्य पिछड़े वर्गों की आबादी अधिक है।
गया और औरंगाबाद: CPI(ML) और हम पार्टी जैसे दलों का प्रभाव इन क्षेत्रों में देखा जा सकता है, जहां दलित और महादलित समुदायों की संख्या अधिक है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में छोटे दलों की रणनीति गठबंधन राजनीति, सामाजिक समीकरण, और क्षेत्रीय प्रभाव के आधार पर तय हो रही है। ये दल अपने-अपने समुदायों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
आपके अनुसार, इस बार बिहार में क्या प्राथमिकता होगी – विकास या जातीय समीकरण? अपनी राय कमेंट में साझा करें।







