MS Dhoni: महेंद्र सिंह धोनी…क्रिकेट की दुनिया का वह शहंशाह, जिसने हर वो मुकाम हासिल किया, जिसे पाने का ख्वाब दुनिया का कोई भी क्रिकेटर देखता है। धोनी ने अपनी कप्तानी में टी20 वर्ल्ड कप, 2011 वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को जीत दिलाई। इतना ही नहीं, चेन्नई को आईपीएल 5 बार अपने दम पर खिताब भी दिलाया। एक वक्त ऐसा भी आया जब महेंद्र सिंह धोनी एक खिलाड़ी से ज्यादा एक करिश्माई इंसान लगने लगे। चाहे टी20 वर्ल्ड कप में योगेंद्र शर्मा से बॉल करना हो या मैच के दौरान कुछ ऐसा फेरबदल करना, जो एक्सपर्ट से लेकर क्रिकेट प्रेमियों को चौंका दे लेकिन अंत में उनका फैसला सही साबित होता रहा। शायद यही वजह रही कि उनकी लोकप्रियता दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ी। क्रिकेट प्रेमी उन्हें ‘थाला’, ‘एमएस’ और ‘मिस्टर कूल’ के नाम से बुलाने लगे। मैदान में धोनी की एक झलक पाने के लिए फैन टकटकी लगाए रहते।
धोनी अब करिश्माई खिलाड़ी नहीं रहे
हालांकि, आज भी उनकी फैन फॉलोइंग कम नहीं हुई है लेकिन धोनी अब वो करिश्माई खिलाड़ी नहीं रहे, जिसके लिए वो जाने जाते थे।
आखिर, ऐसा क्या हुआ कि धोनी अपना ही करिश्मा नहीं दोहरा पा रहे हैं? चेन्नई को एक के बाद एक हार के बाद अब आईपीएल से विदाई तय हो गई है। बहुत सारे लोग बोल रहे हैं कि उन पर बढ़ती उम्र हावी हो गई है। अब सन्यास का वक्त आ गया है। कुछ हद तक यह बात बिल्कुल सही भी है लेकिन क्या यही आखिरी और अंतिम सत्य है? मेरा मनना है बिल्कुल नहीं। उम्र उनके खेल पर हावी हो सकता है लेकिन रणनीति पर नहीं। आज धोनी जो कर रहे हैं, वह सही नहीं बैठ रहा है। चेन्नई की हार की सबसे बड़ी वजह धोनी की रणनीति फेल होना है।
क्यों फेल हो रही रणनीति?
अब सवाल उठता है कि धोनी की रणनीति क्यों फेल हो रहा है? तो इसका जवाब है कि उनका स्टार, समय या भाग्य अब उस तरह फेबरेबल नहीं रहा जैसा कुछ साल पहले था। यही समय का चक्र है। कोई भी इंसान बलवान नहीं हाता है, समय बलवान होता है। हालांकि, मेहनत को दरकिनार नहीं किया जा सकता है लेकिन लक, भाग्य और गूड टाइम तो सर्वोपरि है। आज महेंद्र सिंह धोनी बैड टाइम के शिकार हैं। हालांकि, यह सिर्फ महेंद्र सिंह धोनी के साथ ही नहीं है, तमाम खिलाड़ी और पॉलिटिशियन के उदाहरण मिल जाएंगे, जो जिंदगी की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद अर्श से फर्श तक पहुंच गए। यही जिंदगी है। उतार-चढ़ाव ही असली सच्चाई है।
