शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी की आराधना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इस पूर्णिमा को धन, ऐश्वर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष पर्व माना गया है।
पटना। सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व मां लक्ष्मी की आराधना, चंद्रमा की शीतल किरणों और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात्रि मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। इसी वजह से इस रात को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
ज्योतिषाचार्य राजन उपाध्याय के अनुसार, शरद पूर्णिमा केवल चंद्र दर्शन और पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शुद्धता, सकारात्मक संकल्प और जीवन में समृद्धि की कामना का भी अवसर है। इस दिन श्रद्धालु मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना कर परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य और आर्थिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।
मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने की मान्यता
ज्योतिषाचार्य राजन उपाध्याय बताते हैं कि हिंदू धर्मग्रंथों और लोक परंपराओं में शरद पूर्णिमा की रात्रि को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी अपने भक्तों की भक्ति, श्रद्धा और जागरण से प्रसन्न होती हैं। ‘कोजागरी’ शब्द का संबंध ‘कौन जाग रहा है?’ की मान्यता से जोड़ा जाता है। इसी कारण कई स्थानों पर श्रद्धालु रात्रि में जागकर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं।
उन्होंने कहा कि मां लक्ष्मी की उपासना का वास्तविक उद्देश्य केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि धन का सदुपयोग, परिवार में सद्भाव, कर्म के प्रति निष्ठा और जरूरतमंदों की सहायता करने की भावना को मजबूत करना भी है।
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा का विशेष महत्व
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में दिखाई देता है। भारतीय धार्मिक परंपराओं में चंद्रमा को शीतलता, मन और मानसिक संतुलन का प्रतीक माना गया है। इस अवसर पर चंद्र दर्शन, मंत्र जाप और ध्यान करने की परंपरा है। अनेक परिवारों में खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा भी प्रचलित है।
ज्योतिषाचार्य राजन उपाध्याय के अनुसार, पूजा के समय मन को शांत रखकर श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी का स्मरण करना चाहिए। धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में अनुशासन, ईमानदारी और सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए।
कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा?
शरद पूर्णिमा के अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल को सजाएं। मां लक्ष्मी के समक्ष दीपक जलाएं, पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप से पूजा करें। श्रद्धानुसार खीर, फल, मिठाई या अन्य सात्विक भोग अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक सामग्री दान करना भी शुभ माना जाता है। पूजा में दिखावे के बजाय श्रद्धा, पवित्रता और सद्भाव को महत्व देना चाहिए।
धन के साथ सद्बुद्धि और सदाचार भी जरूरी
ज्योतिषाचार्य राजन उपाध्याय ने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ कर्म का विशेष महत्व है। मां लक्ष्मी की कृपा की कामना करने वाले व्यक्ति को मेहनत, ईमानदारी, संयम और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। धन का सम्मान, अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण और परिवार के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन भी समृद्ध जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि शरद पूर्णिमा को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखें, बल्कि इसे परिवार में प्रेम, समाज में सेवा और जीवन में सकारात्मक बदलाव का अवसर बनाएं।
ज्योतिषाचार्य राजन उपाध्याय के अनुसार, शरद पूर्णिमा श्रद्धा, साधना और शुभ संकल्प का पर्व है। मां लक्ष्मी की आराधना के साथ सद्कर्म, सेवा और सदाचार को अपनाकर ही सुखमय एवं संतुलित जीवन की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
