New Delhi: पहलगाम में भारतीय टूरिस्टों पर आतंकवादी हमले और 26 लोगों की मौत के बाद से भारत और पाकिस्तान में तनाव चरम पर पहुंच गया है। युद्ध की आशंका से इनकार नहीं किया जा रह है। इस बीच 7 मई यानी कल देशभर के 244 सेंसेटिव जिलों में मॉक ड्रिल कराया जाएगा। आखिर यह मॉक ड्रिल होता है क्या और इससे आम नगरिकों को क्या ट्रेनिंग दी जाएगी। आईए जानते हैं।
क्यों हो रही है यह मॉक ड्रिल?
गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह अभ्यास इसलिए जरूरी है ताकि नागरिकों को सायरन, अलर्ट सिस्टम और आपात स्थिति में बचाव के तरीकों की व्यावहारिक जानकारी दी जा सके। इसके जरिए नागरिक सुरक्षा संगठन (Civil Defence) की भूमिका को मजबूत किया जाएगा, ताकि युद्ध जैसे हालात में जान-माल की रक्षा की जा सके।
मॉक ड्रिल में क्या ट्रेनिंग दी जाएगी?
जानकारों का कहना है कि 1971 युद्ध से पहले भारत में इसी तरह का मॉक ड्रिल कराया गया था। अब उसके बाद कराया जा रहा है। इस मॉक ड्रिल में हवाई हमले की चेतावनी, कंट्रोल रूम के कामकाज को देखना, आम लोगों और छात्रों को हमलों के दौरान किस तरह बचना है उसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान कुछ समय के लिए लोगों को घरों या संस्थानों की सभी लाइट पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए जा सकते हैं। इस मॉक ड्रिल में यह भी देखा जा सकता है कि अगर लाइट पूरी तरह बंद हो जाए तो उस स्थिति में क्या उपाय किए जा सकते हैं। इसके अलावा किसी खास जगह से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की ट्रेनिंग भी दी जा सकती है। मॉक ड्रिल में डिस्ट्रिक्ट कंट्रोलर, सिविल डिफ़ेंस के वॉलंटियर्स, होम गार्ड, एनसीसी, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के वॉलंटियर्स, नेहरू युवा केंद्र संगठन और स्कूल-कॉलेजों के छात्रों की भागीदारी की उम्मीद है।
क्या है इस मॉक ड्रिल का मकसद?
मॉक ड्रिल का मकसद युद्ध के दौरान आम नागरिकों को तैयार करना है। इस मॉक ड्रिल खत्म होने के बाद हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को एक रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को भेजनी होगी, जिसमें बताया जाएगा कि मॉक ड्रिल कैसे हुई, क्या दिक्कतें आईं और आगे क्या सुधार किया जा सकता है। इस अभ्यास का मकसद सिर्फ दिखावा नहीं है, बल्कि यह समझाने की कोशिश है कि सुरक्षा सिर्फ सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आम लोगों की भागीदारी भी उतनी ही ज़रूरी है। जब हर नागरिक को पता हो कि आपात स्थिति में क्या करना है, तो देश की तैयारियां कहीं ज्यादा मज़बूत बनती हैं।
सायरन बजने पर क्या करें?
- तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएं
खुले इलाकों से हटकर इमारतों में शरण लें
टीवी, रेडियो या सरकारी ऐप्स से अपडेट लेते रहें
किसी भी अफवाह से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें







