भारत की औद्योगिक ताकत को वेदांता ने दिया 5 बिलियन डॉलर का बूस्ट, आत्मनिर्भर का सपना होगा पूरा

Veda

नई दिल्ली: भारत के अग्रणी महत्वपूर्ण खनिज, उर्जा रूपान्तरण धातु, उर्जा एवं तकनीक सदन वेदांता लिमिटेड ने बड़ी उपलब्धि की घोषणा की है। कंपनी ने देश में 8.5 बिलियन डॉलर आउटले की योजनाओं में से पूंजीगत व्यय में 5 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है। यह निवेश क्षमता विस्तार, बैकवर्ड इंटीग्रेशन एवं कच्चे माल की सुरक्षा परियोजनाओं में किया गया है, जो संसाधनों की दृष्टि से भारत को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देते हैं तथा विश्वस्तरीय बाज़ार की अस्थिरता को झेलने के लिए सशक्त ओद्यौगिक आधार बनाते हैं।

प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार किया

वेदांता देश की कुछ सबसे बड़ी और सबसे रणनीति प्राकृतिक संसाधन संपत्तियों का संचालन करती है, जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन एलुमिनियम स्मेल्टर, दुनिया की सबसे बड़ी भूमिगत ज़िंक खनन साईट, दुनिया का सबसे बड़ा, सिंगल लोकेशन ज़िंक-लैड स्मेल्टर और भारत का सबसे बड़ा ऑनशोर ऑयल फील्ड शामिल है। पिछले दो वित्तीय वर्षों में कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने, बैकवर्ड इंटीग्रेशन को मजबूत बनाने, नई तकनीकों को शामिल करने तथा अपने वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करने के लिए भारत में तकरीबन 2.5 बिलियन डॉलर का निवेश किया है।

इंटीग्रेटेड स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स की स्थापना होगी

मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में वेदांता के सब्सिडरी कारोबार हिंदुस्तान ज़िंक ने क्षमता विस्तार को दोगुना करने की योजनाओं के पहले चरण (बोर्ड द्वारा अनुमोदित) में 1.4 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। इस निवेश के द्वारा खानों एवं मिलों के विस्तार के साथ उदयपुर में 250 केटीपीए इंटीग्रेटेड स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स की स्थापना की जाएगी।

वेदांता भारत की विकसित होती अर्थव्यवस्था के लिए मुख्य संसाधनों जैसे तेल एवं गैस, एलुमिनियम, ज़िंक, सिल्वर, लैड, फैरोक्रोम, स्टील और निकल की घरेलु उपलब्धता को सुनिश्चित करने में अग्रणी रही है। साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर, डीफेंस, एरोस्पेस, ऑटोमेटिव, हाई-टेक मैनुफैक्चरिंग एवं टेक्नोलॉजी में ऐप्लीकेशन्स को बढ़ावा देने में भी उल्लेखनीय योगदान देती रही है। कंपनी का एलुमिनियम कारोबार भारत की तकरीबन आधी मांग को पूरा करने में सक्षम है। इसी तरह वेदांता नवीकरणीय उर्जा, ऑटोमोटिव, एरोस्पेस एवं अन्य विकसित होते क्षेत्रों में भी आधुनिक ऐप्लीकेशन्स के लिए अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है।

जिंक की बात करें तो वेदांता घरेलु प्राथमिक बाज़ार में 77 फीसदी मार्केट शेयर बनाती है और देश की 100 फीसदी सेल्स के साथ भारत की चांदी की तकरीबन 10 फीसदी मांग पूरी करती है। कंपनी के तेल एवं गैस संचालन, देश के हाइड्रोकार्बन का एक चौथाई हिस्सा उत्पादित करते हैं, कंपनी का यह संचालन अपनी शुरूआत के बाद से 1.4 बिलियन बैरल तेल उत्पन्न कर चुका है। कंपनी का स्टील उत्पादन सम्पूर्ण घरेलू बाज़ार की ज़रूरत को पूरा करता है। निकल की बात करें तो वेदांता भारत में निकल की एकमात्र उत्पादक है, इसके द्वारा उत्पन्न 80 फीसदी धातु घरेलु बाज़ार में ही बेचा जाता है।

हाल ही के टैरिफ को मद्देनज़र रखते हुए वेदांता का मानना है कि उर्जा रूपान्तरण धातु जैसे एलुमिनियम, ज़िंक, सिल्वर, तेल एवं गैस की घरेलु उपलब्धता सुनिश्चित (विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर) करना भारत की सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय उर्जा एवं डीफेंस परियोजनाओं को सक्षम बनाने के लिए ज़रूरी है।

‘संसाधन राष्ट्रवाद के बढ़ते दौर में वेदांता यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भारत का विकास इसके अपने संसाधनों से ही हो। हमारा समेकित संचालन, पैमाना और स्थायी निवेश हमें विश्वस्तरीय उत्पादों के साथ घरेलु मांग को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं। साथ ही अर्थव्यवस्था को विश्वस्तरीय कारोबार नीतियों के उतार-चढ़ाव एवं भोगौलिक उथल-पुथल से सुरक्षित रखने में भी योगदान देते हैं। यह सिर्फ आत्मनिर्भरता के बारे में नहीं है, बल्कि भारत के दीर्घकालिक सामरिक एवं आर्थिक भविष्य को सुरक्षित रखने के बारे में भी है।’’ वेदांता के प्रवक्ता ने बताया।

‘देश की ज़रूरतों के लिए’ उत्पादन का वेदांता का दृष्टिकोण आर्थिक संप्रभुता के व्यापक आह्वान को दर्शाता है। और देश को स्थायी, समावेशी एवं विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धी विकास के लिए अपनी प्रचुर खनिज संपदा का सदुपयोग करने के लिए मजबूती से स्थापित करता है। अपने संचालन को भारत के आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण के अनुरूप बनाकर, वेदांता विश्वस्तरीय कारोबार में हो रही मौजूदा उथल-पुथल को दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धी लाभ में बदलने तथा भारत को संसाधनों की दृष्टि से सुरक्षित, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए तत्पर है।

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