पटना : क्या आपके हँसते-खेलते परिवार को किसी की नजर लग गई है? क्या बिना किसी ठोस वजह के पति-पत्नी के बीच आए दिन विवाद हो रहे हैं? अगर हाँ, तो यह केवल आपसी मनमुटाव नहीं, बल्कि ग्रहों की चाल का दुष्प्रभाव भी हो सकता है।प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य राजन उपाध्याय के अनुसार, दांपत्य जीवन में अचानक आने वाले तनाव और तीखी बहस के पीछे अक्सर ‘राहु’ का हाथ होता है। ज्योतिष शास्त्र में राहु को भ्रम, क्रोध और अलगाव का कारक माना गया है।
राहु कैसे बिगाड़ता है रिश्तों का समीकरण?
ज्योतिषाचार्य राजन उपाध्याय का कहना है कि जब कुंडली या गोचर में राहु की स्थिति अशुभ होती है, तो यह व्यक्ति की बुद्धि को भ्रमित कर देता है। इसके कुछ मुख्य संकेत इस प्रकार हैं:
अकारण शक पैदा होना: बिना किसी आधार के जीवनसाथी पर संदेह करना।
वाणी पर नियंत्रण खोना: छोटी सी बात पर आपा खो देना और कटु वचनों का प्रयोग करना।गलतफहमी का जाल: साथी की सीधी बात का भी गलत अर्थ निकालना।घर में नकारात्मक ऊर्जा: घर में प्रवेश करते ही भारीपन महसूस होना और चिड़चिड़ापन बढ़ना।
”राहु एक छाया ग्रह है। जब यह वैवाहिक भाव या शुक्र (प्रेम के कारक) पर अपना प्रभाव डालता है, तो व्यक्ति को सच्चाई दिखाई देना बंद हो जाती है। ऐसे में पति-पत्नी एक-दूसरे के दुश्मन नजर आने लगते हैं।” — ज्योतिषाचार्य राजन उपाध्याय
बचाव के अचूक उपाय
राजन उपाध्याय जी ने उन दंपत्तियों के लिए कुछ विशेष ज्योतिषीय उपाय भी साझा किए हैं, जो इस समस्या से जूझ रहे हैं:
चंदन का प्रयोग: राहु की शांति के लिए माथे पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं, इससे मन शांत रहता है।
रसोई में भोजन: राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए संभव हो तो रसोई (Kitchen) में बैठकर भोजन करें
पक्षियों की सेवा: प्रतिदिन पक्षियों को सात प्रकार का अनाज (सप्तधान्य) खिलाएं।
शिव उपासना: भगवान शिव को ‘राहु’ का अधिपति माना जाता है। नियमित रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से पारिवारिक क्लेश शांत होता है।
ज्योतिषाचार्य का मानना है कि ग्रहों की शांति के साथ-साथ आपसी संवाद और धैर्य भी उतना ही जरूरी है। अगर आपके घर में भी क्लेश की स्थिति बनी हुई है, तो एक बार अपनी कुंडली का विश्लेषण अवश्य कराएं ताकि समय रहते राहु के दुष्प्रभाव को रोका जा सके।