कुन्दन कुमार सिंह
प्रेम, रिश्तों की बुनियाद पर सिद्धहस्त लेखक
बदलते परिवेश के साथ पारिवारिक जीवन में पति-पत्नी के तानों-बानों में काफी परिवर्तन आ गया है। अब वह जमाना नहीं रहा जब औरतें घूंघट के अन्दर चेहरा और घर के भीतर तक ही सीमित होती थीं। वहीं पुरूष अपने बाहरी दायित्वों का ही निर्वाह करते थे। अब तू औरत है और मैं पुरूष जैसी मनोवृत्ति से अब काम नहीं चलना है। पति-पत्नी अब एक-दूसरे के प्रति वफादारी-विश्वास और एक-दूसरे को सहारा देकर ही गृहस्थ जीवन की नैया पार करना हितकर होगा।
बेवफाई एक मानसिक यातना
सारी उम्र वफादार बने रहने के वादे करने के वाबजूद पति-पत्नी एक दूसरे के प्रति बेवफा क्यों हो जाते हैं यह समझना वाकई बहुत मुश्किल है। जब पति अपनी पत्नी की आत्मिक, व्यावहारिक एवं घर-गृहस्थी संबंधी जरूरतों की पूर्ति करने में असमर्थ होते हैं, लापरवाही बरतते हैं या उसे मानसिक आघात पहुँचाते हैं तो कुछ पत्नियां मार्ग बदलने के लिए प्रेरित हो जाती हैं। बेवफाई एक मानसिक यातना है लेकिन वह सकारण होती है।
पत्नी को अपेक्षा करना ठीक नहीं
बहुत से घरों में पत्नियों को उतना महत्व और प्यार नहीं मिल पाता जिसकी अपेक्षा उन्हें होती है। ऐसे में कभी-कभी उनके धैर्य का बांध टूट जाता है। कई बार वह पति के साथ कोई प्रोग्राम बनाती है। पति वादा भी करता है हज़ार मिन्नतों के बाद। वह सज-संवर कर तैयार रहती है परंतु पति महोदय एक तो वादा करने के बावजूद देर से आते हैं ऊपर से सॉरी कहने की जरूरत भी नहीं समझते। आखिर ऐसे पत्नी कब तक सहन करेगी? यह दूरियों को जन्म देता है औऱ इन्हीं दूरियों के बीच नई संभावनाएं भी उभरने लगती हैं।
वैवाहिक संबंध में अटूट आस्था बनाएं
यही घटनाक्रम दूसरी ओर भी हो सकता है। पत्नी को अपने पति व वैवाहिक संबंध में अटूट आस्था होती है, विश्वास होता है पर जब पति उसकी आस्था को चूर-चूर कर किसी दूसरी स्त्री से संबंध बना लेता है तब पत्नी के विश्वास को धक्का लगता है। साथ रहने-निभाने के लिए जिस विश्वास व प्रेम की जरूरत होती है वह ऐसी घटनाओं के बाद उठ जाता है। इसके बावजूद पत्नी सदैव संबंधों के नाम बिखरते रिश्तों को बांधने की कोशिश करती है पर उन्हें सहेज कर रखने वाला विश्वास उनके बीच से उठ चुका होता है।
पति के हाथों में परिवार की डोर
पति यदि उस सच को स्वीकारने से इनकार करता है तो वह टूट जाती है तब पति के प्रति उसकी लापरवाही बढ़ जाती है। पति जिसे वह दिलोजान से प्यार करती थी, किसी दूसरी औरत के मोहजाल में फंस जाए तो उसका धैर्य टूट जाता है, विश्वास बिखर जाता है औऱ उसमें एक अलग भावना का जन्म होता है। कभी-कभी अधिक आधुनिकता भी सब कुछ तबाह कर देती है। ऐसे पुरूष अपने खुले व्यवहार पर किसी की रोक-टोक या टीका-टिप्पणी पर कतई ध्यान नहीं देते हैं। उन्हें अपने आचरण पर अंकुश लगाने को कहो तो इसे वह अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप समझते हैं।
दाम्पत्य जीवन में समझौता जरूरी
बेवफाई की शिकायत पति-पत्नी के बीच में न हो, इसलिए जरूरी है कि दाम्पत्य जीवन में समझौता करें, जीवनसाथी को महत्व दें और उसकी भावनाओं की कद्र करें। केवल इतना कहने से काम नहीं चलेगा कि नारी को तो ब्रह्मा भी नहीं समझ पाए तो कोई क्या समझेगा। आपको अपनी पत्नी को स्वयं समझना होगा। उसके जज्बात की कद्र करनी होगी, उसके अरमानों की इज्ज़त करनी होगी और उसकी खुशियों का सहभागी बनने का गुर सीखना होगा। तभी गृहस्थ जीवन का बेहतर आनंद प्राप्त होगा। सफल युगलों या सफल गृहस्थों के साथ उन पति-पत्नियों से भी सीख लेना चाहिए जो स्नेहिल और एक-दूजे के प्रति पूर्ण वफादारी के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।

