नई दिल्ली: भारत ने ईवी उद्योग के लिए स्टैंडर्ड स्थापित करना जारी रखा है और भारत की राष्ट्रीय मानक संस्था ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) ने हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए देश के पहले स्वदेशी रूप से विकसित एसी और डीसी कंबाइड चार्जिंग कनेक्टर मानक (एलईवी), आईएस17017 (पार्ट 2/सेक्शन7): 2023 को मंजूरी दे दी है। यह हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए दुनिया का पहला कंबाइंड एसी और डीसी चार्जिंग कनेक्टर स्टैंडर्ड भी है और इसे भारत में डिजाइन और इंजीनियर किया गया है जो एलईवी के लिए विश्व स्तर पर बेंचमार्क बन सकता है। यह मानक एक सामान्य हल्के इलेक्ट्रिक वाहन एसी और डीसी जॉइंट चार्जिंग सिस्टम का मार्ग प्रशस्त करता है, जिससे ईवी इकोसिस्टम के सभी वर्गों यानी मालिकों, वाहन निर्माताओं से लेकर चार्ज पॉइंट ऑपरेटरों तक को लाभ मिलेगा। अपनेआप में अनूठी इस पहल में नीति आयोग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, एआरएआई, ईवी निर्माता और भारतीय मानक ब्यूरो एक राष्ट्रीय मानक विकसित करने के लिए एक साथ आए। यह मानक एक खुला इकोसिस्टम बनाने में मदद करेगा जो दुनिया भर में तेजी से ईवी अपनाने को बढ़ावा देगा। यह ओईएम को पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानकों और प्रोटोकॉल पर निर्भर रहने की बजाय एक ऐसा चार्जिंग सिस्टम लागू करने की अनुमति देता है जो भारतीय नवाचार को आगे बढ़ाएगा। यह मानक हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों (2 पहिया, 3 पहिया वाहन और माइक्रोकार) के लिए एसी और डीसी जॉइट चार्जिंग सिस्टम के लिए मानकीकृत कनेक्टर की बाजार में बहुत बड़ी कमी को दूर करता है। हल्के इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग की आवश्यकताएं अद्वितीय हैं क्योंकि 4 वॉट के चार्जिंग कनेक्टर की उच्च लागत और बड़े आकार के कारण चार-पहिया चार्जिंग कनेक्टर को अपनाना संभव नहीं है। कंबाइंड एसी और डीसी चार्जिंग कनेक्टर से यह सुनिश्चित होता है कि हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तेज या धीमी गति से चार्ज करने के सभी प्रकार के लिए एक हाइब्रिड, लागत-कुशल बुनियादी ढांचा तैयार हो। ग्राहक को अपने साथ भारी चार्जर ले जाने की आवश्यकता के बिना तेज और धीमी चार्जिंग दोनों के लिए एक इंटरऑपरेबल नेटवर्क का लाभ मिलता है। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा, ‘मुझे एक कंबाइंड चार्जिंग स्टैंडर्ड तैयार किए जाने की खुशी है जो हमारे ईवी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक अत्यंत आवश्यक है। भारत में लाइट ईवी के लिए एक कंबाइंड चार्जिंग सिस्टम की सख्त जरूरत महसूस की गई और चूंकि अंतरराष्ट्रीय मानकों में ऐसा कोई विकल्प प्रदान नहीं किया गया है, इसलिए लाइट ईवी ग्राहकों को एसी या डीसी दोनों से चार्ज करने का विकल्प देने के लिए इसे स्वदेशी रूप से विकसित करना आवश्यक था। एक डीसी आउटलेट, जो भी उनके लिए सुविधाजनक रूप से उपलब्ध हो। चूंकि भारत में बिकने वाले 75% से अधिक नए वाहन या दो या तीन–पहिया वाहन हैं, इसलिए हमने एक स्टैंडर्ड बनाया जो वाहन बाजार के सबसे बड़े हिस्से को प्रभावित करता है। इसे संभव बनाने के लिए कई सरकारी निकाय और निजी क्षेत्र के ओईएम ने मिलकर सहयोग किया।‘ उन्होंने आगे कहा, ‘यह एक बेजोड़ वैश्विक नवाचार है जिसे बीआईएस द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। यह एक ही सर्विस पॉइंट/स्टेशन से एसी (धीमी) और डीसी (तेज) दोनों चार्जिंग की सुविधा देता है और इसमें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने और बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। यह इस बात का भी एक अच्छा उदाहरण है कि जब अच्छी नीति, नवाचार और उद्यम देश को सही दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए एक साथ आते हैं तो हम क्या हासिल कर सकते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि नया स्टैंडर्ड भारत को स्वच्छ गतिशीलता क्षेत्र में वैश्विक खिलाड़ी बनाने में सबसे बड़ा सहायक साबित होगा।‘