वैभव सूर्यवंशी की चर्चा भारत ही नहीं पूरी दुनिया में हो रही है। जिस अंदाज में उन्होंने आईपीएल के इस सीजन में बल्लेबाजी की, उससे दुनिया के दिग्गज बॉलर और बैट्समैन अचंभित हैं। वैभन ने काफी समय में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर और युवराज सिंह जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया है। वैभव की असली पहचान उनकी बेखौफ बल्लेबाजी है। उनके बल्ले की टाइमिंग और गेंद को हिट करने की क्षमता उस उम्र के खिलाड़ियों में बहुत कम देखने को मिलती है।
लेकिन वैभव को यहां तक पहुंचाने में उनके पिता के योगदान को भूलना नहीं चाहिए। वैभव की यह सफलता केवल उनके टैलेंट की नहीं, बल्कि उनके पिता के संघर्ष और बलिदान की भी कहानी है। बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर गांव से आने वाले वैभव के पिता, संजीव सूर्यवंशी, पेशे से एक किसान हैं। जब उन्होंने देखा कि उनके छोटे से बेटे में क्रिकेट का जुनून है, तो उन्होंने गांव में ही प्रैक्टिस के लिए एक पिच बनवा दी। लेकिन जल्द ही उन्हें समझ आ गया कि बेटे को बड़ा मुकाम हासिल करने के लिए बेहतर सुविधाओं की जरूरत है। अपने बेटे के सपनों को पंख देने के लिए इस पिता ने अपना पुश्तैनी खेत तक बेच दिया और पटना शिफ्ट हो गए। उन्होंने अपने बेटे को पूर्व रणजी खिलाड़ी मनीष ओझा की अकादमी में दाखिला दिलाया। यह वह दौर था जब परिवार ने भारी आर्थिक तंगी का सामना किया, लेकिन पिता ने वैभव की ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं आने दी। वैभव ने भी पिता के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया। रोज 6-7 घंटे की कड़ी प्रैक्टिस और अनुशासन ने उन्हें आज उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां करोड़ों रुपये उनके कदम चूम रहे हैं।
क्या वैभव संभाल पाएंगे शोहरत का यह दबाव?
आईपीएल में जलवा बिखेरने के बाद वैभव के लिए सबसे बड़ी चुनौती शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को सीनियर लेवल के लिए तैयार करना होगा। हालांकि, उनके कोच और पिता का मानना है कि वैभव मानसिक रूप से बहुत परिपक्व हैं। आगे की राह उनके लिए घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे) में लगातार रन बनाने और आईपीएल के नेट्स में इंटरनेशनल खिलाड़ियों से सीखने की है। अगर वैभव ने खुद को जमीन से जोड़े रखा और अपने खेल पर फोकस किया, तो वह दिन दूर नहीं जब यह लड़का टीम इंडिया की नीली जर्सी में विराट कोहली जैसी सफलता की कहानियां लिखेगा।